छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को बड़ा झटका, 8 लाख की इनामी महिला नक्सली ने किया सरेंडर

रायपुर: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में नक्सलवाद के खिलाफ एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। मंगलवार को 8 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली जानसी उर्फ वछेला ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। यह घटना नक्सलियों के लिए एक करारा झटका मानी जा रही है, क्योंकि जानसी पिछले दो दशकों से संगठन की सक्रिय सदस्य थी।

20 साल की नक्सली जिंदगी का अंत
गरियाबंद के पुलिस अधीक्षक निखिल रखेचा ने बताया कि जानसी ने साल 2005 में नक्सल संगठन में कदम रखा था। तब से वह छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में कई हिंसक वारदातों में शामिल रही। उन्होंने बताया, ‘जानसी पर 8 लाख रुपये का इनाम था। उसने 20 साल तक नक्सल संगठन के लिए काम किया, लेकिन आज उसने हथियार डालकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।’ जानसी का सरेंडर न केवल पुलिस की रणनीति की जीत है, बल्कि यह भी दिखाता है कि नक्सली अब संगठन के भीतर बढ़ते दबाव और अविश्वास से जूझ रहे हैं।

सुकमा पुलिस की अहम भूमिका
इस सरेंडर में सुकमा पुलिस की भूमिका बेहद अहम रही। पुलिस अधीक्षक रखेचा ने बताया कि सुकमा पुलिस ने जानसी को सरेंडर के लिए प्रेरित करने में खास सहयोग दिया। उन्होंने कहा, “हमारी टीमें लगातार नक्सलियों से संपर्क में थीं और उन्हें सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित कर रही थीं। पुलिस अब बाकी नक्सलियों से भी अपील कर रही है कि वे हथियार छोड़कर समाज में वापस लौटें।

सरकार की पुनर्वास नीति
केंद्र सरकार की ‘आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीति’ नक्सलियों को समाज में लौटने का सुनहरा मौका देती है। इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को तुरंत 1.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और 36 महीनों तक हर महीने 2,000 रुपये का भत्ता दिया जाता है। इसके अलावा, उन्हें उनकी पसंद के किसी भी पेशे में प्रशिक्षण और हथियार जमा करने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन भी मिलता है।

नक्सलवाद पर लगातार प्रहार
यह पहला मौका नहीं है जब नक्सलियों को बड़ा झटका लगा हो। हाल ही में 14 सितंबर को प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) की केंद्रीय समिति की सदस्य सी. सुजाता उर्फ कल्पना ने भी तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। 40 लाख रुपये की इनामी सुजाता बस्तर के कई जिलों में 70 से ज्यादा आपराधिक मामलों में वांछित थी।

बस्तर के पुलिस महानिरीक्षक पी. सुंदरराज ने बताया कि पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र बलों की संयुक्त कार्रवाइयों ने नक्सलियों पर दबाव बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा, ‘पिछले कुछ समय में 850 से ज्यादा नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। यह हमारी नीतियों और रणनीति की सफलता है।’

नक्सलवाद का अंत करीब?
जानसी और सुजाता जैसे बड़े नक्सलियों का सरेंडर इस बात का संकेत है कि नक्सलवाद अब अपने अंतिम दौर में है। पुलिस, खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाइयों ने नक्सलियों के हौसले पस्त कर दिए हैं। साथ ही, सरकार की पुनर्वास नीतियों ने कई नक्सलियों को नई जिंदगी की उम्मीद दी है।