4 New STP in UP: उत्तर प्रदेश के चार शहरों में अब नदियों में सीधे सीवेज का पानी नहीं गिरेगा. नमामि गंगे मिशन फेज-2 के तहत प्रदेश में चार नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) शुरू किए गए हैं. इनमें आगरा में दो, वाराणसी और उन्नाव में एक-एक एसटीपी शामिल हैं. इन परियोजनाओं से शहरों की सीवर शोधन क्षमता बढ़ी है.
जल प्रदूषण नियंत्रण में अहम भूमिका
इस परियोजना से नदियों को स्वच्छ रखने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी. अब तक उत्तर प्रदेश में कुल 152 एसटीपी संचालित हैं, जो जल प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. प्रदेश में गंगा और यमुना समेत प्रमुख नदियों की स्वच्छता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. पीएम नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपशिष्ट जल का शोधन कर नदी प्रदूषण की रोकथाम को लेकर व्यापक स्तर पर काम हो रहा है.
सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का संचालन
नमामि गंगे मिशन फेज-2 के तहत सीवरेज इन्फ्रास्ट्रक्चर को व्यापक स्तर पर मजबूत किया जा रहा है. प्रदेश में वित्त वर्ष 2025-26 में चार बड़ी सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का संचालन शुरू हुआ है. इसके तहत आगरा में 31 एमएलडी और 35 एमएलडी के दो बड़े एसटीपी स्टार्ट हुए हैं. 842 करोड़ रुपये की इस परियोजना से करीब 25 लाख लोगों को फायदा होगा.
कितने लोगों को होगा फायदा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वाराणसी के अस्सी-बीएचयू क्षेत्र में 55 एमएलडी एसटीपी का संचालन हुआ है. 308 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस परियोजना से 18 लाख से ज्यादा लोगों को स्वच्छता और बेहतर अपशिष्ट जल प्रबंधन का फायदा होगा. उधर, शुक्लागंज (उन्नाव) में 65 करोड़ रुपये से 5 एमएलडी एसटीपी शुरू हुआ है. इससे 3 लाख से ज्यादा लोगों को फायदा होगा और गंगा में प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगेगी.
सीवर शोधन की कुल 74 परियोजनाएं मंजूर
राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक जोगिंदर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में सीवर शोधन की कुल 74 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं. इनमें से 41 परियोजनाएं पूरी हो गई हैं, बाकि पर तेजी से काम चल रहा है. मौजूदा वक्त में वित्तीय वर्ष में आगरा में 31 और 35 एमएलडी के दो बड़े एसटीपी शुरू हुए हैं.