द कश्मीर फाइल्स: इजरायल ने जिसके लिए मांगी माफी, समर्थन में क्यों कांग्रेस

द कश्मीर फाइल्स: इजरायल ने जिसके लिए मांगी माफी, अब उस बात के समर्थन में क्यों कांग्रेसज्यूरी सदस्य सुदीप्तो सेन ने लिखा, 'IFFI 2022 ज्यूरी चेयरमैन नादव लापिद की तरफ से 53वें IFFI समापन समारोह में कश्मीर फाइल्स को लेकर स्टेज से जो भी कहा गया है, वह उनके निजी विचार हैं।

The Kashmir Files: For which Israel apologized, why Congress is in support
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नई दिल्ली। 53वें भारत अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव यानी IFFI में ‘द कश्मीर फाइल्स’ की आलोचना को लेकर विवाद जारी है। एक ओर जहां इजरायली राजदूत ने फिल्मकार के बयान पर भारत से माफी मांगी है। वहीं, कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत बयान का समर्थन कर रही हैं। उनका कहना है कि अंत में नफरत की आलोचना होती ही है।

कांग्रेस की सोशल मीडिया चेयरपर्सन श्रीनेत ने ट्वीट किया, ‘पीएम मोदी, उनकी सरकार, भारतीय जनता पार्टी और पूरे दक्षिणपंथी इकोसिस्टम ने द कश्मीर फाइल्स का प्रचार किया।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘एक फिल्म, जिसे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया ने नकार दिया। ज्यूरी हेड नादव लापिद ने इसे प्रोपेगैंडा, अश्लील और फिल्म फेस्टिवल के लिए अनुचित बताया है।’

ज्यूरी बता रहे हैं निजी विचार
हालांकि, IFFI ज्यूरी के सदस्य सुदीप्तो सेन ने साफ कर दिया है कि फिल्म को लेकर लापिद के वह निजी विचार हैं। उन्होंने लिखा, ‘IFFI 2022 ज्यूरी चेयरमैन नादव लापिद की तरफ से 53वें IFFI समापन समारोह में कश्मीर फाइल्स को लेकर स्टेज से जो भी कहा गया है, वह उनके निजी विचार हैं। समारोह निदेशक के सामने ज्यूरी बोर्ड की आधिकारिक प्रजेंटेशन और आधिकारिक प्रेस वार्ता में हम चार ज्यूरी मौजूद थे (पांचवे ज्यूरी को निजी कारणों से जाना पड़ा) और प्रेस से बात की, हमने कभी भी हमारी पसंद और नापसंद का जिक्र नहीं किया।’

उन्होंने कहा, ‘ज्यूरर के तौर पर हमें फिल्म की टेक्निकल, एस्थैटिक क्वालिटी और सामाजिक-सांस्कृतिक प्रासंगिकता जांचने का काम सौंपा गया था। हम किसी भी तरह से किसी फिल्म को लेकर राजनीतिक टिप्पणी में शामिल नहीं हैं। अगर ऐसा है, तो यह पूरी तरह निजी है। इसका सम्मानित ज्यूरी बोर्ड से कोई लेना देना नहीं है।’

इजरायली राजदूत ने माफी मांगी
मामले पर राजदूत की तरफ से भी प्रतिक्रिया दी गई है। राजदूत नाओर जिलोन ने लिखा, ‘मैं कोई फिल्म का जानकार नहीं हूं, लेकिन मैं यह जानता हूं कि ऐसी ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में गहराई से पढ़ने से पहले बोलना असंवेदनशील है, जो भारत में खुले घाव की तरह है, जिसमें कई लोग शामिल हैं और आज भी कीमत चुका रहे हैं।’

उन्होंने सलाह दी, ‘मेरा सुझाव है कि जैसा कि आप पहले भी मुखर रहे हैं, आपको जो भी पसंद नहीं है उसके बारे में इजरायल में आजादी से बोलें, लेकिन अपनी भड़ास अन्य देशों पर निकालने की जरूरत नहीं है। मुझे नहीं पता कि ऐसी तुलना करने से पहले आपके पास तथ्यात्मक जानकारी है या नहीं। मुझे पता है कि मेरे पास नहीं है।’