राजस्थान में प्रदेश निकाय और पंचायत चुनाव न होने के चलते मुख्य विपक्षी दल सरकार पर चुनाव कराने का दबाव बना रहा है. हालांकि बीते दिनों राजस्थान हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग को जल्द से जल्द प्रदेश में निकाय व पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन ओबीसी आरक्षण की रिपोर्ट के चलते चुनाव पर सवाल खड़े हो गए हैं. वहीं अब यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के एक बयान से बड़ा अपडेट मिला है.
प्रदेश के निकाय व पंचायत चुनाव को लेकर मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने इस वर्ष नवंबर तक मतदाता सूची तैयार करने का कार्यक्रम जारी कर दिया है. इसके अलावा राज्य ओबीसी आयोग भी तीन माह में ओबीसी का डाटा एकत्रित कर रिपोर्ट प्रस्तुत कर देगा.
कब हो सकते हैं निकाय चुनाव?
उन्होंने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि नवंबर या दिसंबर के पहले पखवाड़े तक यह काम पूरा हो जाएगा और ओबीसी के आंकड़े भी आ जाएंगे. ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आने के बाद वार्ड और निकाय प्रमुखों के आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी. यह सब कार्यक्रम दिसंबर के पहले पखवाड़े में पूर्ण हो जाएंगे और इसके बाद हम राज्य निर्वाचन आयोग को जनवरी में एक राज्य एक चुनाव के तहत चुनाव कराने का अनुरोध करेंगे. वहीं इससे अब यह बात साफ हो गई है कि अब निकाय चुनाव अगले साल 2026 की शुरुआत में ही होंगे.
रिपोर्ट के लिए 3 महीने का समय
वहीं राज्य ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 3 महीने का समय मांगा है. आयोग का कहना है कि दिसंबर 2025 तक ही वह रिपोर्ट सौंप पाएगा. अब ऐसे में यह साफ है कि चुनाव दिसंबर के बाद ही करवाए जा सकते हैं.