मध्यप्रदेश में क्या बीजेपी ने अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है? चुनाव से पहले हो रहा अजब खेल

Has BJP shot itself in the foot in Madhya Pradesh? Strange game happening before elections
Has BJP shot itself in the foot in Madhya Pradesh? Strange game happening before elections
इस खबर को शेयर करें

भोपाल। मध्य प्रदेश, विधानसभा चुनावों की दहलीज पर खड़ा है। अभी इसमें लगभग 2 महीने का समय बचा हुआ है। नवंबर में चुनाव प्रस्तावित हैं। हालांकि चुनाव आयोग ने तारीखों की घोषणा अभी तक नहीं की है। प्रदेश की दो प्रमुख विपक्षी पार्टी बीजेपी और कांग्रेस जोर-शोर से तैयारियों में लगी हैं। अब से लगभग एक महीने पहले ही प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने राज्य की 39 सीटों पर अपने प्रत्याशी तय कर दिए। पार्टी के इस कदम पर चुनावी जानकार बंटे हुए हैं। कुछ का कहना है कि ये बीजेपी की चुनावी रणनीति का हिस्सा है, जबकि कुछ मानते हैं कि बीजेपी ने अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है। बात तो दोनों ही सच हैं, लेकिन सवाल फिर भी वही है कि पार्टी ने आखिर 3 महीने पहले ही प्रत्याशियों की घोषणा क्यों की? इसे समझने के लिए थोड़ा फ्लैशबैक में चलते हैं…

बात दरअसल 2018 की है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस में कांटे की टक्कर थी। आखिरी समय तक हर किसी की सांसे फूली थीं। चाहे शिवराज हों या कमलनाथ…हर कोई संशय में था। आखिर में परिणाम आए। दोनों ही दलों का वोट शेयर लगभग बराबर का रहा। बीजेपी को 41.02 प्रतिशत वोट मिले, तो वहीं कांग्रेस को 40.89 प्रतिशत वोट मिले। होना तो ये चाहिए था कि शिवराज के चेहरे पर मुस्कान आती, लेकिन मामला उलट गया और संख्या बल के आधार पर मध्य प्रदेश में पीसीसी चीफ कमलनाथ की सरकार बनी। उन चुनावों में कांग्रेस ने 114 सीटें जीतीं और बीजेपी 109 पर रह गई।

अब वापस आते हैं बीजेपी के उस पैंतरे पर, जिसमें चुनावी जानकार कह रहे हैं कि पार्टी ने अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मार ली है। दरअसल, भारतीय जनता पार्टी ने जिन 39 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है। इनमें ज्यादातर तो वहीं सीटे हैं, जिनमें उसको 2018 में हार का मुंह देखना पड़ा था। ये वो सीटें हैं, जिन्हें एक तरह से कांग्रेस का गढ़ कहा जाता है। 39 में से 38 सीटों पर कांग्रेस के दिग्गज ही चुनाव जीतते रहे हैं। एक सीट बसपा के नाम पर है। ये सभी इलाके या तो आदिवासी बहुल हैं या पिछड़े वर्ग की बहुलता वाले हैं। कुछ सीटों पर अनुसूचित जाति चुनाव परिणाम तय करती है।

टिकट की घोषणा पर भाजपा का तर्क है कि प्रत्याशियों को तैयारी के लिए समय मिलेगा। माना भाजपा तैयारियों में कांग्रेस से आगे है, लेकिन इस घोषणा के बाद पार्टी के नए-पुराने कार्यकर्ताओं में मचे असंतोष के लिए पार्टी के पास कोई प्लान नजर नहीं आ रहा है। टिकट घोषणा के बाद नेताओं की नाराजगी भी सामने आने लगी है और ऐसा कोई एक-दो सीटों पर नहीं, अमूमन सभी सीटों पर यही हाल है।

टिकट घोषणा के बाद इंदौर से बीजेपी के वरिष्ठ नेता भंवर सिंह शेखावत ने बगावती तेवर अपनाए। उनके कांग्रेस में जाने को लेकर चर्चा तेजी से हो रही हैं। कांग्रेस ने उन्हें बदनावर से टिकट देने और मंत्री बनाने का आश्वासन भी दे दिया। इसके अलावा देवास की सोनकच्छ सीट पर पूर्व विधायक राजेंद्र वर्मा के समर्थक नाराज हो गए हैं। राजेंद्र वर्मा के पिता फूलचंद वर्मा पांच बार सांसद रहे हैं। यहां से पार्टी ने राजेश सोनकर को टिकट दिया है। नाराज पूर्व विधायक के समर्थकों ने भोपाल में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की गाड़ी का घेराव कर दिया था।

धार जिले की आदिवासी बहुल कुक्षी सीट पर कार्यकर्ता जयदीप पटेल की उम्मीदवारी का विरोध कर रहे हैं। यहां बाहरी होने का आरोप लगाते हुए कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था। इसी तरह चाचौड़ा में पूर्व विधायक ममता मीणा ने मोर्चा खोल दिया है। यहां पार्टी ने प्रियंका मीणा को टिकट दिया है। ममता मीणा यहां खुलकर बगावती तेवर अपना रही हैं। यहां उन्होंने जल्दी कोई बड़ा फैसला लेने की बात कही थी।

बीजेपी की पहली लिस्ट जारी होने के बाद हर तरफ बगावती बिगुल फुंका हुआ है। छतरपुर विधानसभा सीट से पार्टी ने पूर्व मंत्री ललिता यादव को टिकट दिया, तो 2008 में बीजेपी से चुनाव लड़ चुकीं अर्चना गुड्डू सिंह विरोध में उतर आईं। इसी जिले की महाराजपुर विधानसभा सीट से पार्टी ने पूर्व विधायक मानवेंद्र सिंह के बेटे कामाख्या प्रताप सिंह को प्रत्याशी चुना। इसके बाद वहां कामाख्या प्रताप का पुतला दहन हुआ।

भिंड जिले से भी विरोध की खबरें सामने आईं। यहां भिंड विधानसभा सीट से पार्टी ने रणवीर जाटव की जगह पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य को प्रत्याशी बना दिया। इसके विरोध में आए रणवीर जाटव ने समर्थकों के साथ अपना विरोध दर्ज कराया। बालाघाट की लांजी विधानसभा सीट से प्रत्याशी राजकुमार कर्राए के विरोध में भी स्वर उठ रहे हैं। पार्टी के कार्यकर्ता की प्रत्याशी का विरोध कर रहे हैं।

सागर जिले की बंडा विधानसभा सीट से वीरेंद्र सिंह को टिकट दे दिया गया। वीरेंद्र पूर्व भाजपा सांसद शिवराज सिंह लोधी के बेटे हैं। उनके खिलाफ भाजपा नेता रंजोर सिंह मोर्चा खोले हुए हैं। इसी तरह अन्य सीटों को लेकर भी कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष है। पार्टी इसके लिए जो प्रयास कर रही है, फिलहाल तो वह नाकाफी दिख रहे हैं।

इन विधानसभा चुनावों में भाजपा के लिए मुश्किल तो है, क्योंकि पुराने कई नेता पार्टी छोड़ रहे हैं, जगह-जगह मनमुटाव की खबरें भी सामने आ ही रही हैं। राज्य में चल रही जन आशीर्वाद यात्रा में खेमेबाजी भी खुल कर सामने आ रही है। कार्यकर्ता अपने नेताओं के साथ भोपाल के चक्कर लगा रहे हैं। भाजपा की तरफ से अमित शाह एमपी के हालातों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। यही वजह कि वे यहां ताबड़तोड़ दौरे कर रहे हैं। अब भाजपा और अमित शाह इस स्थिति को कैसे नियंत्रित करेंगे, ये देखने वाली बात होगी।