जिसे आप इस्तेमाल करके फेंक देते हैं, उसी कचरे से एक लड़की ने खड़ा कर दिया 1000 करोड़ का बिजनेस

इस खबर को शेयर करें

नई दिल्ली: रद्दी सुनते ही आपका मुंह बनाने लगता है। आप नाक-भौंहे सिकोड़ लेते हैं, जिसे आप बेकार, कबाड़ समझते हैं, उसी रद्दी से पूनम से 1000 करोड़ की कंपनी खड़ी कर दी। लोग सोच भी नहीं सकते कि रद्दी से भी कभी करोड़ों की कंपनी खड़ी हो सकती है, पूनम गुप्ता ने वो कर दिखाया। दिल्ली की रहने वाली पूनम गुप्ता के पास एमबीए की डिग्री थी। अच्छे कॉलेज से वो पढ़ी थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नौकरी नहीं मिल पाई। नौकरी में बार-बार रिजेक्ट होने के बाद पूनम ने अपना काम शुरू करने का फैसला किया। न त उनके पास अनुभव था, न कारोबार के लिए पैसा, पूनम ने बेकार पड़ी रद्दियों से करोड़ों की कंपनी खड़ी कर दी। आज कहानी पूनम के संघर्ष की…

​कौन हैं पेपर क्वीन पूनम गुप्ता​
दिल्ली में जन्मीx पूनम गुप्ता ने लेडी श्री राम कॉलेज से इकॉनामिक ऑनर्स किया। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने एमबीए की डिग्री हासिल की। नौकरी के लिए कई कोशिशें की, लेकिन जब सफलता नहीं मिली तो साल 2002 में घरवालों ने पूनम की शादी पुनीत गुप्ता के साथ कर दी। पुनीत स्‍कॉटलैंड में नौकरी करते थे, वो फार्मा सेक्टर से जुड़े थे।शादी के बाद पूनम भी पति के पास स्कॉटलैंड चली गई। पूनम में वहां भी नौकरी की काफी कोशिश की, लेकिन एमबीए की डिग्री होने के बाद भी उन्हें केवल इसलिए रिजेक्ट कर दिया जाता था, क्योंकि उनके पास एक्सपीरियंस नहीं था।

​इंटरव्यू में हुई रिजेक्ट, लेकिन मिला बिजनेस का आइडिया​
पूनम को अनुभव की कमी की वजह से नौकरी तो नहीं मिली, लेकिन स्‍कॉटलैंड में रहते हुए पूनम ने देखा कि बड़ी कंपनियों के लिए रद्दी कागज एक बड़ा सिरदर्द है। वो जहां भी इंटरव्यू के लिए जाती थी, उन्हें रद्दी का ढेर मिल जाता था। कंपनियां उन रद्दियों के निपटान पर काफी खर्च करती है। उन्हीं रद्दियों से पूनम को बिजनेस का आइडिया मिल गया। उन्‍होंने रद्दी कागज को रीसाइकिल कर प्रोडक्‍ट बनाने की सोची। 10 महीने तक रिसर्च करने के बाद उन्होंने रद्दी को रीसाइकिल करने का प्लान खोज निकाला। उन्होंने रद्दी पेपर से दोबारा कागज बनाने का पूरा प्लान तैयार कर लिया।

​1 लाख की पूंजी से शुरू किया काम​
साल 2003 में उन्होंने सिर्फ 1 लाख रुपये की पूंजी लगाकर रद्दी कागज को रीसाइकल करने का काम शुरू किया। उन्होंने बड़ी-बड़ी कंपनियों के साथ साझेदारी की, उसने रद्दी कागज मंगाया, उन्हें रिसाइकिल कर नया कागज तैयार कर दिा। पूनम गुप्ता दुनिया के कई देशों की कंपनियों से रद्दी कागज खरीदती हैं और उसकी रीसाइकलिंग कर अच्छी क्वालिटी का पेपर तैयार कर वापस उंसे बेच देतीं। उन्होंने अपरनी कंपनी का नाम अपने नाम पर PG Paper रखा। पीजी पेपर का बिजनेस आज 60 देशों में फैला हुआ है।

​1000 करोड़ की कंपनी​
पूनम ने एक लाख रुपये के लागत से पीजी पेपर की शुरुआत की। 20 साल में उन्होंने रद्दी से 1000 करोड़ की कंपनी खड़ी कर दी। जिस कंपनी की शुरुआत पूनम से अपने घर के एक कमरे से की, वो 60 देशों तक फैल गई। भारत, ब्रिटेन, अमेरिका और चीन समेत देशों में पीजी पेपर का कारोबार फैल गया है। पूनम ने अपने दिमाग से रद्दी कागज की रीसाइकलिंग कर अच्छी क्वालिटी का पेपर तैयार कर उसे बेचकर मुनाफा कमाया। उनकी कंपनी प्रिंटिंग पेपर, पैकेजिंग पेपर, स्‍पेशिएलिटी पेपर, पेपर ग्‍लोसरी, न्‍यूज प्रिंट और फोल्डिंग बॉक्‍स बोर्ड तैयार करती हैं।