बागपत शहर बुधवार दोपहर एक ऐसी वारदात का गवाह बना, जिसने रिश्तों, प्रेम और नफरत की सभी सीमाएं तोड़ दीं। चचेरे भाई की पत्नी से प्रेम करने वाले नफीस की कब्रिस्तान के बाहर ईंटों से कूंचकर हत्या कर दी गई।
यह हत्या अचानक नहीं, बल्कि एक एलानिया कत्ल थी, जिसे करने की योजना छह साल पहले ही बन चुकी थी। नफीस छह साल बाद पहली बार बागपत लौटा था, वो भी सिर्फ अपनी मां मकसूदी के अंतिम संस्कार में शामिल होने। उनकी कब्र पर मिट्टी डालने लेकिन वह खुद अपनी मौत के सफर पर निकल पड़ा।
नफीस पिछले छह वर्षों से सहारनपुर में रह रहा था। वहां वह एक नर्सरी में काम करता था और शांत जीवन बिता रहा था। उसके भाई यासीन के मुताबिक, जब उसे बुधवार को मां के इंतकाल की खबर मिली, तो उसने किसी भी कीमत पर बागपत आने की जिद की।
परिवार से बात की तो उसे साफ मना किया ‘मत आना, वे लोग तुझे मार देंगे।’ नफीस ने कहा, ‘अम्मी की कब्र पर मिट्टी नहीं डालूंगा तो जिंदगी भर चैन से नहीं सो पाऊंगा।’ और उसी जिद ने उसे मौत के दरवाजे तक पहुंचा दिया।
छह साल पहले नफीस को अपने चचेरे भाई शौकीन की पत्नी शब्बो से मोहब्बत हो गई थी। दोनों के घर आमने-सामने थे और यह रिश्ता धीरे-धीरे घरवालों की नजरों में आ गया। फिर एक दिन शब्बो अपने पति और चार बच्चों को छोड़ नफीस के साथ चली गई।
यह घटना परिवार के लिए शर्म और गुस्से का कारण बनी। पुलिस ने दोनों को बरामद कर कोर्ट में पेश किया, लेकिन शब्बो ने बयान दिया कि मैं नफीस के साथ रहना चाहती हूं। तभी से परिवार ने नफीस को दुश्मन मान लिया था। उसे जान से मारने की धमकी दी गई और उसने मजबूर होकर बागपत छोड़ दिया।
कब्रिस्तान के बाहर छिपा, मां का दीदार भी न कर सका
बुधवार दोपहर पांडव मार्ग स्थित कब्रिस्तान में जब मकसूदी का जनाजा पहुंचा, नफीस भी वहां पहुंच गया। मगर वह अंदर नहीं गया। बस 20 मीटर दूर एक गाड़ी के पीछे छिपकर मां के जनाजे को देखता रहा। उसकी आंखें नम थीं, लेकिन शायद उसे एहसास था कि वह शायद अपने परिवार को आखिरी बार देख रहा है।
उसी वक्त कब्रिस्तान के बाहर कुछ युवक उसे ढूंढ रहे थे। अचानक किसी ने गाड़ी के पीछे झांककर नफीस को देख लिया। फिर क्या था-शौकीन, उसका बेटा मोहसिन, भाई रहीसू, मुश्तकीम, पिता यामीन और रिश्तेदार शमीम वहां पहुंचे। उन्होंने बिना किसी बहस के नफीस पर ईंटों और धारदार हथियारों से हमला कर दिया।
20 मीटर की दूरी, जिसने मां-बेटे को अलग कर दिया
हमले के दौरान नफीस की चीखें कब्रिस्तान की दीवारों तक गूंज उठीं, लेकिन कोई कुछ समझ पाता उससे पहले सब खत्म हो गया। जिस मां के जनाजे पर आने की उसने कसम खाई थी। उसी मां की कब्र से 20 मीटर दूर उसकी सांसें थम गईं। परिजन उसे खून से लथपथ हालत में सीएचसी लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मां और बेटे की लाश एक साथ देखकर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
घटना के बाद हंगामा, पुलिस से झड़प
हत्या के बाद गुस्साए परिजन अस्पताल में हंगामा करने लगे। जब पुलिस ने शांत कराने की कोशिश की, तो झड़प हो गई। बाद में भीड़ को कोतवाली लाया गया, जहां महिलाओं ने आरोप लगाया कि हत्यारोपियों में कुछ महिलाएं भी शामिल थीं। हालांकि तहरीर में उनके नाम शामिल नहीं किए गए। पुलिस ने मुख्य आरोपी मोहसिन को गिरफ्तार कर लिया और उसकी निशानदेही पर खून से सनी ईंट व कपड़े बरामद किए।
छोटे बच्चों और पत्नी के सिर से उठा सहारा
नफीस के परिवार में उसकी पत्नी और तीन बच्चे हैं। दो बेटे और एक बेटी। पहली पत्नी और बच्चे अब अपने ताऊ के पास रह रहे हैं। नफीस तीन भाइयों में सबसे छोटा था और परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर बताई जा रही है। अब परिवार के पास न तो सहारा बचा है और न ही उम्मीद।
मोहब्बत की कीमत मौत से चुकाई
शहर में लोग अब भी इस घटना की चर्चा कर रहे हैं। कोई कहता है-नफीस ने गलत किया, पर इस तरह सजा नहीं मिलनी चाहिए थी।’ तो कोई कहता है-‘छह साल पुरानी आग आखिर बुझी ही नहीं।’ नफीस के लिए मौत बागपत तक आई और उसे उसकी मां की कब्र के पास ले जाकर गिरा दिया। एक मां की मिट्टी पर बेटे का खून बहा यह दृश्य जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं।