दिल्ली में डील फाइनल, इन 4 सीटों पर लड़ेगी AAP, चांदनी चौक समेत ये 3 सीटें कांग्रेस के खाते में

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नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच डील फाइनल हो गई है. आज दिल्ली में दोनों दलों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीट शेयरिंग के बारे में जानकारी दी. AAP की ओर से आतिशी, संदीप पाठक और सौरभ भारद्वाज, वहीं कांग्रेस की ओर से ​​मुकुल वासनिक, दीपक बाबरिया और अरविंदर सिंह लवली प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए. कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक ने बताया कि इंडिया ब्लॉक में शामिल पार्टियों के बीच सीट बंटवारे पर चर्चा हो रही थी. दो दिन पहले लखनऊ में सपा-कांग्रेस गठबंधन का ऐलान हुआ था. उन्होंने कहा कि आप-कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे पर लंबी चर्चा हुई और सीट शेयरिंग समझौता फाइनल हुआ.

दिल्ली समेत पांच राज्यों में AAP-कांग्रेस का गठबंधन

मुकुल वासनिक ने बताया कि AAP और कांग्रेस गुजरात, दिल्ली, ​हरियाणा, गोवा और चंडीगढ़ में गठबंधन में चुनाव लड़ेंगी. दिल्ली में आम आदमी पार्टी 4 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. कांग्रेस के खाते में चांदनी चौक समेत 3 सीटें गई हैं. वहीं चंडीगढ़ लोकसभा सीट और गोवा की दोनों सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशी उतारेगी. हरियाणा में 9 सीटों पर कांग्रेस और 1 सीट पर आम आदमी पार्टी चुनाव लड़ेगी. गुजरात में आम आदमी पार्टी दो सीटों और कांग्रेस 24 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. बता दें कि गुजरात में लोकसभा की 26, हरियाणा में 10, दिल्ली में 7, गोवा में 2 और चंडीगढ़ में 1 सीटें हैं.

दिल्ली में AAP 4 और कांग्रेस 3 सीटों पर लड़ेगी चुनाव

आम आदमी पार्टी दिल्ली में नई दिल्ली, वेस्ट दिल्ली, साउथ दिल्ली और ईस्ट दिल्ली लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी. वहीं कांग्रेस नॉर्थ ईस्ट, नॉर्थ वेस्ट और चांदनी चौक सीटों पर चुनाव लड़ेगी. गुजरात में आम आदमी पार्टी भरूच और भावनगर लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी. वहीं हरियाणा में कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट पर अपना प्रत्याशी उतारेगी. मुकुल वासनिक ने कहा कि वर्तमान में भारतीय लोकतंत्र के सामने खड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए AAP-कांग्रेस ने एक साथ लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि हम अपने-अपने सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन एकजुट होकर लड़ेंगे और बीजेपी को हराएंगे.

भरूच जीतकर अहमद पटेल को श्रद्धांजलि देंगे: AAP

कांग्रेस के साथ गठबंधन फाइनल होने के बाद AAP ने गुजरात की भरूच लोकसभा सीट से चैत्रर भाई वसावा को अपना उम्मीदवार घोषित किया. अपनी उम्मीदवारी को लेकर वसावा ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल, पार्टी नेता संदीप पाठक और भगवंत मान का धन्यवाद किया. उन्होंने कांग्रेस का भी आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा, ‘भरूच लोकसभा सीट जीतकर, स्वर्गीय अहमद पटेल को श्रद्धांजलि देंगे. हमारा पूरा प्रयास है कि भरूच में भाजपा को परास्त किया जाए. जल्द ही हम कांग्रेस के सभी नेताओं के साथ मिलकर रणनीति बनाएंगे’.

पंजाब को लेकर AAP-कांग्रेस ने नहीं दी कोई जानकारी

दोनों दलों ने पंजाब को लेकर कोई जानकारी नहीं दी, जिसके बाद स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इस सीमावर्ती राज्य में ‘एकला चलो रे’ की रणनीति अपनाने का फैसला किया है. बता दें कि पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर कांग्रेस की राज्य ईकाई कई बार शीर्ष नेतृत्व के सामने विरोध जता चुकी है. पंजाब कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि मान सरकार ने उनके कई नेताओं के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई की है. कांग्रेस के कई नेता जेल में हैं. ऐसे में राज्य में AAP के साथ गठबंधन हुआ तो कांग्रेस को फायदे की जगह नुकसान ही होगा.

दिल्ली में 2014 और 2019 के चुनाव में क्या थे समीकरण?

अगर दिल्ली में 2014 के पैटर्न पर वोटिंग होती है तो AAP और कांग्रेस के साथ आने से बीजेपी की राह मुश्किल हो सकती है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सभी सात सीटें बीजेपी ने जीती थीं. लेकिन तब पार्टी का वोट शेयर 46.6 फीसदी रहा था. आम आदमी पार्टी 33.1 फीसदी वोट शेयर के साथ दूसरे नंबर पर थी. कांग्रेस पार्टी का वोट शेयर 15.2 फीसदी रहा था. इस तरह अगर 2014 के नतीजों को आधार मानें और AAP-कांग्रेस के वोटों को जोड़ दें तो यह 48.3फीसदी बैठता है. यानी बीजेपी से 2 फीसदी ज्यादा. इतने वोट शेयर के अंतर से नतीजे पलट सकते हैं और बीजेपी के लिए दिल्ली की सभी सीटें जीतनी मुश्किल हो सकती है.

लेकिन अगर 2019 के नतीजों को देखें तो यह आंकड़ा भाजपा के पक्ष में चला जाता है. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने दिल्ली में 56.9 फीसदी वोट हासिल किए थे और सभी 7 सीटें जीती थीं. कांग्रेस 22.6 फीसदी वोट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर रही थी. आम आदमी पार्टी को 18.2 फीसदी वोट मिले थे. दोनों दलों का वोट शेयर जोड़ लें तो भी यह 40.8 फीसदी तक ही पहुंचता है, जो बीजेपी के वोट शेयर के मुकाबले बहुत कम है. बीजेपी का वोट शेयर जिस चांदनी चौक लोकसभा सीट पर सबसे कम रहा, वहां भी उसे 52.94 फीसदी वोट मिले थे. अब 2024 के लोकसभा चुनाव में वोटिंग पैटर्न 2019 का ही रहा तो AAP और कांग्रेस के साथ आने से भी बीजेपी की सेहत पर कुछ खास असर नहीं पड़ेगा.