बिहार कांग्रेस अपने 3 विधायकों का चाह कर भी कुछ नहीं बिगाड़ पा रही, समझिए कैसे सेफ गेम खेल गए तीनों MLA

पटना: राज्यसभा चुनाव में राष्ट्रीय कांग्रेस की काफी किरकिरी हो गई। कांग्रेस के कई विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। कुछ ने मतदान में हिस्सा ही नहीं लिया। हालांकि ओडिशा में राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के चलते हारने वाली कांग्रेस ने अब बागी MLA के खिलाफ कड़ा कदम उठाते तीन विधायकों को निलंबित कर दिया। इनमें सनाखेमुंडी से रमेश चंद्र जेना, मोहाना से दसरथी गोमांगो, कटक से सोफिया फिरदौस शामिल हैं। पर बिहार में मतदान के दौरान गायब रह कर महागठबंधन के उम्मीदवार को हराने वाले कांग्रेस विधायक पर कोई कार्रवाई होते नहीं दिखी। आखिर इसकी क्या वजह रही होगी। जानते हैं उन कारणों को जिसने कांग्रेस आलाकमान को विवश कर दिया है।

निलंबित क्यों नहीं किया?
कांग्रेस के तीन विधायक जिन्होंने राज्यसभा चुनाव में वोटिंग नहीं की, उनमें मनिहारी विधायक मनोहर सिंह, वाल्मिकीनगर के विधायक सुरेंद्र कुशवाहा और विधायक मनोज विश्वास शामिल रहे। इन पर एक ही आरोप लग रहा है कि इन तीनों ने महागठबंधन के उम्मीदवार एडी सिंह को अपना वोट नहीं दिया। पर इन्होंने ओडिशा के विधायक की तरह क्रॉस वोटिंग नहीं किया। क्रॉस वोटिंग करने से सीधे सीधे सत्ता पक्ष को मदद करते साबित हो जाते। कांग्रेस आलाकमान यह समझ रहा है कि पार्टी की तरफ से कारण पूछा भी जाएगा तो वोट देने नहीं आने के पीछे के कई निजी वजह बता कर पीछा छुड़ा लेते। ठीक उसी तरह की जैसे राजद के विधायक फैसल अली ने कहा कि मैं अपनी मां के इलाज के लिए बिहार से बाहर था। ऐसे कई स्वास्थ संबंधी कारण बता कांग्रेस विधायक अपने को आरोप मुक्त कर सकते थे।

निलंबन करने से होता क्या?
मान लीजिये कि कांग्रेस आलाकमान मतदान में हिस्सा न लेने वाले विधायकों को अगर निलंबित भी कर देती तो क्या होता? वे विधायक को मिलने वाले सभी सुविधाओं का उपभोग करते। कांग्रेस आलाकमान पार्टी से निष्कासित कर देते तो ये विधायक आराम से किसी दूसरे दल की शोभा और संख्या बढ़ाते। कांग्रेस ऐसा कर अपने विधायकों को खुला नहीं छोड़ सकती थी। इसलिए उन विधायकों को पार्टी के साथ बनाया रखना ही आगे की रणनीति रही।

विधानसभा अध्यक्ष से कार्रवाई की मांग!
एक संभावना है कि कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर बिहार विधानसभा अध्यक्ष से उन विधायकों पर कार्रवाई की मांग कर सकती है। लेकिन कांग्रेस के नेता जानते हैं कि यह विधानसभा अध्यक्ष इतनी आसानी से उनके विधायक पर कार्रवाई नहीं करने वाले। यह पूरी तरह से विधानसभा अध्यक्ष पर निर्भर करता है। ठीक कोर्ट की तरह तारीख पर तारीख मिलती रहती। काफी लंबा और थकाऊ प्रोसेस है। अब आरजेडी को ही ले लें तो 2024 में आरजेडी के बागी चार विधायकों पर कार्रवाई करने का पार्टी ने फैसला लिया। आरजेडी के मुख्य सचेतक अख्तरुल ईमान शाहीन ने विधानसभा अध्यक्ष को विधायकों पर कार्रवाई करने को लेकर पत्र सौंपा और दल-बदल कानून के तहत उन पर कार्रवाई की मांग की थी। पर क्या हुआ?

कांग्रेस के भीतर चल क्या रहा है?
कांग्रेस के भीतरखाने की बात करें तो कांग्रेस यथास्थिति के पक्ष में है। कांग्रेस चाह कर भी कोई कार्रवाई नहीं करना चाहती है कि ताकि विधानसभा में छह विधायकों की संख्या बरकरार रहे। ऐसे में कम से कम चार विधायक पार्टी से नाता तोड़ेंगे तो दल बदल कानून लागू नहीं होगा। अगर कांग्रेस राज्यसभा में वोट न करने वाले 3 विधायकों को निष्कासित कर देती है तो इन विधायकों का किसी दल में जाना आसान होगा। और शेष जो तीन बचेंगे उनका भी मन हुआ तो उनके लिए भी पार्टी छोड़ना आसान हो जाएगा।