लोकसभा चुनाव में हर‍ियाणा के जाटों ने द‍िया बीजेपी को झटका, व‍िधानसभा में क्‍या करेगी BJP?

Haryana's Jats gave a jolt to BJP in Lok Sabha elections, what will BJP do for Vidhan Sabha?
Haryana's Jats gave a jolt to BJP in Lok Sabha elections, what will BJP do for Vidhan Sabha?
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नई दिल्ली : हरियाणा के लोकसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस की जोरदार टक्कर के बाद अब चुनावी लड़ाई 5 महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर शुरू हो गई है। हरियाणा में बीजेपी और कांग्रेस दोनों को ही 5-5 सीटों पर जीत मिली है। बीजेपी के लिए यह प्रदर्शन झटका देने वाला है क्योंकि पिछले चुनाव में उसने सभी 10 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी।

लोकसभा चुनाव में हर‍ियाणा में बीजेपी को जाट बहुल सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है। चुनाव से ऐन पहले बीजेपी ने दुष्‍यंत चौटाला की पार्टी से गठबंधन तोड़ ल‍िया था। चुनाव के बाद बनी एनडीए की सरकार में भी हर‍ियाणा से क‍िसी जाट को मंत्री नहीं बनाया गया। लोकसभा चुनाव के नतीजे से बीजेपी को स्पष्ट संदेश मिला है कि अगर उसे हरियाणा की सत्ता में बरकरार रहना है तो उसे नई रणनीति के साथ चुनाव में उतरना होगा, वरना यह राज्य उसके हाथ से निकल सकता है।

बीजेपी ने कैबिनेट विस्तार में हरियाणा से तीन नेताओं को जगह दी है और यह तीनों ही नेता गैर जाट समुदाय से आते हैं। जबक‍ि, बीजेपी के पास भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से जीते चौधरी धर्मबीर सिंह के रूप में मजबूत जाट नेता हैं। धर्मबीर सिंह लगातार तीसरी बार लोकसभा का चुनाव जीते हैं। मंत्री पद नहीं म‍िलने से चौधरी धर्मबीर सिंह के समर्थक खासे नाराज बताए जाते हैं। पार्टी ने गुड़गांव से चुनाव जीते राव इंद्रजीत सिंह, फरीदाबाद से चुनाव जीते कृष्ण पाल गुर्जर और करनाल से चुनाव जीते पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को केंद्रीय मंत्री बनाया है।

इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या बीजेपी ने विधानसभा चुनाव से पहले गैर जाट राजनीति के रास्ते पर आगे बढ़ने का फैसला कर लिया है? क्योंकि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। इस तरह राज्य के इन दोनों बड़े पदों पर गैर जाट नेता ही काबिज हैं।

10 सांसद जीते, तब भी नहीं बनाया किसी जाट नेता को मंत्री

हरियाणा में जब बीजेपी सभी 10 लोकसभा सीटें जीती थी तब भी उसने किसी जाट नेता को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी थी। 2014 में राज्य में सरकार बनाने के बाद से भी उसने किसी जाट नेता को मुख्यमंत्री नहीं बनाया।

हालांकि, नायब सिंह सैनी से पहले जाट समाज से आने वाले सुभाष बराला और ओमप्रकाश धनखड़ पार्टी के अध्यक्ष थे। लेकिन, अब बीजेपी को नए प्रदेश अध्यक्ष का चयन करना है। ऐसे में यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि लोकसभा चुनाव में मिले झटके के बाद क्या पार्टी रणनीति बदल सकती है और किसी जाट नेता को प्रदेश अध्यक्ष बना सकती है?