MP Police Training: मध्य प्रदेश पुलिस ने अपने ट्रेनिंग की पुरानी व्यवस्थाओं में बड़ा बदलाव किया है. मध्य प्रदेश में अब पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों (PTS) में ट्रेनिंग ले रहे पुलिस जवानों को आस-पास के गांवों को गोद लेकर सामुदायिक पुलिसिंग का अभ्यास करवाया जाएगा. एमपी पुलिस के इस पहल का मुख्य उद्देश्य पुलिस और आम जनता के बीच की दूरी को कम करना है. इससे पुलिस बल के नए रंगरूट अधिक मानवीय और संवेदनशील बनेंगे.
जानिए वजह
पुलिस प्रशिक्षण स्कूल के अधिकारी राजदा बाबू सिंह के मुताबिक, प्रत्येक पुलिस प्रशिक्षण केंद्र ने आस-पास के आठ-आठ गांवों को गोद लिया है. जहां जाकर प्रशिक्षण ले रहे पुलिस के जवान सामुदायिक पुलिसिंग का अभ्यास करेंगे. चुकि पुरानी व्यवस्थाओं में रंगरूट नौ महीने तक आम लोगों से दूर रहते थे. उन्हें एक कठोर जवान के रूप में ढाला जाता ता. लेकिन उससे वे जनता की समस्याओं के प्रति उदासीन हो जाते थे. वहीं, अब इस नई पहल से उन्हें ग्रामीण जीवन, उनकी समस्याओं और ज़रूरतों को ठीक से समझने का मौका मिलेगा.
8-8 समूहों में बांटे गए जवान
मध्य प्रदेश में पुलिस प्रशिक्षण की नई नीति के मुताबिक, रंगरूटों को 8-8 के समूहों में बांटा गया है. इन समूहों को गोद लिए गांवों में जाना होगा. जहां उन्हें एक निश्चित चेकलिस्ट के तहत काम करना होगा. चेकलिस्ट के मुताबिक, रंगरुटों को गांव के सरपंच और पंचायत सदस्यों से मिलना, प्रमुख समुदायों, खेती की मुख्य फ़सलों, पानी की व्यवस्था, धार्मिक स्थलों और पिछले पांच सालों के आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में पता लगाएंगे. पुलिस प्रशिक्षु गांवों में जाकर साइबर सुरक्षा, नए आपराधिक कानूनों और अन्य 12 विषयों पर भी ग्रामीणों से चर्चा करेंगे.
वर्दी देखकर डर जाते हैं लोग
गौरतलब है कि आज भी गांवों में बहुत से लोग पुलिस की वर्दी को देखकर डर जाते हैं. इसको लेकर एडीजी (प्रशिक्षण) राजा बाबू सिंह ने बताया, “जब अंग्रेज़ यहां आए, तो उनके गृह मंत्री रॉबर्ट पील ने पुलिस व्यवस्था के दो मॉडल बनाए- निहत्थे नागरिक शैली और कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए आयरिश कांस्टेबुलरी शैली. आज़ादी के बाद, हमने पुलिस का भारतीयकरण करने और उसे ज्यादा मानवीय बनाने की कोशिश की. लेकिन आज भी लोग वर्दी देखकर डर जाते हैं.” इसलिए पुलिस प्रशिक्षण में ऐसा बदलाव किया गया है, जो पुलिस को सिर्फ सैद्धांतिक नहीं बल्कि व्यवहारिक भी बनाएगी.
जानिए उद्देश्य
पुलिस प्रशिक्षण के दौरान ग्रामीणों को गांव में भेजने का मुख्य उद्देश्य- जनता से निपटना, प्रभावी ढंग से गश्त करना और लोगों से जुड़ना है. ताकि उन्हें यह पता चल सके कि उन्हें गांवों में कैसे जाना है, लोगों से कैसे बातचीत करना है.