अब बिहार में शामिल नहीं होंगे यूपी के 15 गांव

यूपी के 15 गांव अब बिहार में शामिल नहीं होंगे। यह निर्णय यहां की भौगोलिक स्थिति, ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों की राय के बाद लिया गया है। जिला प्रशासन ने दस अगस्त को इससे संबंधित रिपोर्ट शासन को भेजी थी, जिस पर सहमति मिल गई है।

Now 15 villages of UP will not be included in Bihar
Now 15 villages of UP will not be included in Bihar
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कुशीनगर : यूपी के 15 गांव अब बिहार में शामिल नहीं होंगे। यह निर्णय यहां की भौगोलिक स्थिति, ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों की राय के बाद लिया गया है। जिला प्रशासन ने दस अगस्त को इससे संबंधित रिपोर्ट शासन को भेजी थी, जिस पर सहमति मिल गई है।

महराजगंज के आठ गांवों को कुशीनगर में शामिल करने के प्रस्ताव संबंधित रिपोर्ट भी डीएम ने शासन को भेजी है। 17 अगस्त को गई इस रिपोर्ट में गांवों को समाहित करने को लेकर दोनों जिलों की सहमति के बारे में जानकारी दी गई है। 19 अप्रैल को बिहार के तिरहुत मंडलायुक्त ने यूपी-बिहार के 25 गांवों को सुविधानुसार एक दूसरे के राज्यों में मिलाने की अनुशंसा की थी। इसमें कुशीनगर के सात और महराजगंज के आठ गांवों को बिहार में जबकि बिहार के दस गांवों को प्रशासनिक दृष्टिकोण से यूपी में शामिल करने का प्रस्ताव था। इसमें पश्चिम चंपारण के बगहा अनुमंडल के बैरी स्थान, मंझरिया, मझरिया खास, श्रीपतनगर, नैनहा, भैसही और कतकी को कुशीनगर में और महाराजगंज के कपरधिक्का, नरसिंहपुर, सोहगीबरवा, भोथहा, खुटहवा, वनसप्ती, शिकारपुर व बकुलहिया एवं कुशीनगर के नारायणपुर, बकुलादह, हरिहरपुर, बसंतपुर, मरचहवा, शिवपुर व बालगोविंद छपरा गांव शामिल थे। बदलाव के इस प्रस्ताव के पीछे तर्क दिया गया था कि बिहार के बगहा के गंडक पार के यह सात गांव भौगोलिक रूप से यूपी से जुड़े हैं। यहां के ग्रामीणों को यूपी होकर बिहार आना-जाना पड़ता है। यही हाल उत्तर प्रदेश के कुशीनगर व महराजगंज जिले के गांवों का है। इन्हें भी अपने जिले में ही आने-जाने के लिए बिहार की सीमा में प्रवेश करना पड़ता है। ग्रामीणों को अपने खेत तक में जाने के लिए भी समस्या होती है। बिहार के तिरहुत मंडलायुक्त के प्रस्ताव पर आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद मनीषा त्रिघाटिया ने 22 अप्रैल को सर्वे करने को कहा था। इसके बाद प्रशासन ने खड्डा विकास खंड के सात गांवों और महाराजगंज के आठ गांवों की भौगोलिक स्थिति का आकलन किया, जिसमें इन गांवों को कुशीनगर में रहने देने को उचित बताया गया है। बिहार से ज्यादा मुफीद था यूपी गांवों की अदला-बदली जैसे महत्वपूर्ण निर्णय के लिए प्रशासन ने पूरा होमवर्क किया है।

तत्कालीन एसडीएम उपमा पांडेय की अगुवाई में टीम बनाई गई थी, जिसने सभी गांवों में जाकर वहां की शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन व्यवस्था की पड़ताल की। पता चला कि इन गांवों के लिए बिहार से ज्यादा मुफीद यूपी है। इसके अलावा गांवों में चौपाल भी लगाई गई, जिसमें विधायक रजनीकांत पांडेय, जिला पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, बीडीसी और गांव के लोग शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में यूपी में रहने की वकालत की, जिसके बाद शासन को रिपोर्ट भेजी गई। यूपी के सीमावर्ती गांव अब बिहार में शामिल नहीं होंगे। समग्र रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। महाराजगंज के आठ गांवों को भी कुशीनगर में शामिल करने को लेकर पत्र भेजा गया है।