7 खून माफ नहीं हो सकते! पूरे परिवार को मारने के बाद उसका हाथ 10 माह के भतीजे के गले की तरफ बढ़ा और फिर…

महिला अपराधियों पर हमारी सीरीज जारी है। इस कड़ी में आज बात उस लड़की की जिसने अपने परिवार के 7 लोगों को मौत दी। इस लड़की ने अपने 10 महीने के भतीजे का भी बेरहमी से गला दबा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस खुंखार लड़की को फांसी सजा दी है।

7 Blood cannot be forgiven! After killing the whole family, his hand moved towards the throat of his 10-month-old nephew and then...
7 Blood cannot be forgiven! After killing the whole family, his hand moved towards the throat of his 10-month-old nephew and then...
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पहले उसने अपने पिता को कुल्हाड़ी से कटवाया, फिर उसके कदम मां की तरफ बढ़े… उसके दोस्त के हाथ में अभी भी कुल्हाड़ी थी। मां को भी उसने बेरहमी से मारवा डाला। कुल्हाड़ी लाल हो चुकी थी। उसने अपने दोस्त को अपने बड़े भाई के कमरे जाने का इशारा किया। अब खून से लाल हो चुकी कुल्हाड़ी को उसने भाई की तरफ बढ़ाया और फिर एक झटके में उसके भी टुकड़े कर डाले। अगली बारी बड़ी भाभी की थी। वो और देर नहीं करना चाहती थी उसने अपने बॉयफ्रेंड से कहा भाभी को कुल्हाड़ी से काट डालो।

कुल्हाड़ी से पूरे परिवार को काटा
उसका चेहरा इतना खतरनाक नज़र आ रहा था कि कल्पना से भी रोंगटे खड़े हो जाएं। वो और उसका बॉयफ्रेंड एक-एक कर पूरे परिवार पर कुल्हाड़ी से हमला कर रहे थे। अभी उसका मकसद पूरा नहीं हुआ था। वो और लाशें बिछाना चाहती थी, वो और खून चाहती थी। उसका बॉयफ्रेंड तेजी से छोटे भाई के कमरे की तरफ बढ़ा, वहां जाकर कुल्हाड़ी से उसने पहले भाई पर वार किया और फिर भाभी पर। घर में उसकी एक कजिन भी थी। उसी कुल्हाड़ी कजिन को भी मार डाला गया। उसके सिर पर खून सवार था। घर में मौजूद 7 लोगों को वो अपने बॉयफ्रेंड की मदद से बड़ी ही बेरहमी से मौत के घाट उतार चुकी थी।

10 महीने के भतीजे का गला दबाया
अब बॉयफ्रेंड घर से जा चुका था और सात लाशों के बीच वो अकेली थी। लाशों को देखकर वो हंस रही थी, तभी उस मासूम के रोने की आवाज़ आई। अपने परिवार की हत्यारन उस हैवान लड़की ने पलट कर देखा, उसकी हंसी रुक गई। वो उस तरफ बढ़ी जहां से बच्चे की रोने की आवाज़ आ रही थी। उस दस महीने के मासूम के गले की तरफ इस हैवान ने लपक के अपना हाथ बढ़ाया और उसके गले को तेजी से दबा दिया। परिवार के 7 लोगों को मार चुकी ये लड़की उस बच्चे के गले को तब तक दबाती रही जब तक उसकी रोने की आवाज़ बंद नहीं हो गई। नन्हा मासूम बच्चा नीला पड़ चुका था, उसकी मौत हो गई थी। ये बच्चा इस लड़की का अपना सगा भतीजा था।

शबनम कातिल नहीं हैवान है!
क्रूरता की सारी सीमाओं को पार करने वाली इस लड़की का नाम है शबनम अली है जिसे इसकी हैवानियत के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सजा-ए-मौत का हुक्म दिया है। 14 अप्रैल 2008 का वो दिन उत्तरप्रदेश में अमरोहा जिले के बावनखेड़ा गांव के लिए सबसे खौफनाक दिन था जब शबनम अली नाम की एक लड़की ने अपने बॉयफ्रेंड सलीम के साथ मिलकर अपने पूरे परिवार को दर्दनाक मौत दी।

डबल एमए थी शबनम अली
बावनखेड़ा गांव में शौकत अली अपने पूरे परिवार के साथ रहते थे। पत्नी, दो बेटे, बहू, दस महीने का पोता और एक बेटी शबनम अली। शौकत अली ने अपने बच्चों को खूब पढ़ाया लिखाया। एक बेटा एमबीए था, दूसरा इंजीनियर। बेटी शबनम ने डबल एमए किया था। वो भी अपने पिता की तरह प्रोफेसर बनना चाहती थी। इसी दौरान शबनम को गांव के ही एक लड़के सलीम से प्यार हो गया। सलीम सिर्फ पांचवीं पास था, जबकि शबनम अंग्रेजी और भूगोल में एमए कर चुकी थी। दोनों का काफी दिनों तक अफेयर चलता रहा। शबनम प्रेगनेंट हो गई थी।

बॉयफ्रेंड के लिए परिवार को खत्म किया
उसने अपने परिवार को सलीम के साथ रिश्ते की बात बताई। पिता शौकत अली और दोनों भाई शबनम के इस रिश्ते के खिलाफ थे। उन्होंने शबनम को सलीम से दूर रहने की हिदायत दी, लेकिन शबनम नहीं मानी। वो किसी भी कीमत पर सलीम से शादी करना चाहती थी और फिर उसने सलीम के साथ मिलकर रच डाली पूरे परिवार को खत्म करने की साजिश। उसने अपने पूरे परिवार को जहर देने का प्लान बनाया। सलीम ने ही शबनम को जहर लाकर दिया।

चाय में जहर मिलाकर दिया
14 अप्रैल की शाम घर पर परिवार के सभी लोग मौजूद थे। शबनम ने सबके लिए चाय बनाई और चाय में जहर मिला दिया। सबने चाय पी और फिर धीरे-धीरे जहर उनके शरीर में घुलने लगा। सब अपने-अपने कमरे में सोने गए, लेकिन फिर कभी नहीं उठ पाए। रात तक घर के सभी लोग मर चुके थे, लेकिन शबनम को अभी भी ये डर था कि कहीं ये लोग सिर्फ बेहोश न हुए हो। उसके बाद शबनम ने जो किया हैवानियत की सारी सीमाएं पार कर रहा था। उसने अपने बॉयफ्रेंड सलीम को फोन करके कुल्हाड़ी मंगवाई और फिर परिवार के सभी लोगों को कुल्हाड़ी से कटवा दिया।

क्रूरता की सारी हदें पार की
सबको कुल्हाड़ी से काटने के बाद सलीम घर से जा चुका था, लेकिन तभी शबनम के दस महीने के भतीजे की रोने की आवाज आई। शबनम ने फिर सलीम को फोन किया कि वो आकर कुल्हाड़ी से भतीजे को मार डाले, लेकिन सलीम ने कहां कि घर में दोबारा आना सही नहीं होगा इसलिए भतीजे को वो खुद मौत के घाट उतारे। इसके बाद क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए शबनम अपने भतीजे की तरफ बढ़ी और उसका गला तब तक दबाती रही जब तक उसका रोना शांत नहीं हो गया।

बेकसूर होने का नाटक करती रही
थोड़ी देर बाद शबनम ने रोना-चिल्लाना शुरू किया। पड़ोसी इकट्ठा हो गए। घर का नज़ारा जिसने देखा उसकी रुह कांप गई। घर में हर तरफ लाशें पड़ी थी। पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। क्राइम के इस खतरनाक केस ने हर किसी के जैहन में दहशत भर दी। ये केस टेलिविजन, अखबार हर जगह सुर्खियां बना। उत्तर प्रदेश के राजनैतिक गलियारों में भी इसपर चर्चा थी। शबनम ने सबको बताया कि किसी उनके घर में आकर पूरे परिवार को मार डाला है। वो रोती रही, नाटक करती रही, लोगों की साहनभूति बंटोरती रही, लेकिन उसका नाटक ज्यादा दिन नहीं चला। उसके सारे बयान केस की हकीकत से बिल्कुल अलग थे। पुलिस को शक हो चुका था।

कोर्ट ने सुनाई सजा-ए-मौत
शबनम के बॉयफ्रेंड सलीम ने पूछताछ की गई। सख्ती करने के बाद सलीम ने अपना गुनाह कबूल किया। पहले ये माना गया कि शायद कत्ल में शबनम शामिल नहीं है, लेकिन बाद में जब शबनम की हकीकत सबके सामने आई तो लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई। शबनम और सलीम को गिरफ्तार कर लिया गया। अमरोहा की ड्रिस्ट्रिक्ट कोर्ट में मामला चला। 3 अगस्त 2010 को शबनम और सलीम को सजा-ए-मौत दी गई। ये दोनों अपनी सजा की माफी के लिए हाइकोर्ट गए, लेकिन फांसी की सजा बरकरार रही। सुप्रीम कोर्ट ने शबनम और सलीम की हैवानियत के लिए सजा-ए-मौत को सही ठहराया। शबनम और सलीम ने राष्ट्रपति के पास भी माफी के लिए दया याचिका भेजी, लेकिन शबनम की याचिका को ठुकरा दिया गया।

13 साल का है शबनम का बेटा
शबनम उत्तरप्रदेश की रामपुर जेल में बंद है जबकि सलीम इलाहबाद की नैनी जेल में बंद है। हत्या के वक्त शबनम 2 महीने की प्रेगनेंट थी। बाद में जेल में ही उसने अपने बच्चे को जन्म दिया जो अब 13 साल का हो चुका है। बहुत जल्द अमरोहा की इस हैवान को फांसी पर लटका दिया जाएगा।