‘ज्ञानवापी मस्जिद नहीं मंदिर है’ चीख-चीखकर कह रहीं ब्रिटेन फोटोग्राफर द्वारा खींची गई ये तस्वीरें

वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi mosque) को लेकर लगातार हो रहे विवाद के बीच कुछ तस्वीरें वायरल हो रहीं हैं। इन तस्वीरों को साल 1863-1870 के बीच का बताया जा रहा है।

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वाराणसी : वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi mosque) को लेकर लगातार हो रहे विवाद के बीच कुछ तस्वीरें वायरल हो रहीं हैं। इन तस्वीरों को साल 1863-1870 के बीच का बताया जा रहा है। दरअसल इन तस्वीरों के फोटोग्राफर का नाम ब्रिटेन के एक फोटोग्राफर सैमुअल बॉर्न बताया जा रहा है। उन्होंने यह सभी तस्वीरें साल 1863-1870 के बीच ली थीं और अब जब ज्ञानवापी मंदिर (मस्जिद) का मामला उठा है तो यह तस्वीरें बहुत तेजी से सोशल साइट्स पर वायरल हो रहीं हैं। तो आखिर क्या है इन तस्वीरों का सच? आइए जानते हैं।

क्या है तस्वीरों का सच- जी दरअसल यह तस्वीरें ज्ञानवापी मंदिर की है। साल 1863-1870 के बीच ज्ञानवापी मस्जिद नहीं बल्कि मंदिर हुआ करता था और उस बात की गवाही ये तस्वीरें चीख-चीखकर दे रहीं हैं। इन तस्वीरों के नीचे आप देख सकते हैं साफ़ और सुनहरे अक्षरों में लिखा हुआ है “ज्ञान वापी या ज्ञान का कुआं, बनारस”। इसी शब्द से जाहिर है कि यह ज्ञानवापी मस्जिद नहीं बल्कि मंदिर था, जिसे मस्जिद में बदल दिया गया। आप देख सकते हैं इस तस्वीर में हनुमान जी की मूर्ति, घंटी एवं खंभों की नक्काशी साफ़-साफ़ दिखाई दे रही है। जी दरअसल यह उस दौर की बात है हालाँकि अभी कुछ समय पहले हुए ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे में भी इस बात के प्रमाण मिले हैं और कहा जा रहा है कि तथाकथित मस्जिद के अंदर अन्य हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां मौजूद हैं। मंदिर को तोड़कर बनाई गई मस्जिद के बाहरी ढांचे को देखकर साफ रूप से यह कहा जा सकता है की इसे एक प्राचीन मंदिर की शिल्पकला को रूपांतरित करके मस्जिद का रूप दिया गया है। हालाँकि कई लोग इसे मानने को तैयार नहीं है।

क्या है मामला- आपको बता दें कि ज्ञानवापी मस्जिद का तीन दिन का सर्वे हुआ और इस मामले में हिंदू याचिकाकर्ताओं ने मस्जिद परिसर के अंदर मूर्तियां होने का दावा करते हुए इनकी पूजा की इजाजत देने का आग्रह किया था। जी दरअसल याचिकाकर्ताओं का कहना है मस्जिद में हिंदू मूर्तियों की मौजूदगी है और सामने आने वाली एक रिपोर्ट में यह कहा गया है कि मस्जिद के बेसमेंट के खंभों में फूल की नक्‍काशी और एक कलश है। इसी के साथ मस्जिद में शिवलिंग भी मिला है जिसे मुस्लिम पक्ष के द्वारा फव्वारा बताया जा रहा है। हालाँकि सोशल मीडिया पर फोटोग्राफर सैमुअल बॉर्न द्वारा ली गई तस्वीरें वायरल हो रहीं हैं और लोगों का कहना है इससे ज्यादा कोई प्रमाण जरुरी नहीं है!