उत्तराखंड: केदारनाथ-बद्रीनाथ में भीड़ को काबू करना हुआ चैलेंज, पुलिस ने ऐसे संभाली कमान

एक हफ्ते के भीतर 1 लाख 30 हज़ार से ज़्यादा श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं. बद्रीनाथ में करीब 65,000 यात्री पहुंचे हैं. इस भीड़ के कारण धामों और रूट पर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.

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देहरादून. चूंकि चार धाम यात्रा, खासकर केदारनाथ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है इसलिए इसे काबू करने, दर्शन के लिए लोगों को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने और सुरक्षा के लिहाज़ से आईटीबीपी यानी इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस को तैनात किया गया है. सिर्फ केदारनाथ धाम ही नहीं, बल्कि केदार घाटी में भी आईटीबीपी के जवान भारी भीड़ को मैनेज करने में जुटे हैं. इससे पहले यात्रियों की सुरक्षा और धाम में व्यवस्थाओं के लिए उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री धनसिंह रावत को ज़िम्मेदारी दी जा चुकी है.

केदारनाथ में दर्शन करने के लिए प्रतिदिन 20 हज़ार से ज़्यादा श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. यानी धाम की तरफ आने वाले और धाम से वापसी करने वाले लोगों की भारी भीड़ केदारघाटी के सोनप्रयाग, उखीमठ और केदारनगरी जैसे इलाकों में दिख रही है. इन क्षेत्रों में श्रद्धालुओं के आने जाने पर निगरानी रखने के लिए आईटीबीपी को यहां तैनात कर दिया गया है. यही नहीं, श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य एवं सुरक्षा संबंधी और भी सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए अन्य इंतज़ाम भी किए जा रहे हैं.

और ये हैं इंतज़ाम, बद्रीनाथ में भी ITBP
आईटीबीपी ने अपने आपदा प्रबंधन दलों को भी इन क्षेत्रों में अलर्ट कर दिया है. जगह-जगह ऑक्सीजन सिलेंडर और चिकित्सा उपकरणों के साथ मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं और राज्य प्रशासन की मदद से मेडिकल इमरजेंसी और ज़रूरत पड़ने पर बीमार लोगों को निकालने का अभ्यास किया जा रहा है.

उधर, बद्रीनाथ में भी मंदिर और प्रशासन की टीमों को दर्शन और तीर्थयात्रियों के मंदिर परिसर में आवागमन आदि के प्रबंधन में ITBP की टीमें मदद कर रही हैं. इस साल चार धाम यात्रा के शुरुआती दिनों में तीर्थयात्रियों की अभूतपूर्व संख्या देखी जा रही है क्योंकि कोरोना संक्रमण के चलते 2 साल तक बाधित रही यात्रा को इस बार बगैर प्रतिबंधों के खोला गया है.