उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में किसानों और आपदा पीड़ितों के हित में दो अहम फैसले लिए हैं। सरकार ने एक तरफ मुजफ्फरनगर के गन्ना किसानों को बड़ी सौगात देते हुए मोरना चीनी मिल के आधुनिकीकरण को मंजूरी दी है, वहीं, बहराइच के बाढ़ प्रभावित गांव के लोगों को सुरक्षित स्थान पर बसाने का रास्ता साफ कर दिया है।
मोरना चीनी मिल की बदलेगी तस्वीर, क्षमता होगी दोगुनी
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। कैबिनेट ने मुजफ्फरनगर के मोरना स्थित ‘गंगा किसान सहकारी चीनी मिल’ के आधुनिकीकरण और पेराई क्षमता बढ़ाने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। पुरानी मशीनों और जर्जर प्लांट के कारण मिल अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रही थी, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा था। अब नई तकनीक के जरिए मिल का कायाकल्प किया जाएगा।
पेराई क्षमता में भारी इजाफा
इस मिल की मौजूदा क्षमता 2500 टन प्रति दिन है। इसे पहले चरण में बढ़ाकर 3500 टी.सी.डी. और बाद में 5000 टी.सी.डी. तक किया जाएगा। नई आधुनिक मशीनरी लगने से चीनी उत्पादन बढ़ेगा और मिल के संचालन में दक्षता आएगी। सरकार का मानना है कि इससे गन्ना किसानों का भुगतान समय पर सुनिश्चित हो सकेगा और उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस कदम से क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
बहराइच के 136 परिवारों का होगा पुनर्वास
बहराइच जिले के भरथापुर गांव के निवासियों के लिए सरकार ने एक मानवीय फैसला लिया है। नदियों और जंगल से घिरे इस गांव के 136 परिवारों को अब वहां से हटाकर सुरक्षित स्थान पर बसाया जाएगा। भरथापुर गांव एक तरफ गेरुआ नदी और दूसरी तरफ कौड़ियाल नदी से घिरा है, जबकि उत्तर में घना जंगल और नेपाल सीमा है। सड़क न होने के कारण यहां के लोग नाव के सहारे ही आते-जाते थे, जिससे हमेशा जान का खतरा बना रहता था।
हादसे के बाद जागी उम्मीद
29 अक्तूबर 2025 को कौड़ियाल नदी में नाव पलटने से 9 लोगों की मौत हो गई थी। इस दर्दनाक हादसे के बाद 2 नवंबर 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गांव का हवाई सर्वेक्षण किया था और पीड़ितों को सुरक्षित जगह बसाने का वादा किया था, जिसे अब कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
नए घर संग मिलेंगी कई सुविधाएं
इन परिवारों को तहसील मिहींपुरवा (मोतीपुर) की ग्राम पंचायत सेमरहना में बसाया जाएगा। इसके लिए 1.70 हेक्टेयर जमीन राजस्व विभाग को मुफ्त दी जाएगी।
सभी 136 परिवारों को अलग-अलग प्लॉट दिए जाएंगे और मुख्यमंत्री आवास योजना या प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान बनाकर दिए जाएंगे। नई बस्ती में बिजली (एलईडी लाइट), पक्की सड़कें, पानी, नाली और ग्रीन बेल्ट जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
जो परिवार पहले ही अपनी जमीन वन विभाग को सौंप चुके हैं, उन्हें वन विभाग के पैकेज के अलावा यह सरकारी मदद भी मिलेगी। नई बस्ती का नामकरण मुख्यमंत्री की अनुमति से किया जाएगा।