यूपी में 20 सीटों का नुकसान! बीजेपी पर प्रशांत किशोर दावे से मची हलचल

Loss of 20 seats in UP! Prashant Kishore's claim creates stir on BJP
Loss of 20 seats in UP! Prashant Kishore's claim creates stir on BJP
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Lok Sabha Elections 2024: उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के पांच चरणों के लिए मतदान हो चुकी है, शनिवार 25 मई को छठवें चरण में 14 सीटों पर वोटिंग होनी हैं. ऐसे में सबकी नजरे 4 जून पर टिकी है जब चुनाव के नतीजों का एलान होगा. इस बार भारतीय जनता पार्टी के लिए यूपी बेहद अहम राज्य होने वाला है. बीजेपी ने यहां प्रदेश की सभी 80 सीटों को जीतने का लक्ष्य रखा है. इस बीच राजनीतिक विश्लेषक प्रशांत किशोर के दावे ने सनसनी मचा दी है.

प्रशांत किशोर ने यूपी तक को दिए खास इंटरव्यू में दावा किया है कि बीजेपी को यहां 80 सीटों को नुकसान हो सकता है. इस दावे के बाद बीजेपी के मिशन 80 को करारा झटका लग सकता है. अगर ये दावा सही होता है तो बीजेपी को इस बार 2019 के चुनाव से भी कम सीटें मिलेगी, जिसका सीधा फायदा सपा-कांग्रेस का गठबंधन को होगा.

प्रशांत किशोर का चौंकाने वाला दावा
प्रशांत किशोर का कहना है कि अगर ऐसा होता भी है तो इसे बीजेपी के लिए नुकसान नहीं कहा जाएगा. क्यों बीजेपी पहले ही 18 सीटों पर यूपी में हारी हुई है. 2019 में बीजेपी को 62 सीटें ही तो मिली थी. प्रशांत किशोर ने कहा, “लोग कह रहे हैं कि यूपी में नंबर घट रहा है. पिछली बार बिहार और यूपी मिलाकर बीजेपी को करीब 25 सीटों का नुकसान हुआ था. वो नुकसान इसलिए हुआ था क्योंकि यूपी में सपा-बसपा का गठबंधन था और 2014 में 73 सीटें जीने वाली बीजेपी घटकर 2019 में 62 पर आ गई थी.”

उन्होंने कहा, “अगर कोई कह रहा है कि यूपी में बीजेपी को 20 सीटों का नुकसान हो रहा है तो मैं कहूंगा कि फिर बीजेपी की सीट कम कहां हुई. नुकसान कहां हैं? अभी 62 तो हैं हीं यानी 18 सीटें तो पहले से हारे हुए हैं. नुकसान तो तब होगा अगर आप ये कहें कि यूपी में बीजेपी की 40-50 सीटें कम हो रही है और ये न पक्ष कह रहा है और ना ही विपक्ष.”

प्रशांत किशोर ने कहा कि पिछली बार यूपी-बिहार में बीजेपी को जो नुकसान हुआ था, उसकी भरपाई उन्होंने पश्चिमी बंगाल से कर ली थी. यही नहीं उन्होंने इस बार भी बीजेपी की सरकार बनने का दावा किया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी इस बार भी 300 के पार रहेगी. तीसरी बार भी नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री बनेंगे. इसकी वजह ये हैं कि लोगों में पीएम मोदी को लेकर खास गुस्सा नहीं है.