अभी-अभी: मुजफ्फरनगर के लिए बेहद बुरी खबर, 125 बच्चे…

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स्वास्थ विभाग के दिशा निर्देशों को दरकिनार कर असुरक्षित यौन संबंध बनाने का खामियाजा उनके बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। जिले में 15 वर्ष से कम के 70 बालक तथा 49 बालिकाएं एचआईवी पॉजिटिव पाए जा चुके हैं। जबकि कुल मरीजों की संख्या 2239 है। जिले में एचआईवी पॉजिटिव मरीजों के उपचार के लिए 2004 में जिला अस्पताल में एंटी रेट्रो वायरल की ट्रीटमेंट सेंटर की शुरुआत की गई थी। जिला एड्स परामर्शदाता समिति की निगरानी में संचालित एआरटी सेंटर पर आने वाले आशंकित मरीजों की जांच कर पॉजिटिव पाए जाने पर उपचार शुरू किया जाता है।

2059 पॉजिटिव का चल रहा उपचार

जिले में संचालित एआरटी सेंटर पर इस समय पंजीकृत 2359 एचआईवी पॉजिटिव मरीजों का उपचार चल रहा है जिनमें 1223 पुरुष, 692 महिलाएं, 29 ट्रांसजेंडर तथा 72 बालक व 45 बालिकाएं शामिल हैं। सभी पॉजिटिव मरीजों को प्रत्येक पखवाड़े दवा दी जाती है।

सो रुपए प्रति मरीज मिलता है यात्रा भत्ता

एचआईवी पॉजिटिव मरीजों में उपचार की निरंतरता बनाए रखने के लिए शासन स्तर से उन्हें 100 रुपये प्रतिमाह यात्रा भत्ता दिया जाता है। जो भी मरीज नियमित तौर से एआरटी सेंटर से दवा लेता है। उसके खाते में यात्रा भत्ता के रूप में ट्रांसफर किए जाते हैं।

उपचाराधीन 195 मरीजों की हो चुकी अब तक मौत

उपचार के बावजूद एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। एआरटी सेंटर से उपचार पाने वाले 195 मरीजों की अब तक मौत हो चुकी है। जिनमें 119 पुरुष 65 महिलाएं तथा दो ट्रांसजेंडर एवं नौ बच्चे शामिल है। क्या कहते हैं पीआरटी सेंटर के चिकित्सा अधिकारी ई आर टी सेंटर के चिकित्सा अधिकारी डॉ बीके जोड़ी का कहना है कि जिला अस्पताल की ओपीडी सहित टीवी वार्ड से भी आशंकित मरीजों को जांच के लिए आर्टी सेंटर भेजा जा रहा है।

जांच उपरांत लक्षण मिलने पर एचआईवी पॉजिटिव मरीजों का उपचार शुरू किया जाता है, उन्होंने बताया कि बहुत से मरीज बीच में ही उपचार छोड़कर दवा लेना बंद कर देते हैं जिससे उनकी सेहत में लगातार गिरावट आती चली जाती है।