‘BJP की ताकत’ पार्टी वर्कशॉप में आखिरी लाइन में बैठे दिखे PM मोदी

PM Modi was seen sitting in the last row at the 'BJP's strength' party workshop
PM Modi was seen sitting in the last row at the 'BJP's strength' party workshop

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्‍वीर सुबह से वायरल हो रही है, ज‍िसमें वे सुबह 10:45 बजे पार्टी की सांसद कार्यशाला में पहुंचे और… पीछे जाकर चुपचाप बैठ गए. न कोई उद्घाटन भाषण, न तामझाम. बस सांसदों के बीच, गंभीरता से सुनते हुए देखे गए. पीएम मोदी को 10 या 15 मिनट के लिए इस कार्यशाला में नहीं पहुंचे, उन्‍होंने पूरा द‍िन बिताया. एक आम सांसद की तरह भागीदारी थी. यह तस्‍वीर देखते ही देखते वायरल हो गई. तब से बहुत सारे लोग सोशल मीडिया में बीजेपी की सांसद कार्यशाला के बारे में ज‍िज्ञासा है. लोग सोशल मीडिया में सर्च कर रहे हैं. हम आपको बताने जा रहे हैं, इस कार्यशाला के बारे में और ये भी बताएंगे क‍ि यह बीजेपी के लिए इतनी अहम क्‍यों है?

बीजेपी सांसद कार्यशाला को आप पार्टी का पॉलिटिकल स्कूल कह सकते हैं. यहां सांसदों को बताया जाता है कि जनता तक कैसे पहुंचना है. कैसे सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना है और विपक्ष के वार का जवाब कैसे देना है. यानी किताबों वाली क्लास नहीं, बल्कि चुनावी मैदान के लिए ट्रेनिंग क्लास. इसका उद्देश्य सांसदों को सरकार की नीतियों, योजनाओं और राजनीतिक रणनीतियों के साथ जोड़ना होता है. यह सांसदों के लिए सीखने, समझने और साझा करने का मंच है. यहां सांसदों को बताया जाता है कि जनता तक योजनाओं को कैसे पहुंचाना है और विपक्ष के नैरेटिव का जवाब कैसे देना है.

कौन-कौन बैठता है इस क्लास में?
इसमें लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसद शामिल होते हैं.
केंद्रीय मंत्री, पार्टी अध्यक्ष और संगठन के सभी बड़े पदाध‍िकारी.
कभी-कभी राज्यों के मुख्यमंत्र‍ियों को भी बीजेपी बुलाती है.
इस बार तो प्रधानमंत्री खुद पीछे बैठकर पूरी क्लास अटेंड करते रहे.

किस तरह के प्रस्ताव पास होते हैं?
यह कार्यशाला सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं रहती. यहां ठोस राजनीतिक और सामाजिक प्रस्ताव पास किए जाते हैं.
आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी भारत और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है.
सांसदों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में इन प्रस्तावों को जनता तक पहुंचाएं.
इसमें ऐसे सुझाव भी शामिल होते हैं जिन्हें बाद में सरकार की नीतियों में जगह मिल सकती है.

क्या प्रधानमंत्री पहले भी शामिल रहे हैं?
हां, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से सांसद कार्यशालाओं में हिस्सा लेते रहे हैं. लेकिन पहले वे ज्‍यादातर उद्घाटन या समापन भाषण देकर निकल जाते थे. इस बार का बदलाव यही है कि उन्होंने पूरे दिन हर सत्र में बैठकर सांसदों की बातें सुनीं. यह पार्टी कार्यकर्ताओं और सांसदों को यह संदेश देने का तरीका है कि हर आवाज मायने रखती है और जमीनी अनुभव को महत्व दिया जाता है.
प्रधानमंत्री का पूरा दिन क्यों खास माना गया?
पीएम मोदी ने सांसदों को यह दिखाया कि वह सिर्फ नेतृत्व नहीं करते, बल्कि सुनते भी हैं. यह संदेश गया कि पीएम सांसदों की राय सुनने आए हैं, सिर्फ भाषण देने नहीं. यह पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत करता है. इससे पार्टी में लोकतांत्रिक माहौल और मजबूत होता है. यह सांसदों का मनोबल बढ़ाने वाला कदम है कि उनकी बात सीधे प्रधानमंत्री तक पहुंच रही है. संदेश गया कि सांसदों की जमीनी राय को गंभीरता से लिया जा रहा है और उसे भविष्य की नीतियों में शामिल किया जाएगा. यह कार्यकर्ताओं और सांसदों को यह संदेश देने का तरीका भी था कि पार्टी में हर राय मायने रखती है.
चार सत्र-कई अहम प्रस्‍ताव
1. पहला सत्र: राष्ट्र निर्माण पर केंद्रित
इसमें कमलेश पासवान आत्मनिर्भर भारत पर, सुधांशु त्रिवेदी स्वदेशी भारत पर, बांसुरी स्वराज ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर और डॉ. हेमांग जोशी ने युवा शक्ति और रोजगार पर सांसदों की क्‍लास ली. सांसदों को समझाया गया कि सरकार की नीतियां आत्मनिर्भरता और युवाओं को केंद्र में रखकर बनाई जा रही हैं.
2. दूसरा सत्र: सोशल मीडिया का प्रभावी प्रयोग
ज्योतिमय महतो ने सोशल मीडिया टीम बिल्डिंग पर बात की. सी.पी. जोशी सरकारी योजनाओं का नैरेटिव बनाने पर. अतुल गर्ग ने नमो ऐप के बारे में विस्‍तार से बताया और उसका इस्‍तेमाल कैसे करें, इसे समझाया. तो संगीता यादव ने महिला समूह की सोशल मीडिया अप्रोच पर बात की. सांसदों को यह समझाया गया कि जनता तक सीधे पहुंचने का सबसे बड़ा माध्यम आज सोशल मीडिया है। हर सांसद को डिजिटल कम्युनिकेशन स्किल सीखनी होगी।
3. तीसरा सत्र: स्थायी समितियों के समूहों की चर्चा
संजय जायसवाल और बांसुरी स्वराज ने कृषि, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य पर बात की. तेजस्वंत पांडा और संबित पात्रा ने रक्षा, विदेश, आईटी पर. ऊर्जा, कोल, इंडस्ट्री पर शशांक त्रिपाठी और अपराजिता सारंगी ने बात रखी. शिक्षा, संस्कृति, कानून पर संचालन पी.पी. चौधरी और सुनील कुमार ने की. रेलवे, ट्रांसपोर्ट का संचालन भानुभरि महताब जबक‍ि रिपोर्टिंग रमेश अवस्थी ने की. हर सांसद को अपने क्षेत्रीय मुद्दे और कमेटी से जुड़े अनुभव साझा करने का मौका दिया गया.
4. चौथा सत्र: क्षेत्रीय समूहों की चर्चा
गरीय क्षेत्र खास तौर पर मत्स्य पालन योजनाओं पर चर्चा. लेफ्ट विंग क्षेत्र पर भी बात. इसमें गरीब कल्याण योजना की चर्चा. ग्रामीण क्षेत्र की चर्चा में किसान सम्मान निधि पर बात होनी है. शहरी क्षेत्र की बात स्वच्छता अभियान पर फोकस रही तो पहाड़ी और उत्तर-पूर्व क्षेत्र का जिक्र आया तो सीमावर्ती क्षेत्र का विकास मुद्दा रहा.