मेरठ, लखनऊ, आगरा, वाराणसी…कई शहरों में घर और प्लॉट की होगी ई-नीलामी

8th pay commission latest: केंद्रीय कर्मचारियों को बेसब्री से आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है। तमाम एक्सपर्ट का अनुमान है कि वेतन आयोग अपनी सिफारिशें साल 2027 की दूसरी छमाही तक सरकार को सौंप सकता है। माना जा रहा है कि वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो केंद्रीय कर्मचारियों को 18 से 24 महीने तक का बकाया (एरियर) मिलने की उम्मीद है। एरियर के तौर पर एकमुश्त बड़ी रकम मिलने की स्थिति को देखते हुए केंद्रीय कर्मचारियों के मन में कई तरह के सवाल चल रहे हैं। सवाल है कि क्या एक ही वित्तीय वर्ष में दो साल का बकाया मिलने से टैक्स का बोझ बढ़ जाएगा?

एरियर कितना मिल सकता है?
करीब दो साल के एरियर के तौर पर केंद्रीय कर्मचारियों को कितनी रकम मिलेगी, इसका कैल्कुलेशन पूरी तरह से फिटमैंट फॉर्मूला पर आधारित है। फिटमेंट फैक्टर वह गुणक होता है, जिसके आधार पर कर्मचारियों के मौजूदा बेसिक वेतन को संशोधित किया जाता है। कर्मचारी संगठनों ने 1.92 से लेकर 3.83 तक फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। जितना अधिक फिटमेंट फैक्टर होगा, उतनी ही ज्यादा सैलरी बढ़ोतरी और एरियर मिलेगा।

क्या एरियर मिलने पर बढ़ जाएगा टैक्स?
जानकारों की मानें तो 8वें वेतन आयोग के तहत मिलने वाला सैलरी एरियर आम तौर पर उसी साल टैक्स के दायरे में आएगा, जिस साल वह मिला है। सेक्शन 89(1) के तहत राहत का मकसद यह पक्का करना है कि कर्मचारी को सिर्फ इसलिए ज्यादा टैक्स न देना पड़े क्योंकि सैलरी एरियर उस साल के बजाय किसी दूसरे साल में मिला है, जिससे वे असल में जुड़े थे।

विशेषज्ञों के मुताबिक जिन कर्मचारियों के पास धारा 80C, 80D, एनपीएस, एचआरए या होम लोन जैसी बड़ी कटौतियां हैं, उनके लिए पुराना टैक्स रिजीम अधिक फायदेमंद हो सकता है। वहीं, कम कटौती वाले कर्मचारियों के लिए नया टैक्स रिजीम बेहतर साबित हो सकता है। सबसे सही तरीका यह है कि जिस साल पैसा मिला है, उस साल के लिए दोनों सिस्टम के तहत टैक्स का हिसाब लगाया जाए और सेक्शन 89(1) के तहत राहत के बाद नेट टैक्स देनदारी की जांच की जाए।

एक्शन मोड में वेतन आयोग
आपको बता दें कि आठवां वेतन आयोग 2025 में गठन के बाद इस साल एक्शन मोड में है। वेतन आयोग ने इस साल फरवरी में वेबसाइट को लॉन्च किया। इस वेबसाइट के जरिए केंद्रीय कर्मचारियों, कर्मचारी संगठन और हितधारकों से तरह-तरह के सुझाव मांगे गए हैं। इसके अलावा, वेतन आयोग देश के अलग-अलग शहर में कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक कर रहा है।

पहली नीलामी के लिए जरूरी तारीखें
पंजीकरण शुरू होने की तारीख: 15 जून 2026
पंजीकरण और टोकन राशि जमा करने की अंतिम तारीख: 29 जून 2026
ई-नीलामी की तारीख: 30 जून 2026
जो लोग बोली लगाना चाहते हैं, उन्हें तय समय के अंदर यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी. वहीं, अगर 30 जून की ई-नीलामी में किसी संपत्ति पर केवल एक ही बोली मिलती है और नीलामी पूरी नहीं हो पाती है, तो दोबारा मौका दिया जाएगा.

दूसरी नीलामी की तारीखें
नए आवेदकों के लिए पंजीकरण और टोकन राशि जमा करने का समय: 2 जुलाई 2026 से 21 जुलाई 2026 तक
दूसरी ई-नीलामी की तारीख: 22 जुलाई 2026
लखनऊ की वृंदावन योजना में खास मौका
परिषद ने बताया है कि लखनऊ की वृंदावन योजना के सेक्टर-15 में आईटी और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए भी प्लॉट किफायती दरों पर उपलब्ध हैं. ऐसे में कारोबार बढ़ाने या भविष्य के निवेश की सोच रहे लोगों के लिए भी यह अच्छा अवसर हो सकता है.

कैसे करें आवेदन?
ई-नीलामी में हिस्सा लेने के लिए आवेदकों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके लिए आप ई-नीलामी पोर्टल (https://upavpauction.procure247.com/) पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद ने एक क्यूआर कोड भी जारी किया है, इसे स्कैन करके भी पंजीकरण किया जा सकता है.