लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद वापस आई मोदी सरकार तो उठाएगी ये बड़ा कदम, बदल जाएगा पूरा सीन!

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नई दिल्ली: श्रम मंत्रालय लोकसभा चुनाव 2024 के बाद व्यापक बदलाव की तैयारी में है। ईटी नाउ ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि मंत्रालय नए लेबर कोडों को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। देश के श्रम कानूनों को आधुनिक बनाने की दिशा में यह एक अहम कदम है। यह कदम भारत के श्रम कानूनों को आधुनिक बनाने का प्रयास है। नए लेबर कोड 2020 में संसद से पारित हो गए थे। इसमें चार अलग-अलग कानूनों को समाहित किया गया है। सूत्रों के अनुसार, श्रम मंत्रालय ने राज्यों से इन नए कोडों के क्रियान्‍वयन को नियंत्रित करने वाले विनियमों को पूरा करने में तेजी लाने को कहा है। यह प्रगति मुद्दों से निपटने और एक समझौते पर पहुंचने के लिए उद्योग प्रतिनिधियों और श्रमिक संघों जैसे विभिन्न हितधारकों के साथ गहन चर्चा के बाद हुई है।

तेजी से बन रही है सहमति
उद्योग के हितधारकों को शुरू में कुछ खास प्रावधानों को लेकर चिंता थी। अब वेतन संहिताओं को लागू करने के लिए वे सहमत हो गए हैं। अलग-अलग उद्योगों में मुआवजा प्रथाओं को मानकीकृत करने के लक्ष्य के साथ भत्तों पर 50% की सीमा तय करने पर आम सहमति बनी है।

हालांकि, इकाइयों को बंद करने के लिए कर्मचारी सीमा से संबंधित प्रावधान में बदलाव को लेकर टेंशन है। लेबर यूनियनें इसमें बदलाव चाहती हैं। वर्तमान औद्योगिक संहिता के अनुसार, 300 कर्मचारियों तक वाले उद्योग सरकार की अनुमति के बिना बंद हो सकते हैं। यह 100 कर्मचारियों की पिछली सीमा से काफी ज्‍यादा है। लेबर यूनियनें श्रमिकों के हितों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए इस क्षेत्र में बदलाव की वकालत कर रही हैं।

नए लेबर कोडों को 2020 में संसद ने दी थी मंजूरी
नए लेबर कोडों में वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा पर विनियमन शामिल हैं। 2020 में संसद ने इन्‍हें मंजूरी दी थी। लेकिन, अभी तक इन्‍हें पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है। अभी 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए नियम बनाने बना लिए हैं। वहीं, 28 राज्यों ने औद्योगिक संहिता के लिए भी ऐसा कर लिया है। इसके अलावा, 30 राज्यों ने वेतन के संबंध में नियम स्थापित किए हैं। 28 राज्यों ने सामाजिक सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को निपटा लिया है।

सरकार का इरादा राज्यों की पूर्ण सहमति से नए श्रम कानूनों को लागू करना है। यह श्रम सुधारों के लिए एकीकृत रणनीति के महत्व पर जोर देता है। जैसे-जैसे चुनाव खत्‍म होने के करीब बढ़ रहे हैं, भारत के श्रम नियमों में संभावित रूप से क्रांतिकारी बदलाव के लिए परिदृश्य तैयार हो रहा है। इसका देशभर के नियोक्ताओं और कर्मचारियों पर व्यापक असर पड़ेगा।