परिसीमन फॉर्मूले पर इंडी गठबंधन ही नहीं, इन तीन दलों ने भी बढ़ाई मोदी सरकार की टेंशन

नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र के दौरान केंद्र सरकार आज महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पेश करेगी। जिसमें परिसीमन के जरिए से लोकसभा सीटों की संख्या को 850 तक बढ़ाने का प्रस्ताव है, ताकि 2011 की जनगणना के आधार पर 2029 के चुनावों से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें रिजर्व की जा सके।

विपक्ष की कई प्रमुख पार्टियों ने इसके परिसीमन से जुड़े प्रावधानों के खिलाफ वोट करने का फैसला किया है। जबकि सरकार संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 को एक बड़े सुधार के रूप में ला रही है। संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में मौजूद सदस्यों की संख्या के दो तिहाई के समर्थन की जरूरत होती है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास लोकसभा में फिलहाल यह आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

इंडी गठबंधन ने किया परिसीमन का विरोध
विधेयक पेश किए जाने से एक दिन पहले बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर कई विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक हुई, जिसमें यह फैसला किया गया कि महिला आरक्षण पर सरकार का सपोर्ट किया जाएगा। जबकि परिसीमन से संबंधित प्रावधानों का पुरजोर विरोध किया जाएगा।

बैठक में खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल और जयराम रमेश, द्रमुक नेता टी. आर. बालू, तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (उबाठा) के संजय राउत एवं अरविंद सावंत, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले, आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह सहित अन्य विपक्षी नेता शामिल हुए। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने डिजिटल माध्यम से बैठक में भाग लिया।

महिला आरक्षण पर सपोर्ट, लेकिन परिसीमन पर विरोध
बैठक के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ‘हम सभी महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में हैं, लेकिन यह जिस तरह से लाया गया है, उसको लेकर आपत्ति है। उन्होंने कहा, ‘हमने फैसला किया है कि हम इस विधेयक (परिसीमन) का विरोध करेंगे।

खरगे ने आगे कहा, हम सभी महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में हैं। लेकिन जिस तरीके से इसे पेश किया गया है, उससे चिंताएं पैदा होती हैं। यह राजनीतिक रूप से प्रेरित है। सरकार विपक्षी दलों को दबाने के लिए ऐसा कर रही है। हमने लगातार महिला आरक्षण का समर्थन किया है, लेकिन हम इस बात पर जोर देते हैं कि पहले के (2023 के) संशोधनों को लागू किया जाए। सरकार परिसीमन के जरिए चालबाजी कर रही है।