अभी अभीः भीषण हादसे से मची तबाही, एक साथ फटे 30 हजार गैस सिलेंडर, धमाकों से दहला इलाका

राजस्थान के जयपुर-अजमेर हाइवे नंबर-8 पर भीषणा हादसा हो गया। यहां 30 हजार किलो एलपीजी गैस सिलेंडर से भरे हुए टैंकर को एक ट्रेलर ने टक्कर मार दी और उसके बाद टैंकर और ट्रेलर दोनो में आग लग गई। इसके बाद एक-एक करके सभी सिलेंडर विस्फोट होने लगे

Just now: The devastation caused by a horrific accident, 30 thousand gas cylinders torn simultaneously, the area stunned by the blasts
Just now: The devastation caused by a horrific accident, 30 thousand gas cylinders torn simultaneously, the area stunned by the blasts
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जयपुर. राजस्थान की राजधानी जयपुर से बड़ी खबर सामने आई है। जयपुर के अजमेर रोड से होकर गुजरने वाले नेशनल हाइवे नंबर आठ पर आज सवेरे करीब साढ़े पांच बजे ऐसा बवाल मचा कि पुलिस की गाड़ियों और दमकलें सायरन बजाते हुए दौड़ती चली गई। हाइवे जाम कर दिया और आधा किलोमीटर से ज्यादा का एरिया तो खाली ही करा लिया गया। हाइवे पर आज सवेरे तीस हजार किलो एलपीजी गैस से भरे हुए टैंकर को एक ट्रेलर ने टक्कर मार दी और उसके बाद टैंकर और ट्रेलर दोनो में आग लग गई। दोनो के चालक अपनी गाड़ियों बीच सड़क छोड़कर भाग गए। पुलिस और दमकल कार्मिकों ने अपनी जान दांव पर लगाकार हालात काबू किए। पांच घंटे तक गैस का रिसाव होता रहा और उसके बाद तकनीकी टीमें मौके पर पहुंची और रिसाव को बंद किया।

2100 सलेंडर भर जाएं, इतनी गैस भरी थी…
दरअसल, अजमेर की ओर से एलपीजी गैस से भरा हुआ टैंकर आ रहा था जयपुर की ओर। उसके पीछे टाइल से भरा हुआ एक ट्रेलर चल रहा था। ट्रेलर ने टैंकर को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। ट्रेलर के केबिन में शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई और यह आग गैस से भरे टैंकर तक जा पहुची। उसके टायर लच गए। आग टैंकर तक भी पहुंच गई और उसका पिछला हिस्सा काला हो गया। इस दौरान दोनो वाहनों के चालक और खलासी वाहनों को छोड़कर भाग खड़े हुए। देखते ही देखते मौके पर भगदड़ मच गई।

हजारों लोगों की जान आफत में अटकी रही…लाखों लीटर पानी फेंका गया
पुलिस वाले पहुंचे, दस दमकलें आई। लाखों लीटर पानी सभी ओर से फेंका गया और आग काबू कर ली गई। लेकिन कुछ देर के बाद गैस रिसाव होने लगा। पुलिस ने हाइवे से ट्रैफिक डायवर्ड किया। आधा किलोमीटर के एरिया को खाली करा लिया। पांच घंटे तक हजारों लोगों की जान आफत में अटकी रही, उसके बाद जाकर गैस रिसाव काबू किया गया जा सका। जयपुर में अगर आज इस टैंकर में आग लगती तो नुकसान का अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल था।