‘अगर मांगें पूरी नहीं की जाती हैं तो…’: हरियाणा में खाप पंचायतों और किसान संगठनों ने लिया कड़ा फैसला

'If demands are not met then...': Khap Panchayats and farmer organizations in Haryana took a tough decision
'If demands are not met then...': Khap Panchayats and farmer organizations in Haryana took a tough decision
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जींद: फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी समेत विभिन्न मांगों को लेकर किसानों के ‘दिल्ली चलो’ मार्च के बीच हरियाणा में खाप पंचायतों एवं किसान संगठनों ने रविवार को कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती हैं तो वे 20 फरवरी को जींद में महापंचायत के दौरान कड़े निर्णय लेंगे. खाप पंचायतों एवं किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने जिले के पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार के साथ गढ़ी थाने में बैठक की और उनके समक्ष अपनी मांगें रखीं.

किसान नेता आजाद पालवा ने बताया कि खाप और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने इंटरनेट सेवा बहाल किए जाने, “गिरफ्तार किए गए किसानों की रिहाई, अवरोधक हटाए जाने और आंदोलनरत किसानों की मदद करने वाले किसानों के घर दबिश बंद करने की मांगें रखीं.” उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो 20 फरवरी को महापंचायत में कड़े निर्णय लिए जाएंगे.

उधर, हरियाणा के कुरुक्षेत्र में भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी और कुछ खापों ने पंजाब के प्रदर्शनकारी किसानों के समर्थन में कार्रवाई की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक पंचायत में हिस्सा लिया. बैठक के बाद चढ़ूनी ने संवाददाताओं से कहा कि आंदोलन के समर्थन में विरोध प्रदर्शन करने के लिए सभी किसान संगठनों को एकजुट करने का निर्णय लिया गया है.

खाप नेता ओ.पी. धनखड़ ने कहा कि हरियाणा की खापें आंदोलन के समर्थन में हैं और केंद्र सरकार को एमएसपी की कानूनी गारंटी देने में देरी नहीं करनी चाहिए. केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर पटियाला, संगरूर और फतेहगढ़ साहिब समेत पंजाब के कुछ जिलों के चुनिंदा इलाकों में इंटरनेट सेवाओं पर लागू प्रतिबंध 24 फरवरी तक बढ़ा दिया गया है.

इससे पहले किसानों के ‘दिल्ली चलो’ मार्च के मद्देनजर 12 फरवरी से 16 फरवरी तक पंजाब के इन जिलों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई थीं. हजारों किसान अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पंजाब और हरियाणा की सीमा पर शंभू और खनौरी में डटे हुए हैं तथा उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने से रोकने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात हैं.