फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान मंगलवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अचानक एक संक्षिप्त मुलाकात हुई है। लगभग डेढ़ साल के लंबे अंतराल के बाद हुई इस पहली आमने-सामने की मुलाकात में दोनों नेताओं ने बेहद गर्मजोशी के साथ हाथ मिलाया और आपस में कुछ देर बातचीत की। हालांकि इस अचानक हुई बातचीत में क्या चर्चा हुई इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है, लेकिन इस मुलाकात ने बुधवार को दोनों नेताओं के बीच होने वाली औपचारिक और बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक का मुख्य मंच तैयार कर दिया है।
मार्को रुबियो ने किया था भारत का दौरा
पिछले कुछ समय से भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक शुल्कों और बयानों को लेकर कुछ तल्खी चल रही थी, जिसे सुधारने के लिए हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत का दौरा भी किया था। लेकिन पिछले ही हफ्ते ओमान के तट के पास एक व्यापारिक जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों में एक नया तनाव पैदा हो गया है। ऐसे गंभीर माहौल और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों के बीच, बुधवार को होने वाली इस द्विपक्षीय वार्ता पर अब पूरी दुनिया की नजरें टिक गई हैं, जहां पीएम मोदी इस वैश्विक मंच पर अन्य कई विश्व नेताओं के साथ भी बैठकें करेंगे।
समुद्री सुरक्षा की गंभीर चुनौतियां
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी की यह मुलाकात एक बेहद संवेदनशील और जटिल भू-राजनीतिक माहौल के बीच हुई है। इस समय पश्चिम एशिया में भारी तनाव की स्थिति बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका की ओर से लागू की गई नाकेबंदी ने भारत के वाणिज्यिक हितों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। ऐसे में इस शिखर सम्मेलन ने भारत को एक सीधा और मजबूत मंच दिया है। इसके जरिए भारत समुद्री सुरक्षा से जुड़ी अपनी चिंताओं को सीधे अमेरिका के सामने रख सकता है।
वैश्विक मंच पर रणनीतिक साझेदारी
इस जी7 शिखर सम्मेलन का मुख्य फोकस वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता और स्वच्छ ऊर्जा जैसे विषयों पर केंद्रित है। लेकिन इस महामंच पर पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की आपसी केमिस्ट्री ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यह बातचीत दर्शाती है कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी कितनी गहरी है। दोनों देश आर्थिक मोर्चे पर एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ वे तात्कालिक भू-राजनीतिक घर्षण बिंदुओं और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने का रास्ता भी तलाश रहे हैं।