RBI Repo Rate: मिडिल ईस्ट में तीन महीने से भी ज्यादा चले तनाव से ग्लोबल लेवल पर मार्केट में आर्थिक अनिश्चितता बनी रही. ईरान और अमेरिका की जंग के बीच क्रूड ऑयल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल के दाम में इजाफा हुआ. इससे घरेलू बाजार में भी महंगाई देखी गई. इसके बाद यह उम्मीद की जाने लगी कि आरबीआई महंगाई को कंट्रोल करने के लिए रेपो रेट में इजाफा कर सकता है. हालांकि, जून के पहले हफ्ते में हुई एमपीसी में ब्याज दर को पुराने लेवल पर ही बरकरार रखा गया. लेकिन अब ग्लोबल अनिश्चितता के बीच आरबीआई (RBI) गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ब्याज दर में इजाफे की अटकलों पर विराम लगा दिया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में रेपो रेट बढ़ाने की बात करना जल्दबाजी होगी.
अमेरिका और ईरान के बीच हुए अस्थायी एग्रीमेंट के बावजूद क्रूड ऑयल की कीमत पर अभी अनिश्चितता बनी हुई है. आरबीआई गवर्नर ने ईटी को दिये इंटरव्यू में कहा कि यदि आने वाले महीनों में ब्याज दर बढ़ाना तय होता तो एमपीसी के रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘रिस्ट्रिक्टिव’ कर दिया जाता. लेकिन आरबीआई की तरफ से ऐसा नहीं किया गया क्योंकि बाजार में अभी काफी उतार-चढ़ाव है. अमेरिका और ईरान के बीच हुए एग्रीमेंट के बाद क्रूड ऑयल के दाम में भारी गिरावट देखी गई. इससे भारत को भी बड़ी राहत मिली है.
जरूरत का 90 फीसदी कच्चा तेल आयात होता है
भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है. हालांकि, गवर्नर ने आगाह किया कि दोनों देशों के बीच हुआ एग्रीमेंट अभी बेहद नाजुक मोड़ पर है और तेल की सप्लाई को पूरी तरह नॉर्मल होने में समय लगेगा. उन्होंने कहा कि हालांकि कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी का रिस्क कम हुआ है. लेकिन हमें यह देखना होगा कि क्रूड ऑयल की कीमत आखिर किस लेवल पर जाकर टिकती हैं. आरबीआई (RBI) की एमपीसी ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए देश की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 6.9 फीसदी से घटाकर 6.6 फीसदी कर दिया है.
महंगाई दर का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1 फीसदी किया
इसके अलावा आरबीआई ने महंगाई दर के अनुमान को 4.6 फीसदी से बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया है. जून में हुई एमपीसी की डिटेल से पता चला कि नीति निर्माताओं को उम्मीद थी कि जंग खत्म होने के बाद इकोनॉमी में तेजी से सुधार होगा. इस बीच, दोनों देशों में एग्रीमेंट के बाद सिटीग्रुप के इकोनॉमिस्ट ने इस वित्तीय वर्ष में ब्याज दरें बढ़ने के अपने अनुमान को वापस ले लिया है. गवर्नर के अनुसार, इस समय मानसून और क्रूड ऑयल की कीमत सबसे बड़े कारण हैं. इन पर कड़ी नजर रखी जा रही है.
रुपये में उतार-चढ़ाव रोकने के लिए पूरी तरह तैयार
देश में 22 जून तक औसतन मानसून नॉर्मल से 43 फीसदी कम रहा है. इसने कृषि उत्पादन और ग्रामीण इलाकों में डिमांड को लेकर चिंता बढ़ा दी. इस पर गवर्नर मल्होत्रा ने आश्वस्त किया कि भारत के पास पर्याप्त खाद्य भंडार मौजूद है, लेकिन नीति निर्माता पूरी तरह सतर्क हैं. पिछले महीने डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड 97 के लेवल पर पहुंचने वाले रुपये को लेकर आरबीआई गवर्नर ने कहा कि यह बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर है. आरबीआई रुपये में उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए पूरी तरह तैयार है.
रिजर्व बैंक ने विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए बैंकों को विदेशी मुद्रा जमा बढ़ाने की अनुमति देने और टैक्स छूट जैसे कदम उठाए हैं. आरबीआई गवर्नर की तरफ से उम्मीद जताई गई कि देश को जल्द ब्लूमबर्ग एग्रीगेट बॉन्ड इंडेक्स में शामिल किया जा सकता है, इससे देश में विदेशी कैपिटल का प्रवाह बढ़ाने में मदद मिलेगी. गवर्नर संजय मल्होत्रा के इस बयान के बाद भारतीय बॉन्ड मार्केट और करेंसी मार्केट में भी हलचल देखी गई.