जमीन विवाद में फँसे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के बचाव में उतरी बीजेपी ने आरोपों को बेबुनियाद और राजनीतिक साज़िश तो बताया लेकिन द इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में आए मोहन यादव परिवार की ज़मीन में बेतहाशा बढ़ोतरी पर चुप्पी साध ली। अख़बार की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021 में मंत्री बनने के बाद से मोहन यादव परिवार और उनसे जुड़ी फर्मों की जमीन 4 गुना बढ़ गई है।
कांग्रेस ने इस रिपोर्ट के आधार पर मोहन यादव पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने इस मामले को उठाते हुए मोहन यादव को ‘भ्रष्टाचारी मुख्यमंत्री’ क़रार दिया है। इसने पूछा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिवार द्वारा तेजी से जो जमीन खरीदी गई, उसके लिए पैसे कहां से आए? पार्टी ने द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाए कि मोहन यादव के मंत्री रहते और फिर मुख्यमंत्री बनने के दौरान इन जमीनों के आसपास कई रोड प्रोजेक्ट्स आए। इसने यह भी आरोप लगाया कि उज्जैन में 500 करोड़ रुपये कीमत वाली जमीन सिर्फ 1 रुपये में सीएम के सांस्कृतिक सलाहकार के ट्रस्ट को दे दी गई।
बीजेपी का बचाव
बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। उन्होंने दावा किया कि सीएम बनने के बाद मोहन यादव या उनके परिवार की जमीन नहीं बढ़ी। उन्होंने कहा कि उज्जैन मास्टर प्लान मई 2023 में ही सार्वजनिक हो चुका था, इसलिए कोई अंदरूनी जानकारी का फायदा नहीं लिया गया।
मध्य प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा, ‘2023 के चुनावी हलफनामे में मोहन यादव और पत्नी सीमा यादव की जमीन घोषित थी, उसके बाद नहीं बढ़ी। बेटे वैभव यादव के पास पहले से 16 एकड़ जमीन थी, वह भी नहीं बढ़ी। श्री सिद्धिविनायक देवकॉन्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के पास 2023 में 68 एकड़ थी, अब करीब 65 एकड़ रह गई है।’ उन्होंने यह भी कहा कि सीएम ने 2017 में कंपनी से डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था, इसलिए कंपनी के नए कामकाज से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
हालाँकि, पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि जाँच कराने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा, ‘अगर कोई जाँच की मांग करता है तो होनी चाहिए। अगर अवैध तरीके से संपत्ति जमा की गई है तो वह भी सामने आनी चाहिए।’
क्या कहती है इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट?
रिपोर्ट के अनुसार 2021 से 2023 तक जब मोहन यादव शिक्षा मंत्री थे उनके परिवार और कंपनियों ने उज्जैन में कम से कम 85 एकड़ जमीन खरीदी। 2024-2025 में सीएम बनने के बाद 168 एकड़ अतिरिक्त जमीन खरीदी गई। परिवार के पास पहले से क़रीब 82 एकड़ जमीन थी। इस हिसाब से 2021-23 में कुल जमीन दोगुनी होकर करीब 167 एकड़ हो गई और सीएम बनने के बाद फिर दोगुनी होकर 335 एकड़ के आसपास पहुंच गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ जमीनें नए रोड प्रोजेक्ट और उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के इलाकों के पास हैं, जहां विकास होने की संभावना थी।
बीजेपी नेताओं के आँकड़ों में विरोधाभास
रिपोर्ट के मुताबिक़ अमित मालवीय और अन्य नेताओं के दावों के विपरीत कुछ खरीदारियां सीएम बनने के बाद हुईं। जून-जुलाई 2025 में सीएम की बहू शालिनी ने उज्जैन के गंगेड़ी में 12 प्लॉट वाली 10.35 एकड़ जमीन 1.03 करोड़ रुपये में खरीदी। कंपनी श्री सिद्धिविनायक देवकॉन्स ने दिसंबर 2024 से मार्च 2025 तक 2.6 एकड़ जमीन खरीदी। कंपनी ने सितंबर 2024 में 12 एकड़ जमीन सीएम के चचेरे भाई नीलेश को बेची, जो वहां हाउसिंग प्रोजेक्ट बना रहे हैं।
रिपोर्ट बताती है कि मास्टर प्लान सार्वजनिक होने से पहले मार्च-अप्रैल 2023 में ही परिवार ने 30 एकड़ जमीन खरीद ली थी। सीएम बनने के बाद खरीदी गई 168 एकड़ में से बड़ी हिस्सेदारी नए रोड और हाईवे के पास है।