मुजफ्फरनगर : नगर पालिका में 5.50 करोड़ रुपये के काम की जांच

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मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् में आये दिन चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप की नाक के नीचे ही आपसी मिलीभगत के साथ अनेक धांधली के खेल खेले जा रहे हैं, लेकिन शिकायत होने पर ऐसे कई मामले सामने आये, जिनसे खुद चेयरपर्सन भी अंजान और भौचक्क रह गयी। ऐसा ही एक मामला शहर के विकास के लिए करीब 5.50 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले निर्माण कार्यों को लेकर सामने आ रही है। इन निर्माण कार्यों में ठेकेदारों से सेटिंग की गोटी फिट करते हुए नियम विरुद्ध टैण्डर कराये गये और फिर पालिका को करीब 70 लाख रुपये का राजस्व नुकसान देने की पूरी कहानी लिखी जाने लगी। शिकायत होने के बाद मामले में बात जांच की दहलीज तक पहंुची तो धांधली का खेल खेलने वालों ने विवादित टैण्डरों की प्रक्रिया को निरस्त कर दिया। इसके बावजूद भी जांच की तलवार अभी लटक रही है। हालांकि शिकायत वाले कार्यों के लिए दोबारा टैण्डर कराने की तैयारी में पालिका अफसर जुट गये हैं, वहीं इस प्रकरण को लेकर पूरी हलचल है।

नगरपालिका परिषद् में शहरी विकास को गति देने के लिए चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप लगातार जुटी हुई हैं। उनके द्वारा नाली और सड़क निर्माण कार्यों को शुरू कराया गया है तो वहीं 15वें वित्त आयोग के अन्तर्गत करीब 24 निर्माण कार्यों के टैण्डर आमंत्रित किये गये। इनमें से डैन्स निर्माण वाले करीब 16 कार्यों में टैण्डर स्वीकृति के लिए जो फार्मूला पालिका के अधिकारियों ने अपनाया, वो विवादों में फंस गया। सभासद और आरटीआई कार्यकर्ता मौ. खालिद ने इस मामले को उठाया और उन्होंने डीएम तथा मंडलायुक्त को शिकायत करते हुए आरोप लगाये कि डैन्स सड़क निर्माण कार्यों में पहली बार ही नियम विरुद्ध दो-दो निविदा आने पर ठेकेदारों में पूल कराकर उनको स्वीकार करने का कार्य किया गया है। इसी प्रकार सीसी सड़क निर्माण वाले कार्यों में भी अनुभव प्रमाण पत्र नहीं होने वाले ठेकेदारों को कार्य स्वीकृत किये जा रहे हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार की संभावना जताते हुए कहा कि पालिका अफसरों की आपसी मिलीभगत के कारण पालिकाध्यक्ष की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

खालिद का आरोप है कि नौ टैण्डरों में पालिका के एक इंजीनियर और एक बाबू ने मिलकर सारा खेल रचा तथा ठेकेदारों में पूल कराते हुए दो-दो निविदा को स्वीकार करते हुए 2 से 3 प्रतिशत बिलो पर ही कार्य दे दिया गया। पांच निविदा में तीन तीन ठेकेदार होने के कारण 5 से 10 प्रतिशत बिलो आया जबकि दो निविदा रिक्त रह गई हैं। खालिद का आरोप है कि पहले 18 से 20 प्रतिशत बिलो पर निविदा स्वीकार की जाती रही हैं। इस प्रकार आपसी मिलीभगत करते हुए इन कार्यों में पालिका को करीब 60-70 लाख रुपये के राजस्व नुकसान की साजिश रची गयी। इसी की जांच की मांग करते हुए उन्होंने शिकायत की थी। खालिद के अनुसार इस प्रकरण में जिलाधिकारी अरविन्द मल्लप्पा बंगारी ने जांच कराने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यह सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता में फंसाकर चेयरमैन को बदनाम करने की साजिश है। इसका पर्दाफाश होना जरूरी है।

सूत्रों के अनुसार डीएम ने एसडीएम खतौली अपूर्वा यादव और नगरपालिका परिषद् खतौली के जेई को जांच सौंपने का निर्णय लिया है। वहीं पालिका के एई अखंड प्रताप सिंह का कहना है कि अभी ऐसी कोई भी निविदा स्वीकार नहीं की गयी है, जिसमें दो ही ठेकेदार शामिल थे। उन्होंने बताया कि डैन्स और सीसी सड़क के साथ ही बंद कूड़ा डलाव घरों के 24 निर्माण कार्यों के लिए निविदा आमंत्रित की गयी थी, इसमें से करीब 10 निविदा में तीन तीन टैण्डर होने के कारण उनकी स्वीकृति के लिए पत्रावली ईओ को भेजी गयी है। जबकि शेष में दोबारा निविदा कराये जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। धांधली की शिकायत गलत है। वहीं प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि अभी जांच शुरू नहीं कराई गयी है। पालिका अफसरों से शिकायत पर जवाब मांगा गया था। इसमें बताया गया है कि शिकायत वाली निविदाओं को निरस्त करते हुए पुनः निविदिा आमंत्रित की जा रही हैं। जब निविदा ही निरस्त हो गयी हैं तो जांच कराये जाने का कोई औचित्य ही नहीं बैठता है। हालांकि जांच कमेटी गठित करने की संस्तुति करते हुए पत्रावली डीएम को भेजी गयी है। जांच कराने के लिए अंतिम निर्णय डीएम को करना है।