रायपुर. छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला एक मामला सामने आया है, जहां दिमागी बीमारी से जूझ रही एक मासूम बच्ची को इलाज के बजाय आर्थिक कारणों का हवाला देकर रेफर कर दिया गया. जानकारी के मुताबिक, बच्ची को गंभीर मानसिक समस्या के चलते परिजन इलाज के लिए AIIMS लेकर पहुंचे थे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे बेहतर इलाज की जरूरत बताई.
क्या राजधानी रायपुर स्थित एम्स में अब केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना का भी लाभ बंद कर दिया गया है? ये सवाल इसलिए खड़ा होता है क्योंकि एक बच्ची को एम्स से ये कहते हुए रेफर कर दिया गया कि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. यह बात सिर्फ मौखिक नहीं की गई है बल्कि रेफरल लेटर में लिखित रूप से दर्ज करते हुए इसे अंबेडकर अस्पताल भेजा गया है.
गंभीर बीमारी से जूझ रही बच्ची
दंतेवाड़ी की रहने वाली 12 साल की राजकुमारी पिछले कई महीनों से गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझ रही है, लेकिन एम्स रायपुर में इलाज शुरू करने के बजाय ‘फाइनेंशियल इश्यू’ का हवाला देते हुए बच्ची को अंबेडकर अस्पताल रेफर कर दिया गया.
भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक बच्ची 6 महीने से मायोकलोनिक जर्क और ड्रॉप अटैक्स से पीड़ित है. एम्स डॉक्टरों ने शुरुआती जांच में दो गंभीर बीमारियों सबएक्यूट स्कलेरोसिंग पेनेंसेफलाइटिस और ऑटोइम्यून इंसोफेलाइटिस की आशंका जताई है, जिसमें तत्काल विशेषज्ञ जांच और इलाज की जरूरत है. इसके बावजूद उसे मेकाहारा भेज दिया गया.
इलाज की जरूरत लेकिन एम्स ने खड़े किए हाथ
आश्चर्य की बात है कि रेफरल स्लिप के रीजन फॉर कॉलम में स्पष्ट रूप से ‘फाइनेंशियल इश्यू’ लिखा गया है. बेहतर और विशेषज्ञ इलाज की जरूरत होने के बावजूद परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उसे मेकाहारा भेजने का फैसला किया गया. फिलहाल बच्ची की हालत स्थिर बताई जा रही है.
इस पूरे मामले ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है, जहां संसाधनों और व्यवस्थाओं की कमी का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है.