उत्तराखंड में टला मंत्रियों का विस्तार, वजह जानने लायक

देहरादून। उत्तराखंड भाजपा के नए अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के इस बयान के बाद कि केंद्रीय नेताओं से धामी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई के बाद मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पार्टी में अभी विधायकों को इंतजार और बढ़ गया है।

इस खबर को शेयर करें

देहरादून। उत्तराखंड भाजपा के नए अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के इस बयान के बाद कि केंद्रीय नेताओं से धामी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई के बाद मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पार्टी में अभी विधायकों को इंतजार और बढ़ गया है।

हल्द्वानी से चंपावत रवाना होने से पूर्व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और भाजपा के प्रदेश संगठन मंत्री अजय कुमार अजयेंद्र को अल्मोड़ा जिले में जागेश्वर दर्शन के बीच ही दिल्ली से बुलावा आने को लेकर कुछ नए मंत्रियों की ताजपोशी की राजनीतिक चर्चा जोरों पर थी। तब यह माना गया था कि मंत्रिमंडल विस्तार स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर किया जा सकता है।

इन चर्चाओं के जोरों में आने के बाद अब सभी नेताओं के उत्तराखंड लौटने पर नई तस्वीर उभर रही है। ये दोनों नेता ही नहीं, बल्कि राज्य के मुख्यमंत्री भी तब अचानक दिल्ली तलब हुए थे। अचानक नेताओं की दिल्ली दौड़ से नए मंत्रियों को मंत्रीमंडल में शामिल करने के चर्चे तेज थे।
अब ये तर्क दिया जा रहा है कि मुख्यमंत्री तो उपराष्ट्रपति की जीत पर बधाई देने दिल्ली गए थे कुछ केंद्रीय मंत्रियों से भी उनकी मुलाकात तय थी। लेकिन सूत्रों का कहना है कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के मंत्री पद मांगने के लिए लगाए गए जोर समेत कुछ नए समीकरणों को साधने के मामले सामने आने से उपजी परिस्थितियों ने इस विस्तार पर ब्रेक लगा दिया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पूर्व अध्यक्ष मदन कौशिक के बीच छत्तीस का आंकड़ा ऐन वक्त पर मंत्रियों के नाम फाइनल करने के आड़े आ गया। अब नए प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और मुख्यमंत्री दिल्ली से लौट आए हैं फिलहाल अब हाईकमान ने इस विस्तार पर अब कुछ नए समीकरणों पर मंथन भी शुरू कर दिया है। ऐसी चर्चाएं सत्ता के गलियारों से छन छन कर आ रही हैं।
अब फिर से दिल्ली में नए मंत्रियों और डिप्टी स्पीकर के नाम पर एक बार फिर मंथन नये समीकरण साधने के लिए हो सकता है।

राज्य मंत्रिमंडल में तीन सीटें और विधानसभा उप-सभापति की सीट को लेकर मंथन के लिए यह पूरी कवायद होनी है। इसकी भनक लगते ही विधायकों की भी दिल्ली परिक्रमा एकाएक तेज हो गई।

बताया जा रहा है की नये मंत्रियों के नाम पर हाईकमान मंथन करने के लिए इन पदाधिकारियों को दिल्ली तलब कर भी चुका था। ऐसे में किस विधायक की दावेदारी मंत्रीमंडल में मजबूत है इसे लेकर कयास शुरू हो गए हैं।
अल्मोड़ा जिले की रानीखेत विधानसभा सीट से कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष और पूर्व उपनेता प्रतिपक्ष करण महरा को हराने वाले भाजपा से जीते प्रमोद नैनवाल का नाम मंत्रि पद की रेस में शामिल बताया जा रहा है। जबकि करन महरा ने भाजपा के कद्दावर नेता माने जाने वाले और वर्तमान में केन्द्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट को दो बार रानीखेत से हराया था।

कुमाऊं मंडल से आने वाले चार मंत्रियों में मुख्यमंत्री ठाकुर बिरादरी के हैं जबकि दो मंत्री रेखा आर्य और चंदन राम दास दलित बिरादरी से आते हैं। प्रमोद नैनवाल जाति से ब्राह्मण हैं। उन्होंने लॉ से पीएचडी भी की है। प्रमोद नैनवाल का संघ से जुडाव बचपन से रहा है।
कुमाऊं के किसी भी ब्राह्मण विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया है। वे उच्च शिक्षित अधिवक्ता है और उन्होंने LLM पीएचडी (लॉ) की डिग्री भी हासिल की है। कुमाऊं के बंगाली बहुल सितारगंज सीट से जीतने वाले सौरभ बहुगुणा जो सरकार में मंत्री बने हैं। वे
आते तो ब्राह्मण बिरादरी से ही हैं लेकिन वे मूलतः गढ़वाल मंडल के ब्राह्मण हैं। उनके दादा स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा और पिता विजय बहुगुणा क्रमशः यूपी और उत्तराखंड में मुख्यमंत्री रहे थे। उनके इसी राजनीतिक बैकग्राउंड और रसूख ने उन्हें मंत्री पद दिला, न कि सामाजिक समीकरण साधने के चलते ऐसा करना जरूरी था।
ऐसे में कुमाऊं मंडल से प्रमोद नैनवाल का नाम मंत्री पद को लेकर चर्चा में है।

प्रमोद नैनवाल के बारे में इससे ज्यादा यह बात भाजपा के अनुकूल है वह ये कि वे हरीश रावत जो प्रदेश में कांग्रेस के सबसे बड़े नेता हैं के गृह क्षेत्र से आते हैं और उनको चुनौती देते हुए उनके साले को हराकर विधानसभा पहुंचे हैं। इसी उपलब्धि से भाजपा प्रमोद नैनवाल को मंत्री पद देकर उनको घेरने की रणनीति पर काम करना चाहती है। इससे पार्टी हरीश रावत के खिलाफ ये नेरेटिव बनाने में कामयाब हो सकती है की जब कांग्रेस का सबसे कद्दावर नेता अपने गृह क्षेत्र को ही नहीं बचा पा रहा तो प्रदेश में वह क्या करिश्मा करेगा।
प्रमोद नैनवाल का पैतृक गाँव दन्पौं है जो हरीश रावत के पैतृक गाँव मोहनरी के ठीक बगल का है। प्रमोद के इस विधानसभा से सत्ता विरोधी रुझान के बावजूद भाजपा से जीतना उनकी एक कामयाबी के रूप में देखी जा रही है। इससे भाजपा को कांग्रेस के उसके सर्वोच्च नेता हरीश रावत और वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष कारन महरा के ही अपने गृह क्षेत्र से कमज़ोर करने में सफलता मिलती दिख रही है।

ऐसे में अगर भाजपा सरकार में प्रमोद को मंत्री बनाती है तो वह कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा झटका हो सकता है। राज्य में तीन मंत्री पद रिक्त हैं अब तक बने मंत्रियों के सामजिक समीकरणों के ताने-बाने के अलोक में देखा जाय तो प्रमोद नैनवाल कुमाऊं मंडल से मजबूत दावेदार दीखते हैं।
यह तय है कि मंत्रियों की तीन रिक्त सीटों में से एक ही सीट कुमाऊं मंडल को मिल सकती है। क्योंकि गढ़वाल से विधानसभा की कुमाऊं मंडल से विधानसभा की 29 सीटें आती हैं जबकि गढ़वाल मंडल से विधानसभा की 41 सीटें आती हैं। ऐसे में रिक्त सीटों में से एक सीट कुमाऊं और दो सीट गढ़वाल मंडल को जानी तय हैं।
लेकिन इससे इतर यह भी चर्चाएँ पार्टी के भीतर हैं की केंद्र मंत्रियों की परफार्मेंस की भी समीक्षा करने के हक़ में है। ऐसे में चार मंत्रियों को वर्तमान मंत्री पद से बाहर करने की बातें जोर शोर से उठ रही हैं। बताया जा रहा है कि स्वयं मुख्यमंत्री भी इनके कामकाज से खुश नहीं हैं।
ऐसे में लालकुआं विधानसभा सीट से कांग्रेस के कद्दावर नेता हरीश रावत को लम्बे अंतर से हरा कर मात देने वाले डॉ. मोहन