डील के करीब थे US-ईरान, होर्मुज पर भी बनने वाली थी बात, फिर आई एक कॉल… जानिए इनसाइड स्टोरी

US-ईरान डील को लेकर अब एक नया चौंकाने वाला खुलासा ईरान ने किया है. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, शांति-वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच सबकुछ पटरी पर आ चुका था. युद्ध को खत्म करने और होर्मुज को लेकर सहमति बनने वाली थी कि तभी जेडी वेंस को आई एक कॉल ने पूरा खेल पलट दिया.

अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने को लेकर चल रही अहम बातचीत अचानक बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई. करीब 21 घंटे तक चली इस मैराथन वार्ता से पूरी दुनिया को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन आखिरकार कोई समझौता नहीं हो सका. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बातचीत में हिस्सा लेने इस्लामाबाद पहुंचे थे, लेकिन लंबी चर्चा के बावजूद जब कोई रास्ता नहीं निकला, तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा. इस बीच ईरान ने एक चौंकाने वाला दावा किया है. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, बातचीत के दौरान आया एक फोन कॉल पूरे घटनाक्रम का टर्निंग पॉइंट बन गया. उनका कहना है कि इसी कॉल के बाद वार्ता की दिशा अचानक बदल गई और जो समझौता बनता दिख रहा था, वह पटरी से उतर गया.

आखिर ईरानी अधिकारी किस कॉल की बात कर रहे हैं जिसने इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही हाईप्रोफाइल बातचीत अचानक पटरी से उतार दिया. ये सवाल तो अब हर किसी के जेहन में गूंज रहा होगा. तो चलिए हम आपको वार्ता टूटने की पूरी इनसाइड स्टोरी बताते हैं. ईरानी अधिकारियों ने बताया कि जब वार्ता अपने चरम पर थी और ऐसा लगने लगा था कि अब सबकुछ ठीक हो जाएगा तभी इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को फोन किया.

बेंजामिन नेतन्याहू की कॉल ने बिगाड़ दिया खेल
बेंजामिन नेतन्याहू की जेडी वेंस को की गई इस फोन कॉल के बाद अमेरिकी पक्ष का रुख अचानक बदल गया और बातचीत का फोकस भी अलग दिशा में चला गया. नतीजा यह हुआ कि जो समझौता लगभग तय माना जा रहा था, वह अचानक टूट गया और वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई. इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर क्षेत्रीय राजनीति में तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं और इस फोन कॉल को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं. इस वार्ता को लेकर दो सप्ताह के लिए लागू किया गया युद्धविराम क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने की एक अहम कोशिश माना जा रहा था.

ईरान के विदेशमंत्री अब्बास अराघची का दावा
ईरान के वरिष्ठ अधिकारी अराघची ने हालिया घटनाक्रम को लेकर एक बड़ा दावा किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के बीच हुई एक फोन कॉल के बाद बातचीत का पूरा रुख बदल गया. उनके मुताबिक, जो वार्ता पहले अमेरिका और ईरान के मुद्दों पर केंद्रित थी, वह अचानक इजरायल के हितों की ओर झुक गई. अराघची का कहना है कि अमेरिका बातचीत के जरिए वह हासिल करना चाहता था, जो वह युद्ध के मैदान में नहीं कर पाया. सीजफायर की अवधि खत्म होने में अब कुछ ही दिन शेष थे, ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि बातचीत के जरिए हालात संभल सकते हैं, लेकिन इसी बीच यह वार्ता टूट गई, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है.

ईरान ने पूरी ईमानदारी से लिया था वार्ता में हिस्सा
अब्बास अराघची ने इस बात का भी दावा किया कि ईरान ने पूरी ईमानदारी के साथ इस वार्ता में हिस्सा लिया, लेकिन अमेरिका के बदले हुए रुख ने किसी भी संभावित समझौते की उम्मीदों को खत्म कर दिया. हालांकि, इस कथित फोन कॉल को लेकर वॉशिंगटन की तरफ से न तो कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है और न ही इसका खंडन किया गया है. ऐसे में इस पूरे मामले ने और भी ज्यादा उलझन पैदा कर दी है और स्थिति पहले से अधिक पेचीदा नजर आ रही है.

जेडी वेंस की ‘कठिन शर्तों’ पर नहीं माना ईरान
ईरान ने इस कूटनीतिक विफलता के लिए अमेरिका की कड़ी शर्तों को जिम्मेदार ठहराया है. तेहरान का कहना है कि वॉशिंगटन ने न केवल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलमार्ग में अपने और सहयोगी देशों के जहाजों के लिए पूरी तरह स्वतंत्र आवाजाही की मांग की, बल्कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने और उसके पास मौजूद यूरेनियम भंडार को सौंपने जैसी सख्त शर्तें भी रखीं. अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसे ‘फाइनल और बेस्ट ऑफर’ बताया था, लेकिन ईरान ने इन शर्तों को अस्वीकार कर दिया. वार्ता टूटने के बाद अब क्षेत्र में अनिश्चितता और तनाव और गहरा गया है, जिससे आने वाले दिनों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.