बिहार में विधानसभा चुनाव की क्यों होने लगी चर्चा? मोदी से नीतीश की डील कितनी पक्की, जानें

Why is there a discussion about assembly elections in Bihar? Know how firm is Nitish's deal with Modi
Why is there a discussion about assembly elections in Bihar? Know how firm is Nitish's deal with Modi
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पटना: लोकसभा चुनाव के बाद अब सबकी नजरें तीन राज्यों झारखंड, हरियाणा और महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव पर लगी हैं। तीनों राज्यों में साल के आखिर नवंबर-दिसंबर में विधानसभा चुनाव होना है। इस बीच चर्चाएं हैं कि बिहार में अगले साल 2025 के अक्टूबर-नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव समय से पहले हो सकते हैं। अटकलें लगाई जा रही हैं कि लोकसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) समय से पहले बिहार विधानसभा को भंग करने पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि झारखंड के साथ ही बिहार का भी विधानसभा चुनाव हो सकता है।

बिहार में समय से पहले चुनाव की चर्चा कैसे शुरू हुई ?
दरअसल ये चर्चाएं तब होनी शुरू हुईं, जब नीतीश कुमार लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने से एक दिन पहले दिल्ली गए थे। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। साथ ही मोदी 3.0 में जेडीयू के केवल दो सांसदों को मंत्री बनने का मौका मिला। इन सारे घटनाक्रम ने राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया। चर्चाएं हैं कि क्या नीतीश कुमार ने पीएम मोदी और अमित शाह से कोई डील की है। तभी जेडीयू कोटे से केवल दो सांसद ही मंत्री बने।

बिहार में चर्चाएं है कि नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह से बिहार में विधानसभा चुनाव समय से पहले कराने का अनुरोध किया है। जेडीयू का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल, जैसा कि लोकसभा चुनाव के नतीजों से पता चलता है, जेडीयू और एनडीए के पक्ष में है। नीतीश कुमार विधानसभा चुनावों में इसका लाभ उठाने के लिए आशावादी है।

नीतीश की मंशा से वाकिफ ‘इंडिया’ गठबंंधन!
नीतीश कुमार के मंशा को ‘इंडिया’ गठबंधन के दल भी समझ रहे हैं। इसका इशारा हाल ही में ‘इंडिया’ गठबंधन में शामिल विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने किया था। मुकेश सहनी ने लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए एक फेसबुक लाइव किया था।

‘हमारी पार्टी कोई सीट नहीं जीती, लेकिन इससे निराश होने की जरूरत नहीं है। हमें तैयार रहना होगा। वैसे तो विधानसभा का चुनाव अगले साल होना है, लेकिन नीतीश कुमार इस साल ही चुनाव कराने की कोशिश करेंगे। इसलिए हमें पंचायत और बूथ तक पार्टी को मज़बूत करने की जरूरत है।’
मुकेश सहनी, वीआईपी चीफ

बिहार लोकसभा चुनाव में कैसा रहा एनडीए का प्रदर्शन?
लोकसभा चुनावों में बिहार की 40सीटों में से बीजेपी ने 17, जेडीयू ने 16, चिराग पासवान की पार्टी ने 5 और जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टियों ने एक-एक सीट पर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में भाजपा और जेडीयू ने 12-12 सीटें जीतीं, एलजेपी रामविलास ने 5 सीटें जीतीं और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) ने एक सीट हासिल की। इस तरह एनडीए ने बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से 30 पर कब्ज़ा कर लिया। बाकी सीटें आरजेडी 4 सीटें, कांग्रेस 3 सीटें, सीपीआई (एमएल/एल) 2 सीटें और एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार ने जीतीं।

साथियों को राजी करना नीतीश के लिए चुनौती
बिहार में विधानसभा चुनाव समय से पहले कराने के लिए सहयोगी दलों को राजी करना जेडीयू के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह अनिश्चित है कि चिराग पासवान, जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा और भाजपा इस पर सहमत होंगे या नहीं। बिहार में कुछ स्थानीय भाजपा नेता पहले ही समय से पहले चुनाव कराने के विचार का विरोध कर चुके हैं।

अगर नीतीश कुमार अपने सभी सहयोगियों को मनाने में सफल हो जाते हैं और विधानसभा भंग कर देते हैं तो बिहार में छह महीने के भीतर चुनाव हो सकते हैं। मौजूदा बिहार विधानसभा का कार्यकाल नवंबर 2025 में समाप्त हो रहा है, जिसका मतलब है कि चुनाव आमतौर पर अगले अक्टूबर-नवंबर में होंगे।

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में दलों की स्थिति
243 सीटों वाली बिहार विधानसभा 2020 के चुनाव में बीजेपी को 74 सीट, जेडीयू को 43, ‘हम’ को 4 सीटें और लोजपा को एक सीट मिली। दूसरी ओर, महागठबंधन में शामिल राजद को 75 सीट, कांग्रेस को 19 सीट, सीपीआई और सीपीआईएम को 2-2 सीट मिलीं। वहीं 23 सीटें अन्य के खाते में गईं थीं।

अभी तक बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों को लेकर किसी भी राजनीतिक नेता की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में बिहार के राजनीतिक परिदृश्य का भविष्य क्या होगा, यह तो समय ही बताएगा।