‘मेरे बेटे का वक्त आ गया था, इसमें किसी का दोष नहीं’, बोले-सचिन के पिता

रोहतक में हॉस्टल में सचिन के साथ रहने वाले रूपेश ने बताया कि बुधवार रात को सचिन ने कहा था कि वह एक बर्थडे पार्टी में जा रहा है। आप दूसरे कमरों में सो जाना।

'My son's time has come, no one's fault in this', said Sachin's father
'My son's time has come, no one's fault in this', said Sachin's father
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जींद/रोहतक : रोहतक में जान गंवाने वाले सचिन ने बुधवार को अपने पिता सत्यपाल को फोन कर बताया था कि वह जल्द ही गांव आ रहा है। सचिन के पिता सेना से रिटायर हो चुके हैं। बड़ा भाई बेरोजगार है। परिवार का खर्च चलाने के लिए वह सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहता था। सचिन की बहन पूनम ने कहा कि उन्होंने कई बार भाई को समझाया, लेकिन उसके दिमाग पर तो केवल सेना में जाने का ही भूत सवार था। सचिन दो साल से सेना में भर्ती की तैयारी कर रहा था।

जिला जींद के लिजवाना के रहने वाले सचिन ने रोहतक के अपने पीजी होस्टल के रूम में फंदा लगा कर आत्‍महत्‍या कर ली। गुरुवार दोपहर बाद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार गांव लजवाना कलां में किया। रोहतक में हॉस्टल में सचिन के साथ रहने वाले रूपेश ने बताया कि बुधवार रात को सचिन ने कहा था कि वह एक बर्थडे पार्टी में जा रहा है। आप दूसरे कमरों में सो जाना। मेरे साथ कई साथी आएंगे। लेकिन गुरुवार सुबह तक जब कमरे का गेट नही खुला तो उन्होंने आवाज लगाई। जब सचिन ने दरवाजा नहीं खोला तो उन्होंने गेट को तोड़ दिया।

परिवार के सपनों को पूरा करने के लिए करता था मेहनत
पिता सत्यपाल ने बताया कि सचिन अविवाहित था। अपने परिवार के सपनों को पूरा करने के लिए सचिन लगातार मेहनत कर रहा था। सचिन की मौत से दुखी जींद के युवकों ने कहा कि शनिवार को जुलाना पहुंचकर जींद रोहतक मार्ग को जाम करेंगे। पीजी में रहने वाले एक छात्र गौरव ने मीडिया को बताया क‍ि वह नौकरी को लेकर परेशान था। आर्मी की दो भर्ती के लिए उसने क्‍वालीफाई भी किया था। लेकिन भर्ती हुई ही नहीं। इन सबको लेकर वह परेशान था।

‘धैर्य खोने वाले सेना में जाने के लायक नहीं’
पिता और पूर्व सैनिक सत्यपाल ने कहा कि किसी भी प्रकार के फैसले से अगर युवा घबरा जाते हैं तो वो सेना में जाने के काबिल नहीं हैं। युवाओं को धैर्य बनाए रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि युवाओं को चाहिए कि वो अपने परिवार के हितों को देखते हुए ऐसे कदम ना उठाएं जिससे उनके कदम परिजनों पर भारी पड़े। उन्होंने कहा कि उनके बेटे का वक्त आ गया था। इसमें किसी का कोई दोष नहीं है।