वर्ल्ड मेंस्ट्रुअल हाइजीन डे 28 मई को मनाया जाता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि इसका 28 मई को मनाया जाना सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक समझ है. एक नॉर्मल मेंस्ट्रुअल साइकिल औसतन 28 दिन की होती है और पीरियड्स का ड्यूरेशन औसतन 5 दिन का होता है, इसलिए इसे 28 मई को मनाया जाता है.
पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई का ध्यान दें
मेंस्ट्रुअल हाइजीन मेंटेन करना बहुत जरूरी है क्योंकि अगर हम पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखेंगे तो शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों तरह की परेशानियां हो सकती हैं. शुरुआत में इचिंग, जलन, रैशेज, वेजाइनल डिस्चार्ज, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन और रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट इन्फेक्शन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. अगर इन इन्फेक्शन्स को बार-बार इग्नोर किया जाए या ये रिपीट होते रहें, तो आगे चलकर पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज, पेल्विक पेन, बुखार, ट्यूब्स में सूजन या ट्यूब ब्लॉकेज जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिसकी वजह से बाद में इन्फर्टिलिटी तक की समस्या हो सकती है. इसलिए मेंस्ट्रुअल हाइजीन को हल्के में नहीं लेना चाहिए.
कपड़े वाले पैड्स का ना करें इस्तेमाल
अब अगर पीरियड प्रोडक्ट्स की बात करें तो मार्केट में कई ऑप्शन्स अवेलेबल हैं. सबसे कॉमन हैं सेनेटरी पैड्स. डिस्पोजेबल पैड्स और कपड़े वाले पैड्स दोनों इस्तेमाल किए जाते हैं क्योंकि ये यूज करने में आसान होते हैं. लेकिन कोई भी पीरियड प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से पहले उसका सही साइज चुनना जरूरी है, जो आपकी एज, फ्लो और कम्फर्ट के हिसाब से हो. कपड़े वाले पैड्स को हम बहुत ज्यादा प्रेफर नहीं करते क्योंकि चाहे कितनी भी सफाई कर लें, उन्हें पूरी तरह सैनिटाइज करना मुश्किल होता है और उनमें इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है. चाहे पैड पूरा सोक हुआ हो या नहीं, उसे हर 6 से 8 घंटे में बदल देना चाहिए.अब अगर टैम्पोन और मेंस्ट्रुअल कप की बात करें तो ये दोनों प्रोडक्ट्स वेजाइना के अंदर इस्तेमाल होते हैं, इसलिए इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करना सीखना जरूरी होता है. एक बार गायनाकोलॉजिस्ट से सही तरीका सीख लेना अच्छा रहता है.
टैम्पोन का इस्तेमाल
टैम्पोन में एक धागा होता है जिसकी मदद से उसे बाहर निकाला जाता है. टैम्पोन को 4 से 6 घंटे के अंदर बदल देना चाहिए. रात में टैम्पोन यूज करने से बचना चाहिए क्योंकि अगर इसे 8 घंटे से ज्यादा लगातार रखा जाए तो एक सीरियस बीमारी का खतरा हो सकता है जिसे टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम कहते हैं.
मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल
मेंस्ट्रुअल कप एक बार समझ आने के बाद काफी आसान और कम्फर्टेबल हो जाता है. इसका फायदा यह है कि यह एनवायरनमेंट फ्रेंडली होता है. कप भरने के बाद उसे निकालकर साफ किया जा सकता है और दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है. अगर सही तरीके से साफ और सैनिटाइज करके रखा जाए तो एक मेंस्ट्रुअल कप 5 से 8 साल तक आराम से चल सकता है.
पीरियड पैंटीज का इस्तेमाल
आजकल पीरियड पैंटीज भी अवेलेबल हैं. इन्हें खासकर किशोरियां या जिनके पीरियड्स अभी शुरू हुए हैं, वो लोग ज्यादा इस्तेमाल करते हैं. अक्सर इन्हें पैड के साथ यूज किया जाता है ताकि लीकेज का डर कम हो जाए. टैम्पोन और मेंस्ट्रुअल कप का फायदा यह भी होता है कि ये आमतौर पर ज्यादा लीकेज-प्रूफ होते हैं.
हाइजीन मेंटेन कैसे करें
अगर मेंस्ट्रुअल हाइजीन मेंटेन करनी है तो कुछ बेसिक बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. हर पीरियड प्रोडक्ट को समय पर बदलना चाहिए. प्रोडक्ट बदलने से पहले और बाद में हाथ जरूर धोने चाहिए. इस्तेमाल किए हुए पैड या दूसरे प्रोडक्ट्स को पेपर या रैपर में लपेटकर बंद डस्टबिन में डालना चाहिए. इन्हें कभी भी टॉयलेट में फ्लश नहीं करना चाहिए.
इन बातों का ध्यान देना
पीरियड्स के दौरान रेगुलर नहाना चाहिए और प्राइवेट पार्ट्स को हल्के गुनगुने पानी से साफ करना चाहिए. प्राइवेट पार्ट्स में ज्यादा साबुन, खासकर परफ्यूम वाले साबुन, डियोड्रेंट, टैल्क या एंटीबायोटिक साबुन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. वी-वॉश भी बहुत ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. सिर्फ उन्हीं लोगों को इस्तेमाल करना चाहिए जिन्हें बार-बार इचिंग, रैशेज, डिस्चार्ज या इन्फेक्शन की समस्या होती है. वरना नॉर्मल वेजाइना खुद को नेचुरली क्लीन कर लेती है. डूशिंग भी नहीं करनी चाहिए.
एक जरूरी बात यह भी है कि सरकार के जन औषधि केंद्रों पर बहुत कम कीमत में सेनेटरी पैड्स उपलब्ध होते हैं. कई जगहों पर लगभग 1 रुपये में एक पैड मिल जाता है ताकि हर महिला तक पीरियड प्रोडक्ट्स की पहुंच हो सके. जन औषधि केंद्र का एक ऐप भी होता है जिसकी मदद से लोग अपने आसपास का सेंटर ढूंढ सकते हैं और वहां से कम कीमत में पीरियड प्रोडक्ट्स और दूसरी दवाइयां ले सकते हैं. अगर हम इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें तो अच्छी तरह मेंस्ट्रुअल हाइजीन मेंटेन कर सकते हैं.