युद्ध से पहले के लेवल पर आये कच्‍चे तेल के दाम, फिर भी पेट्रोल-डीजल पर बुरी खबर

नई दिल्‍ली: भारत की ओर से खरीदे जाने वाले कच्‍चे तेल के औसत दाम (इंडियन बास्केट क्रूड) संघर्ष से पहले के स्तर पर आ गए हैं। बुधवार को बास्केट की कीमत 70.71 डॉलर प्रति बैरल रह गई। ऐसे में लोगों को अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत का इंतजार है। इन्‍हें हाल में बढ़ाया गया था। वैसे इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के जल्द ही फ्यूल की रिटेल कीमतें घटाने की संभावना नहीं है। फिर भले ही कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है। रिफाइनर पश्चिम एशिया में हुए संघर्ष के दौरान हुए भारी नुकसान की भरपाई करना चाहते हैं। साथ ही शांति समझौते के लागू होने पर भी नजर रखे हुए हैं।

74 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंची कीमत
क्रूड ऑयल की इंडियन बास्केट मिली-जुली है। इसमें ‘ब्रेंट डेटेड’ (स्वीट ग्रेड) और ओमान – दुबई (सावर ग्रेड) का औसत शामिल है। इसे रिफाइनरियां हर महीने इंपोर्ट करती हैं। फरवरी में इसकी औसत कीमत 69.01 डॉलर प्रति बैरल थी। लेकिन, मार्च में यह बढ़कर 113.49 डॉलर और अप्रैल में 114.48 डॉलर हो गई। इसके बाद मई में इसमें थोड़ी कमी आई।

जून में अब तक बास्केट की औसत कीमत 86.31 डॉलर प्रति बैरल रही है। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड, जो वेस्ट एशिया संघर्ष के चरम पर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, अभी 74 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। यह संघर्ष शुरू होने के बाद से इसका सबसे निचला स्तर है।

पेट्रोल-डीजल के सस्ते होने की संभावना कम
मनी कंट्रोल ने एक एनालिस्ट (नाम न छापने की शर्त पर) के हवाले से बताया, ‘ओएमसी के तुरंत कीमतें बदलने की संभावना नहीं है। वे शांति समझौते के नतीजों का इंतजार करेंगे और देखेंगे। उन्हें होने वाला नुकसान (अंडर-रिकवरी) बहुत ज्‍यादा था। पहले यह रोजाना 1,000 करोड़ रुपये था, जो बाद में घटकर 500-600 करोड़ रुपये रोजाना हो गया। चूंकि उनका नुकसान बहुत ज्‍यादा है। इसलिए सरकार ओएमसी को नुकसान की भरपाई के लिए कुछ समय दे सकती है।’

मई में तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और LPG की बिक्री पर रोजाना 1,000 करोड़ रुपये तक का कुल नुकसान हुआ था। बाद में सरकार की ओर से पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर बढ़ाने के बाद यह नुकसान घटकर 500-600 करोड़ रुपये रोजाना रह गया। मार्च-मई 2026 के दौरान पेट्रोल, डीजल और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) पर कुल अंडर-रिकवरी का अनुमान लगभग 1 लाख करोड़ रुपये है।

एनर्जी मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका
क्रिसिल इंटेलिजेंस में कच्चे तेल के मामलों के जानकार सेहुल भट्ट ने कहा कि अगर भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहती है तो मौजूदा स्तर से अंडर-रिकवरी में कोई खास बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि शांति समझौते को लागू करने को लेकर अनिश्चितताओं के कारण एनर्जी मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

इस संघर्ष के कारण इंटरनेशनल LPG की कीमतों में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। क्रिसिल इंटेलिजेंस के अनुसार, भारत में LPG इंपोर्ट के लिए बेंचमार्क माने जाने वाले सऊदी अरामको कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में फरवरी-जून 2026 के दौरान 46% की बढ़ोतरी हुई। कारण है कि मार्केट ने सप्लाई में रुकावट के जोखिम और ज्‍यादा फ्रेट कॉस्ट (ढुलाई लागत) को कीमतों में शामिल कर लिया था।

अंडर-रिकवरी का पूरा गणित
दिल्ली के मामले में मई 2026 में प्रति घरेलू सिलेंडर अंडर-रिकवरी बढ़कर 651 रुपये हो गई। जहां कमर्शियल LPG की कीमतें मार्केट की स्थितियों के हिसाब से तेजी से बदलीं, वहीं घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका असर सीमित रहा। खरीद लागत में हुई बढ़ोतरी का एक हिस्सा तेल मार्केटिंग कंपनियों ने खुद उठाया।

इससे मार्च-मई 2026 के दौरान LPG अंडर-रिकवरी कुल मिलाकर लगभग 22,000 करोड़ रुपये हो गई। यह जानकारी क्रिसिल के डेटा से मिली है। जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया का युद्ध बहुत गंभीर था। इसने ग्लोबल मार्केट से हर दिन 10-11 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई खत्म कर दी थी।

विश्लेषक ने कहा कि देश अब आगे की लड़ाई या जियोपॉलिटिकल झटकों से होने वाले जोखिम को कम करने के लिए कच्चे तेल का स्टॉक जमा करेंगे।

विश्लेषक ने कहा, ‘तेल की 6 mbd (मिलियन बैरल प्रति दिन) की कमी रही है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के अनुसार, सदस्य देशों ने अपने स्ट्रैटेजिक रिजर्व से 4 mbd तेल सप्लाई मार्केट में जारी की थी। देश अब बफर स्टॉक बनाने और लड़ाई या किसी जियोपॉलिटिकल तनाव के फिर से पैदा होने की स्थिति से निपटने के लिए अपनी इन्वेंट्री जमा करेंगे और 6 mbd के नुकसान की भरपाई करेंगे।’

आगे क्रूड की कीमतें बढ़ने का डर
जानकारों का यह भी कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। कारण है कि ग्लोबल स्तर पर तेल की इन्वेंट्री कम हो रही है। ऐसे हालात में, OMCs (ऑयल मार्केटिंग कंपनियों) की ओर से जल्द ही रिटेल फ्यूल की कीमतें कम करने की संभावना नहीं है।

S&P ग्लोबल एनर्जी के अनुसार, 2026 की दूसरी छमाही में इंटरनेशनल कच्चे तेल की कीमतें 80-90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की उम्मीद है। वजह यह है कि पश्चिम एशिया संघर्ष से सप्लाई में रुकावट के बाद ग्लोबल तेल इन्वेंट्री में गिरावट जारी है।

हालांकि, होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने से एनर्जी फ्लो में सुधार और मार्केट का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन, मार्केट में शामिल लोग अभी भी यह मान रहे हैं कि मार्केट के सामान्य होने और इन्वेंट्री को फिर से भरने में समय लगेगा।

ICRA के वाइस प्रेसिडेंट और कॉर्पोरेट रेटिंग्स के को-हेड प्रशांत वशिष्ठ ने भी कहा था कि सप्लाई और कच्चे तेल की कीमतों के युद्ध से पहले के स्तर पर आने में कम से कम दो तिमाही या एक साल तक का समय लगेगा।

भारत में रिटेल पेट्रोल और डीजल की कीमतें अप्रैल 2022 की शुरुआत से काफी हद तक स्थिर रही हैं। इससे मार्केटिंग मार्जिन कम हुआ है। OMC की बैलेंस शीट पर दबाव बढ़ा है।

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के आंकड़ों से पता चला है कि ग्लोबल स्तर पर ऊंची कीमतों के बीच मई में रिफाइनरों की ओर से आयात किए गए तेल की औसत कीमत 106.23 डॉलर और अप्रैल में 114.48 डॉलर थी।