पटना: कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ से कांग्रेस खासा उत्साहित है. बिहार कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि यह यात्रा राहुल की वजह से सफल हुई है. जिस तरीके से कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने तेजस्वी यादव की सीएम उम्मीदवारों को लेकर पूछे गए सवाल पर दो टूक जवाब दे दिया कि मुख्यमंत्री बिहार की जनता तय करेगी. इसके बाद कांग्रेस की सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के पास कोई सीधा जवाब नहीं रह गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कांग्रेस चाहती क्या है?
“मुख्यमंत्री चेहरा बिहार का है और बिहार की जनता तय करेगी. आप रुककर देखिये, आप हड़बड़ी में क्यों हैं? चिंता मत कीजिए, सबकुछ ठीक चल रहा है. सीट शेयरिंग पर बातचीत अच्छी तरह से चल रही है. हर बैठक में ज्यादा से ज्यादा सीट क्लियर करने का प्रयास हो रहा है. हम संतुष्ट हैं और मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में इस पर अच्छी प्रोग्रेस दिखेगी.”- कृष्णा अल्लावरु, प्रभारी, बिहार कांग्रेस
‘तेजस्विता से बिहार में प्रकाश आएगा’: कृष्णा अल्लावरु की तरह ही पार्टी का कोई भी नेता मुख्यमंत्री के चेहरे पर स्पष्ट बयान नहीं देते हैं. बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता असित नाथ तिवारी भी कहते हैं कि चुनाव के बाद मुख्यमंत्री तय होगा. हालांकि उन्होंने तेजस्वी यादव का नाम लिए बगैर ही इशारों-इशारों में उनका नाम जरूर ले लिया.
“इस बार महागठबंधन की सरकार बन रही है. मुख्यमंत्री कौन होगा यह समय बताएगा लेकिन इस बार एनडीए की सरकार जा रही है और जो भी मुख्यमंत्री बनेगा उसकी तेजस्विता से बिहार में प्रकाश आएगा, बिहार का विकास होगा.”- असित नाथ तिवारी, प्रवक्ता, बिहार कांग्रेस
महागठबंधन में सीट बंटवारे और सीएम उम्मीदवारी पर पेंच
राहुल भी तेजस्वी के नाम पर राजी नहीं: तेजस्वी यादव की सीएम उम्मीदवारी पर जब अररिया में पत्रकारों ने राहुल गांधी से सवाल पूछा तो उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया. पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘हमारे बीच एक बहुत अच्छी साझेदारी बनी है. हम सभी दल एक साथ काम कर रहे हैं. कोई तनाव नहीं है, आपसी सम्मान है. वैचारिक रूप से हम एकजुट हैं. राजनीतिक रूप से हम एकजुट हैं. बहुत अच्छे परिणाम होंगे लेकिन वोट चोरी को रोकना होगा.’
तेजस्वी यादव और राहुल गांधी
तेजस्वी ने की राहुल को पीएम बनाने की अपील: वहीं, उससे कुछ दिन पहले ही ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान नवादा में तेजस्वी यादव ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की अपील की थी. उन्होंने अपने संबोधन में कहा, ‘इस बार बिहार से एनडीए को उखाड़ फेकेंगे और अगली बार जब भी लोकसभा का चुनाव होगा, राहुल गांधी जी को प्रधानमंत्री बनाने का काम करेंगे. बोलिए आपलोग, बनाएंगे ना.’
तेजस्वी यादव के साथ राहुल गांधी
क्या बोले आरजेडी प्रवक्ता?: कांग्रेस के रुख के बावजूद आरजेडी का मानना है कि मुख्यमंत्री तो तेजस्वी यादव ही होंगे. वहीं मुकेश सहनी भी उसके समर्थन में खड़े हैं लेकिन वह खुद भी डिप्टी सीएम का पद चाहते हैं. राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता एजाज अहमद मान-सम्मान की बात करते हुए कहते हैं कि विचारों के साथ, समन्वय के साथ और एक दूसरे का सम्मान रखते हुए इंडिया महागठबंधन को कांग्रेस और राजद मजबूती प्रदान कर रहे हैं. तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन एकजुट है. हमारी ही सरकार बनेगी.
मुकेश सहनी के साथ तेजस्वी यादव
“कांग्रेस और राजद दोनों पुराने गठबंधन के साथी हैं. एक दूसरे के सम्मान और एक दूसरे के भाव को आगे बढ़ाने में सहयोगी रहे हैं. महागठबंधन में विचारों का आदान-प्रदान है. एक दूसरे के प्रति सम्मान का भाव है. तेजस्वी यादव के चेयरमैनशिप में महागठबंधन इस बार बिहार विधानसभा चुनाव लड़ेगा.”- एजाज अहमद, प्रदेश प्रवक्ता, राष्ट्रीय जनता दल
वोटर अधिकार यात्रा के दौरान तेजस्वी बने राहुल के सारथी
क्या चाहती है कांग्रेस: असल में पिछले चुनावों की तुलना में कांग्रेस इस बार बिहार में फ्रंटफूट पर खेलना चाहती है. सीट बंटवारे से पहले कांग्रेस ने कई शर्ते रखी हैं. उन शर्तों में यह भी शामिल है कि पार्टी इस बार महागठबंधन में अच्छी खासी सीटों पर लड़ना चाहती है. कुछ नेताओं के मुताबिक यह संख्या 70 हो सकती है. खास बात ये भी है कि न केवल 70 सीटों पर कांग्रेस का दावा है, बल्कि पार्टी ने यह भी शर्त रखी है कि उसे अपनी पसंद की सीटें चाहिए.
सोनिया गांधी के साथ राहुल गांधी
दूसरी यात्रा की तैयारी में कांग्रेस: ‘वोटर अधिकार यात्रा’ से उत्साहित कांग्रेस अब बिहार में दूसरी यात्रा की शुरुआत करने जा रही है. इस दूसरे चरण की यात्रा का नाम ‘हर घर अधिकार यात्रा’ दिया गया है. पार्टी नेताओं का मानना है कि राहुल गांधी की यात्रा सफल रही है. इसके पीछे की एक वजह ये भी मानी जा रही है कि इस 16 दिनों की यात्रा में सिर्फ राहुल गांधी ही छाए रहे. तेजस्वी यादव और बाकी नेता पूरी तरह से नेपथ्य में चल रहे थे. ऐसे में बिहार में कांग्रेस और कांग्रेसियों का मनोबल सातवें आसमान पर है और दूसरे चरण की यात्रा से आरजेडी पर मिली बढ़त को बरकरार रखना चाहती है.
मल्लिकार्जुन खरगे के साथ राहुल गांधी
किस वोटबैंक पर नजर: राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ और ‘संविधान बचाओ यात्रा’ के बाद से दलित और अति पिछड़ा समाज का कांग्रेस की तरफ रुझान बढ़ा है. लोकसभा चुनाव में समर्थन भी मिला, जिस वजह से न केवल अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सासाराम सीट पर कांग्रेस कैंडिडेट की जीत हुई, बल्कि कई सीटों पर महागठबंधन को जमकर वोट भी मिले. वहीं कांग्रेस को लगता है कि अगर वह तेजस्वी यादव के चेहरे के बगैर विधानसभा चुनाव में जाती है तो सवर्ण जाति खासकर ब्राह्मण का समर्थन मिल सकता है, जो पारंपरिक रूप से कांग्रेस के ही वोटर हुआ करते थे. इसके साथ ही मुसलमानों में भी राहुल गांधी का आकर्षण तेजी से बढ़ा है.
मुस्लिम नेता के साथ तेजस्वी यादव और राहुल गांधी
1997 से कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन: 1997 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव पर जब चारा घोटाले के आरोप लगे तो उनको पद छोड़ना पड़ा. उन्होंने जनता दल से अलग होकर राष्ट्रीय जनता दल का गठन किया और पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया. उनके समर्थन में महज 136 विधायक ही साथ आये थे. ऐसे में कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने उनका समर्थन दिया. उस समय से कांग्रेस और आरजेडी का गठबंधन जारी है. हालांकि 2010 में अलग-अलग लड़े, जिसका खामियाजा दोनों दलों को हुआ.
तेजस्वी यादव, दीपांकर भट्टाचार्य और राहुल गांधी
बिहार में लगातार कम होती गई कांग्रेस: आजादी के बाद से लंबे समय तक कांग्रेस का बिहार की सत्ता पर शासन रहा लेकिन 1990 के बाद वह लगातार कमजोर होती गई. जिस वजह से उसको किसी न किसी का सहारा चाहिए था. लालू यादव ने इस मौके का खूब फायदा उठाया, क्योंकि कांग्रेस कैडर बेस पार्टी है. ऐसे में लालू ने अपने साथ कांग्रेस का गठबंधन हमेशा रखा लेकिन पार्टी का परफॉर्मेंस लगातार गिरता रहा. 1995 में कांग्रेस महज 28 सीट ही जीत पाई थी. 2000 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का ग्राफ और गिर गया और यह 23 सीट पर सिमट गई.
2005 महागठबंधन के लिए डिजास्टर: 2005 विधानसभा (अक्टूबर-नवंबर) का चुनाव कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के लिए डिजास्टर रहा. इस चुनाव में बीजेपी और जेडीयू ने बहुमत हासिल किया. इस चुनाव में कांग्रेस मात्र 9 सीट ही जीत पाई. 2010 के चुनाव में कांग्रेस की स्थिति और खराब हो गई. कांग्रेस मात्र चार सीट पर सिमट गई. इस चुनाव में आरजेडी ने भी बहुत बड़ा नुकसान उठाया. महज 22 सीट पर ही ‘लालटेन’ जल पाई.
महागठबंधन के नेता
2015 में ‘हाथ’ हुआ थोड़ा मजबूत: 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को ऑक्सीजन मिल गया. यह ऑक्सीजन नीतीश कुमार के रूप में मिला. लालू-नीतीश और कांग्रेस के गठबंधन के कारण कांग्रेस ने 27 सीटों पर जीत हासिल की थी लेकिन 2020 में फिर से पार्टी नीचे लुढ़क गई. 70 सीटों पर लड़ने के बावजूद कांग्रेस महज 19 सीट ही जीत पाई. महागठंबधन के सभी दलों में कांग्रेस का परफॉर्मेंस सबसे खराब रहा था.
क्या कहते हैं जानकार?: वरिष्ठ पत्रकार कुमार राघवेंद्र कहते हैं कि जब से कांग्रेस और आरजेडी का गठबंधन बिहार में चल रहा है, तब से लेकर अबतक कांग्रेस का फायदा तो आरजेडी को जरूर हुआ लेकिन आरजेडी का फायदा कांग्रेस को नहीं के बराबर मिला है. लालू यादव इस गठबंधन को साथ में लेकर इसलिए भी चलना चाहते हैं, क्योंकि इस वजह से सवर्ण समाज का साथ मिल जाता है. हालांकि अब परिस्थिति बदलती नजर आ रही है. इसलिए कांग्रेस इस बार अपनी शर्तों पर सीट शेयरिंग चाहती है.
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी
“बिहार में लालू यादव मजबूत रहे हैं. ऐसे में गठबंधन में सीटों के बंटवारे से लेकर सीटों के चयन तक वही करते थे. जाहिर सी बात है कि लालू यादव कांग्रेस को उन सीटों को ही देते थे, जिस पर वो कमजोर रहते थे. इसके बावजूद कांग्रेस ने जो भी सीट गठबंधन में हासिल कर पाई, उसके पीछे कांग्रेसी काडर ने ही काम किया है. अब परिस्थिति बदली है तो कांग्रेस की ये डिमांड वाजिब है कि उन्हें मनमुताबिक सीट मिले ताकि उनका परफॉर्मेंस बेहतर हो.”- कुमार राघवेंद्र, वरिष्ठ पत्रकार
2020 में कांग्रेस का प्रदर्शन: 2020 में कांग्रेस ने 70 सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन सिर्फ 19 सीटों पर ही जीत मिली. स्ट्राइक रेट महज 27 फीसदी रही. इस चुनाव में उसे 9.5% वोट मिले थे. वहीं, उससे पहले 2015 के चुनाव में 41 सीटों पर लड़कर पार्टी 27 सीटों पर जीतने में सफल रही थी. हालांकि वोट प्रतिशत 6.7 प्रतिशत ही था.