New Labour Codes: काम 20% कम, सैलरी फुल, हफ्ते में 3 दिन छुट्टी, पर कहां अटका मामला

New Labour Codes : दावा किया जा रहा है कि चार दिन काम करने से हम सभी खुश रहेंगे। हेडोनिक ट्रेडमिल के सिद्धांत की बात करें, तो उसमें तर्क दिया गया है कि स्थायी अतिरिक्त खुशी एक मृगतृष्णा है। भारत में नए लेबर कोड एक जुलाई से लागू होने थे, लेकिन ये अभी तक अटके हुए हैं।

New Labor Codes: Work 20% less, Salary full, 3 days off in a week, but where is the matter stuck
New Labor Codes: Work 20% less, Salary full, 3 days off in a week, but where is the matter stuck
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नई दिल्ली : यूके, आयरलैंड, यूएस, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में हफ्ते में 4 दिन काम (4 Day Week) करने का वर्क कल्चर बढ़ रहा है। 4-डे वीक का वर्क कल्चर उत्पादकता बढ़ाने, वर्क लाइफ बैलेंस, तनाव घटाने और बेरोजगारी को कम करने के उद्देश्य से तैयार किया गया हैं। कई 4-डे वीक को अपनाने वाले व्यवसायों के कर्मचारी केवल 80% काम कर रहे हैं, फिर भी 100% वेतन और लाभ प्राप्त कर रहे हैं। भारत में भी चार नए लेबर कोड (New Labour Codes) लागू होने हैं। इनमें भी हफ्ते में चार दिन काम करने का प्रावधान है। नए लेबर कोड एक जुलाई से लागू होने थे, लेकिन ये अभी तक अटके हुए हैं। कई कंपनियों को यह 5-डे वीक की तुलना में एक बेहतर व्यवस्था लग सकती है। फिर भी ऐसे कई कारण हैं, जिनकी वजह से 4-डे वीक को अमल में आने से पहले और अधिक शोध और बहस की आवश्यकता है।

क्या बढ़ेगी कर्मचारियों की उत्पादकता
हफ्ते में चार दिन काम के नियम से कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ने की संभावना नहीं है। उत्पादकता तब तक नहीं बढ़ेगी, जब तक कि प्रति घंटे उत्पादकता में इजाफा नहीं होगा। आयरलैंड और यूके जैसे देश पहले से ही बहुत अधिक श्रमिक उत्पादकता का दावा करते हैं, जिसे जीडीपी प्रति घंटे कार्य के रूप में मापा जाता है। वास्तव में, आयरलैंड की उत्पादकता दुनिया में सबसे अधिक में है। साल 2019 में यह 125 डॉलर प्रति घंटा थी। यूके की उत्पादकता कुल मिलाकर 54 डॉलर प्रति घंटे पर बहुत अधिक है। चीन और भारत के आंकड़े क्रमशः 11 डॉलर और आठ डॉलर हैं।

उत्पादकता घटने पर जीडीपी में आएगी कमी
सप्ताह में चार दिन काम करते हुए इन उत्पादकता स्तरों को बनाए रखने के लिए कर्मचारियों को प्रति घंटे उत्पादन में बड़ा इजाफा करना होगा। यह एक बड़ा मुद्दा है, क्योंकि अगर हर कोई 20% कम काम करता है तो कुल जीडीपी गिर जाएगी। साल 1988 में जापान ने हफ्ते में काम के घंटों को 46 से घटाकर 30 घंटे कर दिया था। इससे उसकी उत्पादकता में पर्याप्त वृद्धि नहीं हुई। साल 1988 और 1996 के बीच आर्थिक उत्पादन, जितना होना चाहिए था, उससे 20% कम रहा।

बढ़ सकता है तनाव
आयरलैंड या यूके जैसे देश में पर्याप्त उत्पादकता लाने के लिए कठोर उपायों की आवश्यकता हो सकती है। इसमें कर्मचारियों को पहले की तुलना में अधिक दैनिक घंटे काम करने की आवश्यकता शामिल है। इससे अत्यधिक तनाव, औद्योगिक दुर्घटनाएं आदि की संभावना बढ़ जाएगी।

क्या खुश रहेंगे कर्मचारी
दावा किया जा रहा है कि चार दिन काम करने से हम सभी खुश रहेंगे। हेडोनिक ट्रेडमिल के सिद्धांत की बात करें, तो उसमें तर्क दिया गया है कि स्थायी अतिरिक्त खुशी एक मृगतृष्णा है। साल 2000 में फ्रांस ने बड़ी फर्मों के बीच हफ्ते में काम के घंटों को 39 घंटे से घटाकर 35 घंटे कर दिया। एक आकलन ने बाद में निष्कर्ष निकाला कि यह श्रमिकों की खुशी में सुधार करने में विफल रहा है।

हेडोनिक ट्रेडमिल बताता है कि क्यों कई सेवानिवृत्त लोग काम पर वापस जाते हैं या लॉटरी विजेता अपनी नौकरी में क्यों बने रहते हैं। इसके अलावा, क्यों फ्रांस के मामले में कई श्रमिक दूसरी नौकरी में चले गए या छोटी फर्मों में चले गए। यही कारण है हमें 4-डे वीक का वर्क कल्चर लागू करने से पहले प्रयोग के तौर पर इसे छह महीने से अधिक लंबी अवधि के लिए चलाने की आवश्यकता है।

कुछ लोगों को होगा नुकसान
हफ्ते में चार दिन काम का नियम लागू होने पर कार्यालयों में असमानताएं और बढ़ सकती हैं। आयरलैंड और यूके पहले से ही “खोखले” और ध्रुवीकृत श्रम बाजारों से पीड़ित हैं। कम समय में अधिक काम करने की आवश्यकता से पुराने कर्मचारियों को संभावित रूप से नुकसान होगा। अमेरिका में ऐसा ही हुआ, जब पूर्ण लॉकडाउन के दौरान औसत कामकाजी सप्ताह को लगभग 48 घंटे से घटाकर 41 कर दिया गया।

बढ़ेंगी पार्ट टाइम जॉब्स
कम काम के घंटे और बढ़े हुए पार्ट टाइम जॉब्स के बीच एक मजबूत संबंध है। इसका कारण यह है कि जिन कंपनियों के पूर्णकालिक कर्मचारी अपने काम के घंटे कम करते हैं, तो उन्हें उत्पादन में गिरावट रोकने के लिए पार्ट टाइम कर्मचारी ढूंढ़ने पड़ते हैं, खासकर सेवा क्षेत्र में। हालांकि, पार्ट टाइम जॉब्स “कम वेतन और अस्थायी अनुबंध” से जुड़ी हैं। इसलिए पार्ट टाइम जॉब्स में इजाफे से कुल आय में कमी आएगी।

क्या बेरोजगारी होगी कम
काम का हफ्ता छोटा करने का एक अनुमानित लाभ बेरोजगारी को कम करना है। यही कारण है कि 1930 के दशक में अमेरिका में कामकाजी हफ्ते को छोटा कर दिया था। यह इस बात को देखते हुए सही फैसला था कि साल 1933 में बेरोजगारी 25% थी। आज ब्रिटेन में बेरोजगारी 3.7% है, जो 20 से अधिक वर्षों में सबसे कम है। आयरलैंड में यह 4.7% है। जबकि दीर्घकालिक बेरोजगारी नगण्य 1.2% पर है। आयरिश टाइम्स ने हाल ही में कहा था, “आयरलैंड में नौकरी की बहुत सारी रिक्तियां हैं, लेकिन श्रमिक कहां हैं?” इसलिए सभी के काम के घंटों में कटौती करके श्रम आपूर्ति को कम करना अजीब होगा।

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हफ्ते में 4 दिन काम से कई सेवाओं पर बढ़ेगा बोझ
हफ्ते में 4 दिन काम का नियम लागू होने से कई ऐसी सेवाओं पर बोझ पड़ेगा, जहां पहले ही वीकेंड्स पर काफी दबाव रहता है। जैसे- लॉन्ग वीकेंड में अधिक लोग ट्रैवल करना चाहेंगे। इसके कारण एयरपोर्ट्स पर लंबी कतारें देखने को मिल सकती हैं।

अपनाए जा सकते हैं कम जोखिम वाले उपाय
काम करने की परिस्थितियों में सुधार करने के लिए अन्य कम जोखिम वाले तरीके भी अपनाए जा सकते हैं। ये अधिक प्रभावी हो सकते हैं। इनमें लचीली सेवानिवृत्ति योजनाएं, अधिक आधिकारिक अवकाश दिवस और बैंक अवकाश शामिल हैं।

भारत में ये हैं चार नए लेबर कोड्स
सरकार द्वारा लागू की जा रही चार श्रम संहिताओं में वेतन/मजदूरी संहिता, औद्योगिक संबंधों पर संहिता, काम विशेष से जुड़ी सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यस्थल की दशाओं (OSH) पर संहिता और सामाजिक व व्यावसायिक सुरक्षा संहिता शामिल हैं। गौरतलब है कि श्रम मंत्रालय ने श्रम कानूनों (Labour Laws) में सुधार के लिए 44 तरह के पुराने श्रम कानूनों को चार वृहद संहिताओं में समाहित किया है। कई लोगों द्वारा माना जा रहा है कि इन लेबर कोड्स के लागू होने से कर्मचारियों को काफी फायदा होगा। नए लेबर कोड एक जुलाई से लागू होने थे, लेकिन ये अभी तक अटके हुए हैं।