बिहार में ‘जंगलराज’ वाले दौर की कहानी, दिनदहाड़े छलनी कर दिये गए थे बीजेपी विधायक के पति, 21 साल बाद आया फैसला

Story of 'Jungle Raj' era in Bihar, BJP MLA's husband was murdered in broad daylight, verdict came after 21 years
Story of 'Jungle Raj' era in Bihar, BJP MLA's husband was murdered in broad daylight, verdict came after 21 years
इस खबर को शेयर करें

पटना: 30 अप्रैल 2003 को बिहार में ‘जंगलराज’ की जीती जागती तस्वीर सामने आई थी जिसके बारे में लोग आज भी चर्चा कर सिहर जाते हैं. इसी तारीख को लालू प्रसाद यादव की ‘तेल पिलावन लाठी घुमावन’ रैली थी और इसी दिन दानापुर थाने के जमालुउद्दीन चक के पास दानापुर की पूर्व विधायक आशा देवी के पति भाजपा नेता सत्यनारायण सिन्हा की सरेआम हत्या कर दी गई थी. मामले में लालू यादव के करीबी रीतलाल यादव आरोपी थे, लेकिन मंगलवार को पटना व्यवहार न्यायालय एमपी एमएलए कोर्ट की विशेष अदालत ने हत्याकांड के करीब 21 साल बाद रीतलाल यादव को आरोपों से बरी कर दिया है. क्या थी पूरी कहानी आइये जानते हैं.

बिहार ने वह दौर भी देखा है जब बिहार में ‘जंगलराज’ की बात कही जाती थी. खास बात यह कि यह किसी राजनीतिक दल ने नहीं, बल्कि आम जनमानस की आवाज बनते हुए पटना हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी. बता दें कि बिहार में 1990-2005 के दौरान लालू यादव-राबड़ी देवी का शासनकाल था और इस काल को ‘जंगलराज’ कहा गया. दरअसल, 5 अगस्त 1997 को एक याचिका पर सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट ने पहली बार बिहार में जंगलराज राज का जिक्र करते हुए कहा था, ”बिहार में सरकार नहीं है, ‘बिहार में जंगलराज’ कायम हो गया है’. ऐसा इसलिए कहा गया था कि उस दौर में अपराध का ग्राफ बढ़ गया था और पूरे बिहार में बाहुबलियों का दबदबा हो गया था.

बिहार में ‘जंगलराज’ कायम रहा
हाईकोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद भी जंगलराज कायम ही रहा. उस दौर में हाईकोर्ट की यह टिप्पणी किसी भी अपराध के होने के साथ ही याद आती है. खास तौर पर जब भी कोई भी चुनाव हो तो लालू-राबड़ी शासनकाल पर विरोधी पक्ष जंगलराज को लेकर हमला जरूर बोलते हैं. अभी लोकसभा चुनाव का दौर चल रहा है और इसी बीच बिहार एमपी एमएलए कोर्ट के एक निर्णय ने एक बार फिर उस पुराने वक्त की जंगलराज की एक कहानी की याद ताजा कर दी है. यह भाजपा नेता सत्यनारायण सिन्हा के मर्डर की है. तारीख 30 अप्रैल 2003 थी और पटना में ‘तेल पिलावन लाठी घुमावन’ रैली का आयोजन राजद की ओर से किया गया था. पटना की ओर पूरे बिहार से लोगों का हुजूम चला आ रहा था.

सरेआम छलनी किए गए विधायक पति
‘तेल पिलावन लाठी घुमावन’ रैली के लिए पटना पहुंच रहे राजद के समर्थक बेकाबू थे और राजधानी पटना की ओर भारी संख्या में आ रही भीड़ से आम लोग दहशत में थे. इसी बीच पटना के खगौल इलाके में सत्यनारायण सिन्हा के मर्डर की खबर ने सनसनी फैला दी. दरअसल, तत्कालीन भाजपा विधायक आशा देवी के पति सत्यनारायण सिन्हा अपनी निजी गाड़ी से कहीं जा रहे थे. इसी दौरान दिनदहाड़े कुछ लोगों ने उनपर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं. घटना राजधानी पटना में खगौल के जमालुद्दीन चौक के पास घटी थी. तब बीजेपी नेता सत्यनारायण सिन्हा की गाड़ी पर दिनदहाड़े हमला किया गया था. उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया गया था जिसके बाद उनकी मौत हो गई.

रीतलाल यादव समेत चार आरोपी
सत्यनारायण सिन्हा हत्याकांड मामले में उस दौर में चार लोग आरोपी बनाए गए थे जिनमें एक दानापुर के ताकतवर राजद विधायक रीतलाल यादव भी थे. लेकिन, इस मामले में रीतलाल यादव की गिरफ्तारी तो नहीं हुई परन्तु उनके खिलाफ मामला शुरू हो गया था. दरअसल, रीत लाल यादव की छवि एक दबंग नेता की है और इसी के कारण उन्होंने राजनीतिक रसूख भी हासिल किया था. लालू यादव ने उन्हें राष्ट्रीय जनता दल का महासचिव भी बनाया था. भाजपा विधायक आशा देवी की हत्याकांड में नाम आने के बाद भी रीतलाल और भी ताकतवर होते गए.

स्पीडी ट्रायल में हुई सुनवाई
लालू प्रसाद यादव का संरक्षण उन्हें मिलता रहा, लेकिन वर्ष 2005 के बाद जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार बनी तो इस मामले का स्पीडी ट्रायल हुआ. बढ़ते पुलिसिया दबाव के बीच वर्ष 2010 में रीत लाल यादव ने सरेंडर कर दिया था. हालांकि, कहा जाता है कि रीतलाल यादव ने सरेंडर चुनाव लड़ने के लिये किया था. 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में रीतलाल यादव जेल से दानापुर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े और हार गए थे. उनके खिलाफ सत्यनारायण सिंहा की पत्नी आशा देवी चुनाव लड़ रही थीं और वही जीती भी थी.

विधायक बोले-न्याय की जीत
लेकिन, इस मामले में सुनाई होती रही और इसके बाद अगस्त 2020 में रीतलाल यादव को जमानत मिल गई. इसी साल उन्होंने राजद के टिकट पर दानापुर से विधान सभा चुनाव जीता और बिहार विधानसभा पहुंच गए. अब पटना के व्यवहार न्यायालय स्थि एमपी-एलए कोर्ट ने मंगलवार (14 मई) को उन्हें सत्यनारायण सिन्हा मर्डर केस के आरोपों से बरी कर दिया है. कोर्ट से बरी होने के बाद विधायक ने कहा कि, ”ये न्याय की जीत है.”