चाहिए संस्कारी और भाग्यशाली संतान? तो माता-पिता आज ही अपना लें ये गुप्त नियम

Garuda Purana: हिंदू धर्म में संतान की प्राप्ति को न सिर्फ एक शारीरिक प्रक्रिया, बल्कि एक पवित्र संस्कार माना गया है. हर माता-पिता की यह कामना होती है कि उनकी संतान स्वस्थ, बुद्धिमान और ऐसे गुणों वाली हो जो कुल का गौरव बढ़ाए. गरुड़ पुराण में श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति के लिए कुछ विशेष नियमों और उपायों का विस्तार से वर्णन किया गया है. मान्यता है कि गर्भधारण के समय माता-पिता की मानसिक स्थिति और समय का चुनाव ही आने वाली संतान के भाग्य और चरित्र का निर्धारण करता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति के लिए गरुड़ पुराण के किन नियमों को अपनाना चाहिए.

शुद्धता और पवित्रता
गरुड़ पुराण के अनुसार, संतान की शुद्धि माता-पिता की शुद्धि से शुरू होती है. शास्त्रों के अनुसार, पीरियड्स के दौरान पति-पत्नी को आपसी संबंध बनाने से बचना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय को अशुद्ध माना गया है और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह हानिकारक हो सकता है.

किस तिथि में करें गर्भधारण?
महिला को पीरियड्स के 5वें दिन स्नान के बाद पूर्ण रूप से शुद्ध होना चाहिए. गरुड़ पुराण के अनुसार, 7 दिनों के बाद ही महिला देवताओं और पितरों की पूजा के योग्य होती है. उत्तम चरित्र वाली संतान के लिए इस समय के बाद ही गर्भधारण का प्रयास करना श्रेष्ठ माना जाता है.

सम और विषम दिनों का गुप्त विधान
गरुड़ पुराण में तिथि और दिनों के चुनाव को लेकर बहुत ही सूक्ष्म गणना दी गई है. इसके अनुसार अगर कोई दंपति पुत्र की कामना रखता है, तो पीरियड्स समाप्त होने के बाद सम दिनों (8वें, 10वें, 12वें, 14वें या 16वें दिन) में गर्भधारण की कोशिश करनी चाहिए. अगर, दंपति कन्या रत्न की इच्छा रखते हैं, तो उन्हें मासिक धर्म के बाद विषम दिनों (9वें, 11वें, 13वें, 15वें या 17वें दिन) का चुनाव करना चाहिए.

माता-पिता की मानसिक स्थिति
सबसे महत्वपूर्ण नियम संतान के जन्म के समय माता-पिता के भाव से जुड़ा है. गरुड़ पुराण के मुताबिक गर्भधारण के समय महिला और पुरुष का मन जैसा होगा, आने वाली संतान का स्वभाव भी वैसा ही होगा. इस प्रक्रिया के दौरान दोनों का मन शांत, शुद्ध और ईश्वर के प्रति समर्पित होना चाहिए. अगर मन में क्रोध, ईर्ष्या या डर है, तो उसका प्रतिकूल प्रभाव होने वाले शिशु के मानसिक विकास पर पड़ता है.