कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी, जिन्होंने ढहाई ममता की TMC; भतीजे अभिषेक को कर दिया आउट

TMC News: पश्चिम बंगाल में बड़ा खेला हो गया है। तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित किए गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने ही पार्टी को दो गुटों में बांट दिया है। TMC का नया धड़ा उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष मान चुका है। वहीं, उनका कहना है कि वह पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ही पार्टी का सलाहकार मानते हैं। सवाल है कि कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी, जिन्होंने बंगाल की राजनीति में एक दशक से ज्यादा समय तक दबदबे वाली पार्टी में हड़कंप मचा दिया है।

कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी
दिवंगत लेफ्ट नेता सीताराम येचुरी के करीबी माने जाने वाले ऋतब्रत बनर्जी की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत सीपीएम से हुई थी। वह साल 2000 के आसपास बड़े छात्र नेता बनकर उभरे थे। वह स्टूडेंट विंग SFI के महासचिव भी रहे। 34 साल की उम्र में ही उन्हें लेफ्ट ने राज्यसभा के लिए चुन लिया था। अब खास बात है कि फटाफट सियासत की सीढ़ियां चढ़ने के बाद 2017 में पार्टी ने उन्हें बाहर कर दिया।

वह हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात करने पहुंचे थे। उनके साथ विधायक संदीपन साहा भी मौजूद थे। खास बात है कि इसके साथ ही राज्य में अटकलों का दौर शुरू हो गया था। वहीं, बाद में उन्होंने हस्ताक्षर फ्रॉड का भी मुद्दा उठाया था, जिसकी जांच अभी जारी है।

सीपीएम से निकाले जाने के बाद बनर्जी ने टीएमसी का रुख किया था और पार्टी के ट्रेड यूनियन विंग के प्रमुख बने। साल 2024 में पूर्व सांसद जवाहर सरकार के इस्तीफे के बाद टीएमसी ने बनर्जी को राज्यसभा भेजा था। वहीं, हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने उलुबेरिया पूर्व सीट से जीत दर्ज की है।

58 विधायक समर्थन में
विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ बोस ने पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत के नेतृत्व वाले 58 विधायकों वाले समूह को मुख्य विपक्षी दल की मान्यता दे दी है। बुधवार को ही उनकी अगुवाई में अधिकांश विधायकों ने स्पीकर से असली टीएमसी होने का दावा किया था। कहा जा रहा है कि टीएमसी नेतृत्व से नाराज 58 विधायकों ने अपना समर्थन पत्र सौंपा था।

खास बात है कि टीएमसी के इस नए गुट ने तृणमूल विधायक दल का नेता, जावेद खान, संदीपन साहा और शिउली साहा को उप-नेता और अखरुज्जमान को मुख्य सचेतक चुना है। इससे पहले बनर्जी ने साथी विधायकों ने विधानसभा परिसर में एक बैठक की। इस बैठक में शामिल कोई भी विधायक गत मंगलवार को मध्य कोलकाता में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के धरने में शामिल नहीं हुए थे।

दलबदल रोधी कानून के तहत किसी भी अलग गुट को विधानसभा में अपनी सदस्यता बचाने के लिए मूल विधायक दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है। मौजूदा सदन में तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों की संख्या को देखते हुए अयोग्यता से बचने के लिए यह कानूनी सीमा 54 विधायकों की बैठती है।