अभी अभी: हरियाणा में कार मालिकों के लिए बुरी खबर, जान ले वरना पछताओगे

हरियाणा में जल्द ही व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी लागू हो जाएगी. इसे लेकर चंडीगढ़ में गुरुवार को व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी पर समीक्षा बैठक हुई. हरियाणा के मुख्य सचिव संजीव कौशल ने पॉलिसी को शुरू किए जाने को लेकर विभिन्न पक्षों पर बातचीत की.

Right now: Bad news for car owners in Haryana, take your life or you will regret it
Right now: Bad news for car owners in Haryana, take your life or you will regret it
इस खबर को शेयर करें

चंडीगढ़. हरियाणा में जल्द ही व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी लागू हो जाएगी. इसे लेकर चंडीगढ़ में गुरुवार को व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी पर समीक्षा बैठक हुई. हरियाणा के मुख्य सचिव संजीव कौशल ने पॉलिसी को शुरू किए जाने को लेकर विभिन्न पक्षों पर बातचीत की. हरियाणा में इस पॉलिसी को लेकर परिवहन विभाग की ओर से प्रारूप तैयार हो चुका है और आगामी दस दिनों में संबंधित विभाग अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे. ऐसे में जल्द ही यह पॉलिसी हरियाणा में लागू हो सकती है.

संजीव कौशल का कहना था कि व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी के आने से हरियाणा में व्यापार को बढ़ावा मिलेगा. ऐसे में इस पॉलिसी को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा और इसे लागू करने के लिए व्यवस्थाएं की जाएंगी. समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी गई कि इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण फैलाने और खराब गुणवत्ता वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इस्तेमाल से हटाने की व्यवस्था तैयार करना है. बता दें कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नूंह जिले के फतेहपुर गांव में नई पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा का उद्घाटन किया था.

इस समीक्षा बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि रजिस्ट्रेशन अवधि खत्म होने के बाद व्हीकल फिटनेस टेस्ट होगा. वाणिज्यिक वाहनों को 10 वर्षों के बाद अनिवार्य परीक्षण की आवश्यकता होती है, जबकि यात्री वाहनों के लिए इसे 15 वर्ष निर्धारित किया गया है. अगर फिटनेस टेस्ट में गाड़ी फेल होती है, तो समझिए अब आपकी गाड़ी कबाड़ हो चुकी है. फतेहपुर गांव में स्थित प्लांट देश का पहला ऐसा प्लांट है जो आधुनिक तकनीक का उपयोग कर वाहनों से अधिकतम संख्या में कम्पोनेंट्स को बनाने और नइ तकनीक के साथ रीयूज के लिए तैयार करता है.

गौरतलब है कि केंद्र सरकार की इस व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी से प्रदूषण में कमी आएगी. साथ ही ऑटोमोबाइल क्षेत्र में कम लागत के साथ उत्पादन की क्षमता बढ़ेगी. इसके अलावा इस नीति से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कॉपर, स्टील, एल्युमिनियम, रबर और प्लास्टिक आसानी से उपलब्ध हो सकेगा. वहीं, 2024 के अंत तक इस पॉलिसी से बड़ी संख्या में रोजगार पैदा होगा.