दुनिया का सबसे महंगा इंजेक्शन अमेरिका से पहुंचा जयपुर, 17 करोड़ की ये दवा ह्रदयांश को देगी नया जीवन

The world's most expensive injection reached Jaipur from America, this medicine worth Rs 17 crore will give new life to the heart.
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17 करोड़ रुपये की कीमत वाला दुनिया का सबसे महंगा इंजेक्शन ‘जोलगेनेस्मा’ जयपुर पहुंच गया है. यह इंजेक्शन नन्हे ह्रदयांश को जीवनदान देगा, जो एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी’ से पीड़ित है. अमेरिका से आया ये खास इंजेक्शन इतना ज्यादा मंहगा क्यों है और यह दुर्लभ बीमारी क्या, चलिए जानते हैं.

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) एक ऐसी ही दुर्लभ न्यूरोमस्कुलर डिसऑर्डर है, जो पैदा हुए बच्चों में कमजोर मसल्स का कारण बनती है, जिससे फिजिकल एक्टिविटी करना मुश्किल हो जाता है. आज के इस लेख में हम स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के बारे में विस्तार से जानेंगे. इसमें शामिल हैं इसके लक्षण, कारण, जांच और इलाज की संभावनाएं.

क्या है स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए)?

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) एक जेनेटिक न्यूरोमस्कुलर डिसऑर्डर है. इसमें एक जरूरी जीन में खराबी के कारण शरीर पर्याप्त मात्रा में SMN1 प्रोटीन नहीं बना पाता है. यह प्रोटीन नर्वस सेल को हेल्दी मसल्स को बनाए रखने और उनकी कार्यक्षमता के लिए आवश्यक है. SMN1 प्रोटीन की कमी के कारण मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं, जिससे शारीरिक एक्टिविटी करने में परेशानी होती है.

एसएमए के प्रकार
एसएमए के मुख्य रूप से चार प्रकार होते हैं, जो बीमारी की गंभीरता और लक्षणों की शुरुआत के समय के आधार पर बांटे जाते हैं.

एसएमए टाइप 1 (Werdnig-Hoffmann disease): यह सबसे गंभीर प्रकार है, जो आमतौर पर जन्म के कुछ महीनों के अंदर ही दिखाई देता है. इस स्थिति में शिशुओं को सांस लेने में तकलीफ होती है, वे अपना सिर भी नहीं उठा पाते और मसल्स का विकास रुक जाता है.
एसएमए टाइप 2 (Intermediate SMA): यह मीडियम गंभीर वाला प्रकार है, जिसके लक्षण आमतौर पर 6 महीने से 18 महीने की उम्र के बीच दिखाई देते हैं. इसमे बच्चे बैठ तो सकते हैं, लेकिन खड़े होने या चलने में कठिनाई होती है.
एसएमए टाइप 3 (Kugelberg-Welander disease): यह सबसे कम गंभीर प्रकार है, जो आमतौर पर बचपन या वयस्कता में शुरू होता है. इसमें मांसपेशियों की कमजोरी धीरे-धीरे बढ़ती है और चलने में परेशानी होती है.
एसएमए टाइप 4 (Adult-onset SMA): यह वयस्कों में होने वाला एसएमए का एक दुर्लभ बीमारी है. इसके लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं, जिसमें थकान, मांसपेशियों में कमजोरी और कंपन शामिल हैं.

एसएमए के लक्षण
एसएमए के लक्षण रोग के प्रकार और गंभीरता के आधार पर अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य लक्षणों में शामिल हैं-
– शिशुओं में दूध पीने में तकलीफ
– मसल्स का कमजोर होना
– शारीरिक एक्टिविटी में कठिनाई, जैसे कि बैठना, खड़ा होना या चलना
– सांस लेने में तकलीफ
– मसल्स में ऐंठन
– निगलने में कठिनाई

एसएमए होने के कारण
एसएमए एक जेनेटिक बीमारी है जो माता-पिता से विरासत में मिलती है. यह SMN1 जीन में दोष के कारण होता है, जो मोटर न्यूरॉन्स के विकास और जीवन बचाने के लिए आवश्यक एक प्रोटीन का उत्पादन करता है. खराब जीन के कारण, पर्याप्त प्रोटीन का उत्पादन नहीं होता है, जिसके परिणामस्वरूप मोटर न्यूरॉन्स डैमेज हो जाते हैं और मर जाते हैं.

एसएमए की जांच और इलाज
एसएमए का पता जेनेटिक टेस्ट, ब्लड टेस्ट और इलेक्ट्रोम्योग्राफी (EMG) सहित अलग-अलग तरीकों से किया जा सकता है. हालांकि, एसएमए के लिए कोई इलाज नहीं है, लेकिन कुछ उपचार लक्षणों को कम करने और जीवन की क्वालिटी में सुधार करने में मदद कर सकते हैं. जोलगेन्स्मा (Zolgensma) नामक दवा इस बीमारी के इलाज के लिए बनाई गई है.

क्या है जोलगेन्स्मा?
स्विट्जरलैंड की दवा कंपनी नोवार्टिस द्वारा विकसित जोलगेन्स्मा एसएमए के इलाज के लिए बनाई गई है. जोल्गेन्स्मा मोटर न्यूरॉन सेल्स में एसएमएन जीन की एक फंक्शनल कॉपी प्रदान करता है, जिससे एसएमए वाले बच्चों में मसल्स की गति और काम में सुधार होता है.

जोलगेन्स्मा की कीमत इतनी ज्यादा क्यों?
एक्सपर्ट के मुताबिक, भारत में Zolgensma की कीमत लगभग 17 करोड़ रुपये इसलिए है क्योंकि इसमें बहुत ज्यादा रिसर्च और विकास शामिल है. सीमित मार्केट साइज और जान बचाने की क्षमता भी इसकी ज्यादा कीमत का कारण है. हालांकि, शुरुआत में इसकी कीमत बहुत ज्यादा है, लेकिन विशेषज्ञों का तर्क है कि Zolgensma के लॉन्ग टर्म लाभ एसएमए के इलाज और देखभाल से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं की लागत की भरपाई कर सकते हैं.