रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघ पड़ा मुसीबत में, पर्यटक वाहनों ने घेरा, 8 के खिलाफ एक्शन

सवाई माधोपुर : वन्य जीवों को देखना भले ही रोमांचकारी हो सकता है, लेकिन इंसान का उनकी परेशानी का कारण बनना कभी उचित नहीं हो सकता। राजस्थान के सवाई माधोपुर के प्रसिद्ध नेशनल पार्क रणथंभौर टाइगर रिजर्व में पर्यटकों के आकर्षण ने एक बाघ को परेशानी में डाल दिया। पर्यटकों के वाहनों ने रास्ते से जा रहे एक बाघ को घेर लिया। जब इसका वीडियो वायरल हो गया तो पर्यटकों को सैर कराने वाले चार ड्राइवरों और उनके साथ चल रहे चार गाइडों पर गाज गिरी।

बाघ का रास्ता रोककर खड़े हो गए वाहन

राजस्थान के सवाई माधोपुर का रणथंभौर टाइगर रिजर्व एक बार फिर विवादों में है। वायरल हुए एक ताजा वीडियो में एक बाघ को परेशान होते देखा जा सकता है। टाइगर रिजर्व में वन्य जीवों को देखने के लिए पर्यटक वाहनों से सैर पर निकले थे। जंगल के कच्चे रास्ते पर जा एक बाघ के मौजूद होने की सूचना मिलते ही पर्यटक वाहन इस स्थान पर तेजी से पहुंच गए। बाघ रास्ते पर सीधा चला जा रहा था और इसी बीच उसके सामने कई वाहन आकर खड़े हो गए। इसी बीच उसके पीछे से भी कई वाहन आकर खड़े हो गए। रास्ते पर सीधे चले जा रहे बाघ के आगे पीछे वाहनों का जाम लग लग गया और उसका रास्ता रोक लिया गया। फिर कुछ वाहन रिवर्स होकर पीछे की तरफ चले गए।

चार ड्राइवरों और चार गाइडों पर कार्रवाई

इसके बाद बाघ को परेशानी से निजात कैसे मिली इसका तो पता नहीं चल सका, लेकिन इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इसके लिए जिम्मेदार आठ लोगों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। इनमें जंगल सफारी में इस्तेमाल होने वालीं चार जिप्सी के ड्राइवर और चार गाइड शामिल हैं।

बेबस बाघ, सेल्फी ले रहे थे पर्यटक

बताया जाता है कि यह घटना रणथंभौर अभ्यारण्य के जोन नंबर 3 में हुई। जब बाघ वाहनों के जमघट के बीच फंसा था तब वाहनों पर सवार पर्यटक उसकी तस्वीरें और सेल्फी ले रहे थे। यह नियमों का साफ उल्लंघन है। नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी के दिशानिर्देशों के मुताबिक जंगल सफारी के दौरान वाहनों और बाघ के मध्य कम से कम 30 फीट का अंतर होनी जरूरी है। जंगल में जहां रास्ते संकरे हों या घाटी अथवा ढलान वाले इलाके हों तो वहां यह अंतर 50 से 100 फीट होना आवश्यक है।

‘इनाम’ के लिए नियम रखे जा रहे ताक पर

बताया जाता है कि नेशनल पार्क में गाइड और ड्राइवर पर्यटकों को बाघ के दर्शन कराकर उन्हें खुश करने और फिर ‘इनाम’ हासिल करने के लिए नियमों का पालन नहीं करते और वाहनों को बाघ या अन्य जानवरों के समीप तक ले जाते हैं। इससे जहां जंगली जीव परेशान हो जाते हैं। ऐसा करना खतरे से भी खाली नहीं है। यदि बाघ गुस्से में आ जाए तो वह आक्रामक हो सकता है।

बताया जाता है कि रणथंभौर के डिवीजनल फॉरेस्ट आफिसर मानस सिंह ने इस मामले की जांच कराई है। मामले में दोषी पाए गए वन विभाग के चार वाहन चालकों और चार गाइडों के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।