छत्तीसगढ़ में तेजी से फैल रहा कुष्ठ रोग, अबतक मिले 54,275 नए केस

प्रदेश में प्रति 10 हजार की आबादी पर कुष्ठ रोग के 2.08 केस आज भी मिल रहे हैं। जबकि ओडिशा में 1.45 केस और चंडीगढ़ में 1.03 केस मिले हैं। छत्तीसगढ़ में अप्रैल-2022 से अगस्त तक 3038 नए केस सामने आए हैं।

Leprosy spreading rapidly in Chhattisgarh, 54,275 new cases found so far
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रायपुर। देश के अन्य राज्यों की अपेक्षा छत्तीसगढ़ में कुष्ठ रोग तेजी से फैल रहा है। स्थिति यह है कि छत्तीसगढ़ में कुष्ठ रोग के विस्तार की दर सबसे ज्यादा है। इसके बाद क्रमश्ा: ओडिश्ाा, झारंखड, बिहार और महाराष्ट्र का स्थान आता है। वर्ष 2005 में ही देश को कुष्ठ मुक्त घोषित किया जा चुका है, बावजूद इसके छत्तीसगढ़ में इस रोग की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। इतना ही नहीं, सभी रोगियों को पर्याप्त इलाज भी नहीं मिल पा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में पिछले सात वर्षों में कुल 54,275 हजार नए केस मिले। 14,727 मरीजों को इलाज ही नहीं मिला। प्रदेश में प्रति 10 हजार की आबादी पर कुष्ठ रोग के 2.08 केस आज भी मिल रहे हैं। जबकि ओडिशा में 1.45 केस और चंडीगढ़ में 1.03 केस मिले हैं। छत्तीसगढ़ में अप्रैल-2022 से अगस्त तक 3038 नए केस सामने आए हैं।

वर्षवार रोगियों व इलाज पर गौर करें तो वर्ष 2021-22 में 6,137 नए केस मिले थे। इनमें से 4,637 लोगों को ही इलाज मिला। वर्ष 2020-21 में 4,790 नए केस में 3,685 को इलाज मिला। गंभीर बात यह है कि हर साल मिलने वाले कुष्ठ रोगियों में 400 से अधिक बच्चे होते हैं। वहीं लगभग 500 मरीजों का अंग पूरी तरह से गल

राज्य की एएनसीडीआर दर भी सर्वाधिक
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रदेश में कुष्ठ रोगियों के एनुअल न्यू केस डिडक्शन रेट (एएनसीडीआर) प्रति एक लाख पर 29.65 केस हैं। जिलेवार स्थिति देखें तो वर्ष-2021-22 में रायगढ़ जिले में 50.81, महासमुंद में 39.37, बलौदाबाजार में 26.09, दुर्ग में 24.64 व जांजगीर चांपा में 23.89, रायपुर में एएनसीडीआर 23.38 रहा है।

लालपुर कुष्ठ अस्पताल में आइपीडी सेवाएं बंद
कुष्ठ रोगियों के इलाज के लिए राजधानी के लालपुर में 100 बिस्तरों का केंद्रीय कुष्ठ अस्पताल है। व्यवस्था के तौर पर केंद्र सरकार हर वर्ष करीब छह करोड़ रुपये बजट खर्च करती है। लेकिन यहां पिछले पांच वर्षों से कुष्ठ मरीजों की भर्ती ही बंद कर ओपीडी की औपचारिकता निभाई जा रही है। इसमें भी मरीज ना के बराबर ही पहुंच रहे हैं। गंभीर मरीज बिना इलाज ही लौट रहे।
रायपुर स्थानीय संपादकीय : साइकिल का पहिया जाम
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प्रदेश में इसलिए बढ़ रहे कुष्ठ रोगी
-कुष्ठ रोगियों के पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव
-समय पर कुष्ठ मरीजों की पहचान व इलाज ना मिलना।
– कुपोषण, लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना।
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-कुष्ठ उन्मूलन के लिए कोई लक्ष्य नहीं, विभाग उदासीता।
देश में सर्वाधिक एएनसीडीआर वाले राज्य
राज्य – एनसीडीआर
छत्तीसगढ़ – 29.65
ओडिशा – 21.35
झारखंड – 15.58
बिहार – 13.07
महाराष्ट्र – 12.21

वर्ष-2021-22 में जिलेवार कुष्ठ रोगियों पर एक नजर
जिला – नए केस – एएनसीडीआर दर
रायगढ़ – 908 – 50.81
महासमुंद – 505 – 39.37
बलौदाबाजार – 442 – 26.09
दुर्ग – 501 – 24.64
रायपुर -668 – 23.38

राज्य में वर्षवार कुष्ठ रोगी बच्चों के केस
वर्ष – केस
2018-19 – 488
2019-20 – 479
2020-21 – 231
2021-22 – 473
कुष्ठ के मामले में छत्तीसगढ़ की स्थिति बेहद खराब है। कुष्ठ फैलने के कारण रोग को लेकर छूआछूत व जागरूकता में कमी जैसे अन्य कारण है। कुष्ठ उन्मूलन के लिए बेहतर रणनीति की जरूरत है।

डा. सुभाष मिश्रा, संचालक, राज्य महामारी नियंत्रण
कुष्ठ अस्पताल में आइपीडी की सेवाएं बंद है। वर्तमान में ओपीडी की सेवाएं चल रही है। कुष्ठ रोग की स्थिति की जानकारी स्वास्थ्य सेवाएं विभाग को ही बेहतर पता होगा।
डा. केएम कांबले, निदेशक, केंद्रीय कुष्ठ अस्पताल लालपुर