हिमाचल में खौफनाक मंजर: टनल ब्लास्टिंग से हिल गया पूरा इलाका, रातों-रात बेघर हुए कई परिवार!

शिमला : हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में विकास कार्य अब लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। यहां चलौंठी क्षेत्र में फोरलेन टनल निर्माण के चलते कई हंसते-खेलते परिवारों पर संकट आ गया है। टनल के भीतर की जा रही भारी ब्लास्टिंग से रिहायशी मकानों में खतरनाक दरारें आ गई हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि बीती रात प्रशासन को तत्काल प्रभाव से एक बहुमंजिला भवन खाली करवाना पड़ा। शिमला के इस इलाके में अब लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। कई परिवार बेघर हो गए हैं और उन्होंने रिश्तेदारों के पास शरण ली है।

मंत्री अनिरूद्ध सिंह ने लगाई NHAI को फटकार
हादसे की खबर मिलते ही ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री अनिरूद्ध सिंह शनिवार को मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का जायजा लिया और पीड़ित परिवारों का दुख-दर्द सुना। मंत्री ने शिमला में काम कर रहे NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के अधिकारियों को मौके पर ही सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को तुरंत मुआवजा दिया जाए। संजौली-ढली बाईपास पर भी सड़क किनारे बड़ी दरारें देखी गई हैं। सुरक्षा को देखते हुए सड़क को वाहनों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है।

अधिकारियों के दावे हुए फेल, लोगों में आक्रोश
पीड़ित परिवारों ने NHAI पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि अधिकारियों ने एक दिन पहले ही निरीक्षण किया था। तब उन्होंने दावा किया था कि शिमला के इन घरों को टनल के काम से कोई खतरा नहीं है। लेकिन, उसी रात घरों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं। अब प्रभावित लोग मांग कर रहे हैं कि एनएचएआई उनके क्षतिग्रस्त घरों का अधिग्रहण करे। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर प्रभावित घरों को खाली करवा लिया है।

नुकसान का आंकलन करेगी विशेष कमेटी
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने मामले पर त्वरित कार्रवाई की है। उन्होंने एसडीएम शिमला ग्रामीण मंजीत शर्मा की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी का गठन किया है। साथ ही फोरलेन निर्माण कार्य को पूरी तरह रोक दिया गया है। स्टेट जियोलॉजिस्ट ने भी जमीन धंसने के कारणों पर अपनी रिपोर्ट तैयार करना शुरू कर दिया है। यह कमेटी एक हफ्ते के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। उपायुक्त ने भरोसा दिलाया है कि रिपोर्ट आते ही प्रभावितों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।