ED बन सकती है AAP की मुश्किल, दिल्ली शराब नीति मामले में केजरीवाल के साथ पार्टी को भी बताया आरोपी

ED may become a problem for AAP, party also accused along with Kejriwal in Delhi liquor policy case
ED may become a problem for AAP, party also accused along with Kejriwal in Delhi liquor policy case
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Enforcement Directorate : आबकारी नीति मामले में ईडी ने अरविंद केजरीवाल के साथ साथ आम आदमी पार्टी को आरोपी बताया है. ये पहली बार है जब किसी राजनीतिक पार्टी को मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी बनाया गया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि ED का यह कदम कानूनी तौर पर आम आदमी पार्टी के कितनी मुश्किले बढ़ा सकता है. क्या इससे पार्टी के राजनैतिक वजूद पर खतरा मंडरा सकता है. ऐसी सूरत में इलेक्शन कमीशन या ED के पास पार्टी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए क्या अधिकार होंगे.

आप के बैंक खाते, संपत्ति हो सकती है अटैच

ED ने प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के सेक्शन 70 के तहत आम आदमी पार्टी को आरोपी बनाया है. ED का आरोप है कि इस मामले में आम आदमी पार्टी को 100 करोड़ की रिश्वत रकम मिली. अपराध से अर्जित आय में से 45 करोड़ की रकम आप ने गोवा के चुनाव प्रचार में खर्च की. कानूनी जानकारों का कहना है कि ED प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के विभिन्न प्रावधानों में तहत आम आदमी पार्टी की संपत्तियों को अटैच कर सकती है. इन संपत्तियों में बैक खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी चल संपत्ति, जमीन जैसी अचल संपत्ति शामिल है.

चुनाव आयोग के अधिकार सीमित
जहाँ तक चुनाव आयोग की कार्रवाई का सवाल है, इसको लेकर पार्टी के लिए कोई मुश्किल नजर नही आती. इलेक्टरोल लॉ में कोई ऐसा प्रावधान नहीं है, जिसके तहत किसी पार्टी के आरोपी बनने की सूरत में आयोग उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता हो. वैसे भी किसी राजनीतिक दल के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई के लिए इलेक्शन कमीशन के अधिकार सीमित ही है. आयोग द इलेक्शन सिंबल (रिज़र्वेशन एंड अलॉटमेंट) आर्डर के तहत पार्टी की मान्यता निलंबित कर सकता है या फिर वापस ले सकता है. हालांकि सिम्बल्स ऑर्डर के पैरा 16 A के तहत अगर पार्टी चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करती है या फिर आयोग के आदेश का उल्लंघन करती है तभी आयोग यह कार्रवाई कर सकता है.

पार्टी की मान्यता रद्द होने की सम्भावना नहीं

इसके अलावा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव आयोग पार्टी की मान्यता रद्द कर सकता है. हालांकि यहां भी आयोग के अधिकार बहुत सीमित है. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम1951 के सेक्शन 29 A के तहत चुनाव आयोग पार्टी को मान्यता देता है, वही इसी में तहत आयोग पार्टी की मान्यता को सिर्फ तीन ही सूरत में चुनाव आयोग वापस ले सकता है. आयोग ऐसा तब कर सकता है, जब पार्टी ने धोखाधड़ी से रजिस्ट्रेशन हासिल लिया हो, दूसरी शर्त ये है कि पार्टी चुनाव आयोग को लिखित में जानकारी दे कि वो संविधान-सवैंधानिक मुल्यों के प्रति निष्ठा नहीं रखती है. तीसरी शर्त ये है कि पार्टी को यूएपीए या उसके जैसे क़ानून के तहत सरकार गैरकानूनी ही करार दे दे. साफ है कि इनमे से कोई ऐसी शर्त नहीं नहीं है, जो आम आदमी पार्टी पर लागू होता है. ऐसे में सिर्फ मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी बनने के चलते पार्टी पर आयोग कोई कार्रवाई करेगा, इसकी सम्भावना नहीं है.