Income Tax: सोना 94 रुपये से 56,000 रुपये पहुंच गया, जानिए 74 साल में इनकम टैक्स में छूट कितनी बढ़ी

बजट में अब कुछ ही दिन रह गए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को बजट पेश करेंगी। माना जा रहा है कि इस बार वह टैक्सपेयर्स को कुछ राहत दे सकती हैं। आजादी के बाद देश के पहले बजट में इनकम टैक्स स्लैब्स तय किए गए थे। तब 1500 रुपये तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगाया गया था।

Income Tax: Gold rose from Rs 94 to Rs 56,000, know how much the income tax exemption increased in 74 years
Income Tax: Gold rose from Rs 94 to Rs 56,000, know how much the income tax exemption increased in 74 years
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नई दिल्ली: बजट में अब एक महीने से भी कम समय रह गया है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) एक फरवरी को वित्त वर्ष 2023-24 का आम बजट पेश करेंगी। यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी फुल बजट है। इसलिए माना जा रहा है कि मिडिल क्लास को खुश करने के लिए सरकार इनकम टैक्स (income tax) में कुछ ढील दे सकती है। अगले साल देश में आम चुनावों के मद्देनजर इसे अहम बजट माना जा रहा है। पिछले नौ साल से इनकम टैक्स में कोई बदलाव नहीं हुआ था। अभी 2.5 लाख रुपये तक की सालाना इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगता है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस लिमिट को बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया जा सकता है। वैसे एक जमाने में देश में 1,500 रुपये तक की सालाना कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता था।

देश में इनकम टैक्स की शुरुआत पहली बार अंग्रेजों के जमाने में हुई थी। साल 1860 में इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act) आया था। 1857 के गदर से अंग्रेजी सरकार की हालत खस्ता हो गई थी और खजाना भरने के लिए लोगों पर इनकम टैक्स लगाया गया था। इसके जनक थे जेम्स विलसन (James Wilson)। उन्होंने ही साल 1860 में भारत का पहला बजट तैयार किया। इसमें वह इनकम टैक्स ऐक्ट लेकर आए थे। उससे पहले तक देश के लोगों को इनकम टैक्स नहीं देना होता था। इसलिए इसका विरोध हुआ था।

पहले बजट में कितना था इनकम टैक्स
वैसे देश में इनकम टैक्स स्लैब (income tax slabs) की शुरुआत आजादी के बाद पहले बजट से ही हो गई थी। स्वतंत्र भारत का पहला बजट देश के पहले वित्त मंत्री आरके षणमुखम चेट्टी (RK Shanmukham Chetty) ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया था। वित्त वर्ष 1949–50 के बजट में इनकम टैक्स रेट्स तय किए गए थे। तब 1,500 रुपये तक की सालाना इनकम टैक्स मुक्त रखी गई थी। लेकिन इससे ऊपर की इनकम पर टैक्स लगाने का प्रावधान किया गया था।

इसमें 1,501 रुपये से 5,000 रुपये तक इनकम टैक्स का रेट 4.69 फीसदी था। इसी तरह 5,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक टैक्स रेट 10.94 फीसदी किया गया था। अगर किसी व्यक्ति की इनकम 10,001 रुपये से 15,000 रुपये थी तो उसे 21.88 फीसदी इनकम टैक्स देना पड़ता था। 15,001 रुपये से अधिक की इनकम पर टैक्स 31.25 फीसदी था। इसके बाद कई बार इनकम टैक्स की दरों में बदलाव हुआ। साल 1949 में देश में सोने की कीमत 94 रुपये तोला था। आज इसकी कीमत 56,000 रुपये से अधिक पहुंच चुकी है। यानी इसमें करीब 600 गुना बढ़ोतरी हुई है जबकि इस दौरान इनकम टैक्स में छूट की लिमिट केवल 166 गुना बढ़ी है। 1949 के हिसाब से देखा जाए तो आज इनकम टैक्स में छूट की सीमा करीब 9 लाख रुपये होनी चाहिए थी।

अभी कितना लगता है टैक्स
इस समय पुराने टैक्स सिस्टम में पांच टैक्स स्लैब हैं। 2.5 लाख रुपये तक की सालाना इनकम टैक्स फ्री है। ढाई लाख से से पांच लाख रुपये तक की इनकम पर पांच फीसदी, पांच से 10 लाख तक की इनकम पर 20 फीसदी टैक्स, 10 से 20 लाख रुपये तक की इनकम पर 30 फीसदी और 20 लाख से ऊपर वाली इनकम पर 30 फीसदी टैक्स लगता है। नई टैक्स व्यवस्था में सात टैक्स स्लैब हैं। इसमें भी ढाई लाख रुपये तक की सालाना इनकम टैक्स फ्री है। 2.5 लाख से पांच लाख रुपये तक पांच फीसदी, पांच से 7.5 लाख रुपये तक 10 फीसदी, 7.5 लाख से 10 लाख रुपये तक 15 फीसदी, 10 से 12.5 लाख रुपये तक 20 फीसदी, 12.5 लाख से 15 लाख रुपये तक 25 फीसदी और 15 लाख रुपये से अधिक की सालाना इनकम पर 30 फीसदी टैक्स लगता है।

वैसे इनकम टैक्स की लिमिट में अंतिम बार बदलाव साल 2014 में हुआ था। यह मोदी सरकार का पहला बजट था। तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली (Finance Minister Arun Jaitley) ने 2.50 लाख रुपये तक की सालाना इनकम को टैक्स फ्री कर दिया था। उससे पहले यह लिमिट दो लाख रुपये थी। पिछले नौ साल में इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।