बलात्कार का मजा लेने वाले बयान पर हंसता रहा पूरा सदन, कैसे लोग है ये जो…

इस खबर को शेयर करें

नई दिल्ली. संसद और विधानसभाओं को हम ‘लोकतंत्र का मंदिर’ कहते हैं। लेकिन गुरुवार को कर्नाटक विधानसभा के भीतर जो कुछ हुआ वह बहुत ही शर्मसार करने वाला था। रेप जैसा गुनाह जिससे आत्मा तक छलनी होती है, उसके पीड़ितों का मजाक उड़ाया गया। बेशर्म बयान पर ठहाके गूंजे। लोकतंत्र के मंदिर में इस तरह का दृश्य शर्मसार करने वाला है। समूचे भारतीयों को शर्मसार करने वाला है कि लोकतंत्र के मंदिर में आखिर ये किन्हें बिठा दिया।

कर्नाटक विधानसभा। गुरुवार का दिन। किसानों के मुद्दों पर सदन में चर्चा हो रही है। हर कोई अपनी बात रखना चाह रहा है। इस शोरगुल में यह समझ पाना मुश्किल है कि कौन क्या बोल रहा है। विधानसभा के स्पीकर विश्वेश्वर हेगड़े शांत रहने की अपील करते हैं। शिकायती लहजे में सदस्यों से कहते हैं- ऐसे कैसे सत्र चलाऊंगा। अगर हर विधायक को बोलने के लिए समय दिया जाएगा तो कैसे चलेगा। विधायकों के रवैये से थक-हार जाने वाले अंदाज में स्पीकर बोलते हैं- अब आप लोग जो फैसला करो, मेरी भी हां है। मैं सोच रहा हूं कि चलो हालात का लुत्फ उठाते हैं। मैं सिस्टम को कंट्रोल या रेग्युलेट नहीं कर सकता। मेरी चिंता बस सदन की कार्यवाही को लेकर है, वह भी चलनी चाहिए।

स्पीकर की इस स्थिति और पीड़ा को कांग्रेस विधायक के. आर. रमेश कुमार एक बेहद शर्मनाक अंदाज में बयां करने लगे। कांग्रेस विधायक बोल उठे, ‘देखिए, एक कहावत है- जब बलात्कार होना ही है, तो लेटो और मजे लो। आपकी हालत भी बिल्कुल उसी तरह की है।’

जिस बयान पर पूरे सदन का सिर लज्जा से गड़ जाना चाहिए था, हर सीना क्षोभ से भर जाना चाहिए था, उस बयान पर सदन में ठहाके गूंजते हैं। खुद स्पीकर विश्वेश्वर हेगड़े हंस रहे हैं। उनकी माइक से होकर ये हंसी अट्टहास की तरह गूंज रही है। रेप पीड़िताओं का मजाक उड़ाने वाले शर्मनाक बयान पर अट्टहास हो रहा है। कांग्रेसी हो, बीजेपी वाला हो या फिर जेडीएस वाला। सबके ठहाके गूंज रहे हैं।

कांग्रेस के जिस विधायक रमेश कुमार ने टिप्पणी की, वह विधानसभा के स्पीकर भी रह चुके हैं। उनके घटिया बयान पर ठहाका लगाने वाले स्पीकर विश्वेश्वर हेगड़े बीजेपी के नेता हैं। राज्य के शिक्षा मंत्री भी रह चुके हैं। ये कोई वैसे विधायक नहीं हैं जो पहली बार चुनकर सदन में आए हैं। ये तो वैसे नेता हैं जो वर्षों से सदन में हैं। बार-बार चुने गए हैं।

कर्नाटक विधानसभा में जो कुछ भी हुआ वह वैसा ही था जैसे फिर भरी सभा में किसी द्रौपदी का चीरहरण हो रहा हो, मानसिक चीरहरण। और सभा में ठहाके गूंज रहे हों। उस वक्त तो कम से कम कुछ ऐसे भी चेहरे थे जो चीरहरण से शर्म के मारे गड़ गए। लेकिन कर्नाटक विधानसभा में कोई भी सिर शर्म से नहीं गड़ा।

ठहाकों में सबकी हंसी शामिल थी। चाहे कांग्रेस वाला हो या बीजेपी वाला, जेडीएस वाला हो या किसी और पार्टी वाला। ये बेशर्मी पर ठहाके भले एक साथ लगाएं लेकिन राजनीति अपने-अपने हिसाब से करेंगे। सदन में घटिया बयान से जिस स्पीकर को शर्म से गड़ जाना था वो ठहाके लगा रहे थे। उधर बाहर, उनकी पार्टी बीजेपी प्रियंका गांधी वाड्रा से रमेश कुमार के खिलाफ ऐक्शन लेने की मांग कर रही है। लोकसभा में केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी इस मुद्दे को उठाते हुए ये मांग करती हैं कि शर्मनाक टिप्पणी करने वाले विधायक के खिलाफ संबंधित पार्टी के नेता कार्रवाई करें। निंदा करें।

भरे सदन में रेप पीड़िता का मजाक उड़ाने वाले विधायक का जितना कसूर है, वहां ठहाके लगाने वालों का जितना कसूर है, उतना ही कसूरवार जनता भी है। आप और हम भी हैं। आखिर कैसे-कैसे नमूनों को हमने लोकतंत्र के मंदिरों में बिठा रखे हैं। असोसिएशन ऑफ डेमेक्रैटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं से अपराध के तमाम आरोपी चुनाव जीतकर संसद और विधानसभाओं में भी पहुंचे हैं।

बीजेपी के 21 माननीय, कांग्रेस के 16, वाईएसआर कांग्रेस के 7…ये वे सांसद या विधायक हैं जिनके खिलाफ महिलाओं के खिलाफ अपराध के केस दर्ज हैं। एडीआर के मुताबिक, 2009 में लोकसभा में सिर्फ दो सांसद थे जिन पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज थे। 2019 में ऐसे लोकसभा सांसदों की संख्या बढ़कर 19 हो गई। राजनीतिक पार्टियां भी ऐसे लोगों को टिकट देने से नहीं कतराती। लोग भी ऐसे अपराधियों को चुनाव जिताकर माननीय बना देते हैं। एक बार नहीं। कई बार। बार-बार।