हिमाचल प्रदेश का कर्ज बढ़कर 64 हजार करोड़ के पार! यह बोले सीएम जयराम ठाकुर

हिमाचल प्रदेश का कर्ज बढ़कर 64 हजार करोड़ रुपये के पार हो गया है। पिछले वर्ष लक्ष्य से अधिक ऋण लेने से राजस्व घाटा भी बढ़ा है। 2020-21 में राजकोषीय घाटा 103 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी के साथ 5700 करोड़ हो गया है। वित्तीय अनुशासन की सीमाएं टूटने पर कैग (नियंत्रक महालेखा परीक्षक) ने भी चिंता जाहिर की है।

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हिमाचल प्रदेश का कर्ज बढ़कर 64 हजार करोड़ रुपये के पार हो गया है। पिछले वर्ष लक्ष्य से अधिक ऋण लेने से राजस्व घाटा भी बढ़ा है। 2020-21 में राजकोषीय घाटा 103 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी के साथ 5700 करोड़ हो गया है। वित्तीय अनुशासन की सीमाएं टूटने पर कैग (नियंत्रक महालेखा परीक्षक) ने भी चिंता जाहिर की है।

वित्त वर्ष 2016 से 2021 तक राजस्व प्राप्तियों के मुकाबले हुए राजस्व खर्चों में बढ़ोतरी पर चिंता जाहिर की है। कैग ने कहा है कि वित्त वर्ष 2020-21 में राजकोषीय घाटा 15वें वित्तायोग की ओर से तय सीमा के भीतर रहा, लेकिन एफआरबीएम के तहत तय सीमा से अधिक था। 2020-21 में प्रदेश का कुल ऋण बकाया 42.91 प्रतिशत था। यह 15वें वित्तायोग की ओर से तय 36 प्रतिशत की सीमा से अधिक रहा। इसी तरह 2019-20 के 12 करोड़ के सरप्लस के मुकाबले 2020-21 में 97 करोड़ का राजस्व घाटा हुआ। 2019-20 के 5597 करोड़ के राजकोषीय घाटे के मुकाबले 2020-21 में यह 103 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी के साथ 5700 करोड़ हो गया।

सीएम जयराम ने खारिज किए विपक्ष के आरोप
विधानसभा के सत्र में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कांग्रेस नेताओं पर कर्ज को लेकर झूठे आरोप लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि एक कांग्रेस विधायक का कहना है कि राज्य पर 70,000 करोड़ रुपये का कर्ज है, दूसरे का कहना है कि यह 75,000 करोड़ रुपये और किसी तीसरे का कहना है कि यह 80,000 करोड़ रुपये है। लेकिन इनमें से कोई भी सही नहीं है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने कुल मिलाकर 19,200 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था, जबकि उनकी सरकार ने 16,998 करोड़ रुपये का ही कर्ज लिया है।