छत्तीसगढ़ में सख्त नियमों के साथ आ रहा धर्मांतरण कानून, जानिए मसौदा और क्या हैं सजा के प्रावधान

Conversion law coming with strict rules in Chhattisgarh, know the draft and what are the provisions of punishment
Conversion law coming with strict rules in Chhattisgarh, know the draft and what are the provisions of punishment
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Chhattisgarh New Anti-Conversion Law: देश में धर्मांतरण की बढ़ती घटनाओं पर काबू पाने के लिए बीजेपी शासित राज्यों में सख्ती बढ़ती जा रही है. इस संबंध में पहले से ही यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और मध्य प्रदेश में कानून बने हुए थे. अब इस कड़ी में छत्तीसगढ़ भी शामिल हो गया है. राज्य के आदिवासी समाज को गुमराह कर उनके धर्मांतरण की लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार जल्द ही बड़ा कदम उठाने जा रही है. इसके लिए राज्य में जल्द ही धर्मांतरण रोधी कानून लाया जाएगा, जिसमें सामूहिक धर्मांतरण में लगे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी.

असेंबली के इसी सत्र में पेश होगा बिल
राज्य के धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने सोमवार को सदन में इसकी जानकारी भी दी. उन्होंने कहा कि धर्मांतरण रोकने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार नया कानून लाने जा रही है. विधानसभा के इसी सत्र में ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक’ लाया जाएगा. पिछली सरकार में धर्मांतरण के खिलाफ 34 मामले दर्ज किए गए, जिन पर कार्रवाई चल रही है. उन्होंने बताया कि गुपचुप तरीके से यह सिलसिला अब भी जारी है, जिस पर एक्शन लेने के लिए अब सख्त कानून लाए जाने की जरूरत है.

क्या है मसौदा?
सूत्रों के मुताबिक धर्मांतरण रोधी कानून का ड्राफ्ट लगभग बनकर तैयार हो गया है. इस बिल में धर्मांतरण करने वाले हर व्यक्ति का पंजीकरण कलेक्टर के पास कराना होगा. धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति को कम से कम 60 दिन पहले अपनी व्यक्तिगत जानकारी एक फॉर्म के जरिए कलेक्टर को देनी होगी. इसके साथ ही धर्मांतरण के वास्तविक इरादे, कारण और उद्देश्य का भी आकलन कर बताना होगा. साथ ही धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्ति को भी एक फॉर्म भरकर कलेक्टर के पास जमा करना होगा. मसौदे में यह भी बातें आ रही है कि प्रलोभन देकर, बलपूर्वक, कपटपूर्ण या शादी से एक धर्म से दूसरे धर्म मे परिवर्तन नहीं किया जा सकता. ऐसा हुआ तो कलेक्टर द्वारा धर्मांतरण को अवैध घोषित कर दिया जाएगा.

कठोर सजा के साथ जुर्माने का भी प्रावधान

धर्म परिवर्तन किए व्यक्ति के खून से जुड़ा या गोद लिया हुआ व्यक्ति यदि आपत्ति जताता है तो इसकी शिकायत थाने में दर्ज कराई जा सकती है. पुलिस को इस मामले में एफआईआर दर्ज करनी पड़ेगी. यह केस गैर-जमानती होगा. वहीं धर्म परिवर्तन के पीड़ित को 5 लाख रुपये तक के मुआवजे का भी प्रावधान है. साथ ही अवैध रूप से धर्मपरिवर्तन कराने वालों को कम-से-कम दो साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है. इस बिल में कम से कम 25 हजार और अधिकतम 50 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान हो सकता है.